सृजन से पत्रिका के प्रवेशांक को पढ़ा, पत्रिका के मुखपृष्ठ को देखकर ही मन प्रफुल्लित हो गया, क्योंकि उसमें भगवान जागेश्वर महादेव के दर्शन हो रहे थे। पूरी पत्रिका में साहित्य की नामचीन हस्तियों के साथ-साथ उत्तराखण्ड के साहित्यकारों की कृतियां पढ़कर और भी अच्छा लगा। ब्रजेन्द्र लाल शाह जी द्वारा लिखित कुमाऊनी रामायण को कुन्दन सिंह मनराल जी द्वारा आगे बढ़ाये जाने के समाचार से राहत मिली, कि आज भी अपनी पुरानी परम्परा को आगे बढ़ाने वालों की कमी नहीं है।
आशा है भविष्य में यह पुस्तक उत्तराखण्ड के साहित्य की प्रतिनिधि पत्रिका के रुप में सफल होगी।
शुभकामनाओं सहित।