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5 responses to “स्थानीय बनाम व्यावहारिक भाषा”

  1. भाषा ही नहीं, सांस्कृतिक पहचान का प्रश्न

    [...] ही नहीं, सांस्कृतिक पहचान का प्रश्नस्थानीय बनाम व्यावहारिक भाषाशैलनट की कार्यशाला रुद्रपुर मेंएक [...]

  2. लिपि कला नहीं विज्ञान है- एक आविष्कार है

    [...] ही नहीं, सांस्कृतिक पहचान का प्रश्नस्थानीय बनाम व्यावहारिक भाषाशैलनट की कार्यशाला रुद्रपुर मेंएक [...]

  3. कुमाऊनी_गढ़वाली को मिले उत्तराखण्ड की ’द्वितीय भाषा’ का दर्जा

    [...] ही नहीं, सांस्कृतिक पहचान का प्रश्नस्थानीय बनाम व्यावहारिक भाषाशैलनट की कार्यशाला रुद्रपुर मेंएक [...]

  4. भाषायें बहता हुआ दरिया हैं

    [...] ही नहीं, सांस्कृतिक पहचान का प्रश्नस्थानीय बनाम व्यावहारिक भाषाशैलनट की कार्यशाला रुद्रपुर मेंएक [...]

  5. लिपि कोई मजबूरी नहीं

    [...] कर रहे हैं।  इसकी पहली कड़ी में आप लक्ष्मण सिंह बिष्ट “बटरोही’ जी का लेख , दूसरी कड़ी में बद्रीदत्त कसनियाल का [...]

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