<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
		>
<channel>
	<title>Comments on: Save Jungle: Uttarakhandi Way..</title>
	<atom:link href="http://www.merapahad.com/save-forest-in-uttarakhandi-way/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://www.merapahad.com/save-forest-in-uttarakhandi-way/</link>
	<description>Uttarakhand-Abode of GOD-Devbhoomi</description>
	<lastBuildDate>Thu, 29 Jul 2010 07:00:29 +0000</lastBuildDate>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>http://wordpress.org/?v=3.0</generator>
	<item>
		<title>By: अड़्याट</title>
		<link>http://www.merapahad.com/save-forest-in-uttarakhandi-way/#comment-15</link>
		<dc:creator>अड़्याट</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2009 05:36:04 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://merapahad.com/save-forest-in-uttarakhandi-way/#comment-15</guid>
		<description>उत्तराखण्ड राज्य का क्षेत्रफल 53,483 वर्ग कि०मी० है, इसमें 34650 वर्ग किमी क्षेत्र वन क्षेत्र है अर्थात इतने क्षेत्र में जंगल है। जिसमें 46.07 प्रतिशत आरक्षित वन, 18.48 प्रतिशत संरक्षित वन, 35.2 प्रतिशत गैर वन क्षेत्र व 0.25 प्रतिशत क्षेत्र में निजी वन हैं। कुल वन क्षेत्रफल का 15.73 प्रतिशत क्षेत्र वन पंचायतों के अधीन है। जबकि राजस्व विभाग के पास 13.76 फीसदी, वन विभाग के अधीन 70.05 प्रतिशत व अन्य संस्थाओं के अधीन 0.46 प्रतिशत वन क्षेत्र हैं। इसके अलावा 626321 हेक्टेयर क्षेत्र में मिश्रित वन व 598585 हेक्टेयर वन क्षेत्र खाली है।

     राज्य में सबसे अधिक 399329 हेक्टेयर क्षेत्र में चीड़ के जंगल हैं। जो कि आग लगने के प्रमुख कारक हैं, चीड़ के पेड़ एक तो जमीन की नमी को सोख देते हैं और इसका फैलाव इतना तेज होता है कि १-२ साल में ही पूरे जंगल में यह ही छा जाता है। सड़क के किनारे ही इन पेड़ों को लगाया जाना चाहिये ताकि ये मिट्टी को पकड़ लें और नमी सोख लें, जिससे भू-स्खलन का खतरा थोड़ा कम हो सकता है। इसके अतिरिक्त उत्तराखण्ड में जहां कहीं भी चीड़ के जंगल हैं, उनका नियोजित कटान कर उसके स्थान पर चौड़ी पत्ती वाले पेड़ और ऊंचाई की जगहों में इन्वायरमेंट और पीपुल फ्रेंडली पेड़, बांज, बुरांस, काफल, उतीस, देवदार, तुन, फल्यांट आदि का रोपण किया जाना चाहिये। मिश्रित और चौड़ी पत्ती वाले जंगलों की ज्यादा आवश्यकता मुझे प्रतीत होती है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>उत्तराखण्ड राज्य का क्षेत्रफल 53,483 वर्ग कि०मी० है, इसमें 34650 वर्ग किमी क्षेत्र वन क्षेत्र है अर्थात इतने क्षेत्र में जंगल है। जिसमें 46.07 प्रतिशत आरक्षित वन, 18.48 प्रतिशत संरक्षित वन, 35.2 प्रतिशत गैर वन क्षेत्र व 0.25 प्रतिशत क्षेत्र में निजी वन हैं। कुल वन क्षेत्रफल का 15.73 प्रतिशत क्षेत्र वन पंचायतों के अधीन है। जबकि राजस्व विभाग के पास 13.76 फीसदी, वन विभाग के अधीन 70.05 प्रतिशत व अन्य संस्थाओं के अधीन 0.46 प्रतिशत वन क्षेत्र हैं। इसके अलावा 626321 हेक्टेयर क्षेत्र में मिश्रित वन व 598585 हेक्टेयर वन क्षेत्र खाली है।</p>
<p>     राज्य में सबसे अधिक 399329 हेक्टेयर क्षेत्र में चीड़ के जंगल हैं। जो कि आग लगने के प्रमुख कारक हैं, चीड़ के पेड़ एक तो जमीन की नमी को सोख देते हैं और इसका फैलाव इतना तेज होता है कि १-२ साल में ही पूरे जंगल में यह ही छा जाता है। सड़क के किनारे ही इन पेड़ों को लगाया जाना चाहिये ताकि ये मिट्टी को पकड़ लें और नमी सोख लें, जिससे भू-स्खलन का खतरा थोड़ा कम हो सकता है। इसके अतिरिक्त उत्तराखण्ड में जहां कहीं भी चीड़ के जंगल हैं, उनका नियोजित कटान कर उसके स्थान पर चौड़ी पत्ती वाले पेड़ और ऊंचाई की जगहों में इन्वायरमेंट और पीपुल फ्रेंडली पेड़, बांज, बुरांस, काफल, उतीस, देवदार, तुन, फल्यांट आदि का रोपण किया जाना चाहिये। मिश्रित और चौड़ी पत्ती वाले जंगलों की ज्यादा आवश्यकता मुझे प्रतीत होती है।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: घिंघारु</title>
		<link>http://www.merapahad.com/save-forest-in-uttarakhandi-way/#comment-14</link>
		<dc:creator>घिंघारु</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2009 05:28:11 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://merapahad.com/save-forest-in-uttarakhandi-way/#comment-14</guid>
		<description>उत्तराखंड में इस वर्ष वनाग्नि ने १० ( पौडी के एक गांव में आग बुझाने गए ५ लोग स्पाट पर ही शहीद हो गए और २ की अस्पताल में मृत्यु हो गयी, टिहरी की एक वृद्ध महिला की आग बुझाते समय मृत्यु हो गयी और अल्मोडा/नैनीताल के जंगलों में लगी आग से एक गर्भवती महिला के साथ उसकी सगी बहन की भी मौत हो गयी )जाने ले ली और लगभग ३५०० हैक्टेयर वन जला कर ख़ाक हो गया&#124; सरकारे न जाने कब चेतेगी? आज के सूचना क्रांति के दौर में यह हास्यास्पद ही लगता है कि राज्य सरकार का अंतरिक्ष सूचना केंद्र से कोइ संपर्क ही नहीं है, उपग्रह से इसकी तस्वीरें ली जा सकती है और आग को बुझाया जा सकता है, आग बुझाने के लिए नई टेक्नोलाजी के उपकरण लिए जा सकते है, सरकार पहल तो करे..........!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>उत्तराखंड में इस वर्ष वनाग्नि ने १० ( पौडी के एक गांव में आग बुझाने गए ५ लोग स्पाट पर ही शहीद हो गए और २ की अस्पताल में मृत्यु हो गयी, टिहरी की एक वृद्ध महिला की आग बुझाते समय मृत्यु हो गयी और अल्मोडा/नैनीताल के जंगलों में लगी आग से एक गर्भवती महिला के साथ उसकी सगी बहन की भी मौत हो गयी )जाने ले ली और लगभग ३५०० हैक्टेयर वन जला कर ख़ाक हो गया| सरकारे न जाने कब चेतेगी? आज के सूचना क्रांति के दौर में यह हास्यास्पद ही लगता है कि राज्य सरकार का अंतरिक्ष सूचना केंद्र से कोइ संपर्क ही नहीं है, उपग्रह से इसकी तस्वीरें ली जा सकती है और आग को बुझाया जा सकता है, आग बुझाने के लिए नई टेक्नोलाजी के उपकरण लिए जा सकते है, सरकार पहल तो करे&#8230;&#8230;&#8230;.!</p>
]]></content:encoded>
	</item>
</channel>
</rss>
