By म्यर पहाड़ on October 13, 2010
भगवान राम की कथा पर आधारित रामलीला नाटक के मंचन की परंपरा भारत में युगों से चली आयी है। लोक नाट्य के रुप में प्रचलित इस रामलीला का देश के विविध प्रान्तों में अलग अलग तरीकों से मंचन किया जाता है। उत्तराखण्ड खासकर कुमायूं अंचल में रामलीला मुख्यतया गीत-नाट्य शैली में प्रस्तुत की जाती है। [...]
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By म्यर पहाड़ on September 10, 2010
उत्तराखण्ड में प्रारम्भ से ही कृषि और पशुपालन आजीविका का मुख्य स्रोत रहा है। जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण व्यापार की संभावनाएं नगण्य थीं, लेकिन कम उपजाऊ जमीन होने के बावजूद कृषि और पशुपालन ही जीवनयापन के प्रमुख आधार थे। आज भी कृषि और पशुपालन से सम्बन्धित कई पारम्परिक लोक परम्पराएं और तीज-त्यौहार पहाड़ के [...]
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By म्यर पहाड़ on August 31, 2010
Uttarakhand is well known for its ancient culture. In its daily life animals, birds, fields all basic amenities of human life is given utmost importance. Gods and Goddess are treated like family members and given a prestigious position in the family people treat Gods and Goddesses as their own and gives them a high and [...]
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By म्यर पहाड़ on August 12, 2010
उत्तराखण्ड एक कृषि प्रधान राज्य है, आदिकाल से यहां की सभ्यता जल, जंगल और जमीन से प्राप्त संसाधनों पर आधारित रही है। जिसकी पुष्टि यहां के लोक त्यौहार करते हैं, प्रकृति और कृषि का यहां के लोक जीवन में बहुत महत्व है, जिसे यहां की सभ्यता अपने लोक त्यौहारों के माध्यम से प्रदर्शित करती है। [...]
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By म्यर पहाड़ on July 15, 2010
उत्तराखण्ड की संस्कृति की समृद्धता के विस्तार का कोई अन्त नहीं है, हमारे पुरखों ने सालों पहले जो तीज-त्यौहार और सामान्य जीवन के जो नियम बनाये, उनमें उन्होंने व्यवहारिकता और विज्ञान का भरपूर उपयोग किया था। इसी को चरितार्थ करता उत्तराखण्ड का एक लोक त्यौहार है-हरेला। हरेले का पर्व हमें नई ऋतु के शुरु होने [...]
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By म्यर पहाड़ on March 9, 2010
उत्तराखण्ड राज्य में कुमाऊं-गढवाल मण्डल के पहाड़ी क्षेत्र अपनी विशिष्ट लोक परम्पराओं और त्यौहारों को कई शताब्दियों से सहेज रहे हैं| यहाँ प्रचलित कई ऐसे तीज-त्यौहार हैं, जो सिर्फ इस अंचल में ही मनाये जाते हैं. जैसे कृषि से सम्बन्धित त्यौहार हैं हरेला और फूलदेई, माँ पार्वती को अपने गाँव की बेटी मानकर उसके मायके [...]
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By म्यर पहाड़ on March 8, 2010
उत्तराखण्ड यूं तो देवभूमि के नाम से दुनिया भर में जाना जाता है, इस सुरम्य प्रदेश की एक और खासियत यह है कि यहां के निवासी बहुत ही त्यौहार प्रेमी होते हैं। जटिल परिस्थितियों, रोज एक नई परेशानी से रुबरु होने, जंगली जानवरों के आतंक और दैवीय आपदाओं से घिरे रहने के बाद भी यहां [...]
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By म्यर पहाड़ on February 23, 2010
होली का त्यौहार रंगों का त्यौहार है,धूम का त्यौहार है। लेकिन उत्तराखण्ड के कुमाऊं मण्डल में होली रंगो के साथ-साथ रागों के संगम का त्यौहार है। इसे अनूठी होली कहना भी अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि यहां होली सिर्फ रंगो से ही नहीं बल्कि रागों से भी खोली जाती है। पौष माह के पहले सप्ताह से [...]
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By म्यर पहाड़ on January 15, 2010
उत्तराखण्ड के रचनात्मक युवाओं की संस्था ’क्रियेटिव उत्तराखण्ड-म्यर पहाड़’ द्वारा समय-समय पर उत्तराखण्ड की महान विभूतियों पर पोस्टर जारी किये जाते रहे हैं, साथ ही उत्तराखण्ड की सामाजिक, आर्थिक, लोककला, संस्कृति, इतिहास, पर्यटन आदि विषयों पर पुस्तकें भी प्रकाशित की जाती रही हैं। इसी क्रम में मकर संक्रान्ति के पावन अवसर पर इस संस्था द्वारा [...]
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By म्यर पहाड़ on December 5, 2009
हिमालय का सौन्दर्य जितना आकर्षक है उतनी ही सुन्दर प्रेम कहानियां यहां की लोक कथाओं और गीतों में दिखाई देती हैं। उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में प्रेम कहानियां लोकगथाओं के रूप में जन जन तक पहुंची हैं, हालांकि यह अधिकतर राजघरानों से जुड़ी हैं लेकिन वह आम आदमी तक प्यार का संदेश छोड्ने में कामयाब [...]
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By म्यर पहाड़ on December 3, 2009
Rangwali Pichhaura is a garment worn at ceremonial occasions in Uttarakhand. From bride to great grandmother, every women in the family wear it on occasions be it namkarna or marriage, upanayan or mundon. It has a special significance and mandatory for all married women in the family or close relation. Another salient feature of Rangwali [...]
Posted in Culture | Tagged pichaura, swastik, traditional dresses, uttarakhand |