Author Topic: Tourism Related News - पर्यटन से संबंधित समाचार  (Read 5301 times)

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Online पंकज सिंह महर

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ऊखीमठ/ रुद्रप्रयाग। करोड़ों हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक भगवान केदारनाथ की उत्सव डोली आज भक्तों के सैलाब के साथ अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से केदारपुरी के लिए रवाना हो गई। सत्रहवीं गढ़वाल राइफल के बैंड की धार्मिक धुनों व भक्तों के जय भोले-बम भोले की गुंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।

शीतकाल के छह माह अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में भक्तों को दर्शन के पश्चात ग्याहरवें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ की उत्सव डोली आज वैदिक पूजा-अर्चना व मंत्रोच्चारण के बाद केदारपुरी को रवाना हुई। रविवार सुबह मंदिर के कर्मचारियों ने उत्सव डोली का विधिवत श्रृंगार कर मंदिर पुरोहितों एवं पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना की। रावल 1008 भीमा शंकर लिंग शिवाचार्य ने पुजारी राजशेखर लिंग को छह माह केदारनाथ में पूजा-अर्चना के लिए वस्त्र एवं मंदिर की चाबी सौंपी। वहीं ओंकारेश्वर मंदिर से ऊखीमठ, गुप्तकाशी होते हुए बाबा की डोली सैकड़ों भक्तों के सैलाब के साथ प्रथम पड़ाव स्थल फाटा पहुंची। सोमवार को फाटा से सुबहप्रस्थान कर जगह-जगह भक्तों को दर्शन देते हुए केदारबाबा की उत्सव डोली रात्रि विश्राम के लिए गौरीमायी मंदिर गौरीकुण्ड में पहुंचेगी। मंगलवार को सुबह प्रस्थान कर रात्रि केदारपुरी में पहुंचेगी। बुधवार सात मई को सुबह वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भगवान के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खोले जाएंगे।
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देहरादून। करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक उत्ताराखंड के चार में से तीन धाम श्री केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बुधवार को शुभ मूहर्त में खुलेंगे। बदरीनाथ धाम के कपाट नौ मई को खुलेंगे।

उत्तारकाशी जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध धाम गंगोत्री व यमुनोत्री के कपाट अक्षय तृतीया के पुण्य पर्व पर सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर शुभ मुर्हुत में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव रावल हरीश सेमवाल ने बताया कि मंगलवार को गंगोत्री की डोली शीतकाल वास मुखवा से गंगोत्री की ओर प्रस्थान करेगी। रात्रि को भैरवघाटी स्थित भैरव मंदिर में विश्राम करने के बाद गंगोत्री की डोली बुधवार की सुबह गंगोत्री की पहुंचेगी। अक्षय तृतीया के शुभ मुर्हुत में गंगोत्री के कपाट दर्शनार्थ खोले जाएंगे। इस मौके पर पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत, चार धाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष सूरत राम नौटियाल, क्षेत्रीय विधायक गोपाल सिंह रावत मौजूद रहेंगे। विश्व प्रसिद्ध धाम यमुनोत्री के कपाट भी अक्षय तृतीया के पुण्य पर्व पर सुबह 11:30 पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुलेंगे। मंदिर समिति के ज्योति प्रसाद उनियाल ने बताया कि बुधवार की सुबह खरसाली से यमुनोत्री की डोली मंदिर की ओर रवाना होगी। पूर्ण धार्मिक अनुष्ठान व रीति-रिवाजों के अनुरूप मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। इस मौके पर यमुनोत्री क्षेत्र के विधायक केदार सिंह रावत मौजूद रहेंगे। बुधवार को ही केदारनाथ मंदिर के कपाट भी श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुल जाएंगे। मंदिर समिति के मुख्य कार्य अधिकारी केके मिश्रा के अनुसार सुबह आठ बजे मंत्रोचार के साथ कपाट खुल जाएंगे। श्री बदरीनाथ धाम के कपाट नौ मई को श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अनुसूइया प्रसाद भट्ट ने बताया कि ब्रह्मा मूहर्त में पूजा अर्चना के साथ कपाट खुल जाएंगे। इस दिन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खडूड़ी भी यहां पहुंच रहे हैं।
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ऋषिकेश (देहरादून)। प्रदेश के पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत के चारधाम यात्रा के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते ही इस वर्ष की विश्व प्रसिद्ध चार धाम यात्रा शुरू हो गई। पहले जत्थे में तीर्थनगरी से चार दर्जन से अधिक बसों में 1600 यात्री चार धाम के लिए रवाना हुए।

मंगलवार को संयुक्त रोटेशन यातायात व्यवस्था समिति द्वारा चार धाम यात्रा उद्घाटन अवसर पर यातायात अड्डे पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रदेश के पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत ने यात्रियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने को वचनबद्ध है। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे तीर्थ स्थानों की गरिमा को बनाए रखने के लिए इन स्थानों को प्रदूषण रहित बनाने में मदद करें। सरकार तीर्थयात्रा के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर गंभीर है। यात्रा के पहले दिन गंगोत्री, यमुनोत्री व बदरी-केदार के लिए लगभग 50 बसें रवाना हुई। समिति के अध्यक्ष गंभीर सिंह भंडारी ने बताया कि 1600 से अधिक यात्री विभिन्न धामों के दर्शन के लिए तीर्थनगरी ऋषिकेश से चले।
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नैनीताल। पर्यटन सीजन के आरंभ में ही सरोवर नगरी में जहां पर्यटकों के उमड़ने का क्रम शुरु हो गया है। वहीं, उच्च हिमालयी वन्य जीवों के लिए प्रमुख पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान में भी प्रतिदिन वन्य जीवों का लुत्फ उठाने को पर्यटकों के साथ ही स्कूली बच्चों के ग्रुप आने शुरु हो गए है। इस वर्ष अधिक संख्या में चिड़ियाघर में पर्यटकों के आने की संभावना व्यक्त जताई गयी है।

विदित हो कि उच्च हिमालयी वन्य जीवों में प्रमुख हिम तेंदुआ, पर्वतीय भालू समेत अन्य दुर्लभ प्रजाति के जंतु पंत उच्च हिमालयी प्राणि उद्यान में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहते है। उद्यान के रेजर हरीश चंद्र जोशी ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में 1,40,766 पर्यटकों ने वन्य जीवों का लुत्फ उठाया। इसके अलावा दस हजार से अधिक स्कूली बच्चों भी आए।

इधर, मैदानी क्षेत्र में गर्मी शुरु होते ही अप्रैल माह से ही पर्यटकों की चिड़ियाघर में तादात बढ़ने लगी थी। मई प्रथम सप्ताह में ही प्रतिदिन सात सौ से अधिक पर्यटक उमड़ रहे है। बताया गया कि मंगलवार को जहां होली एकेडमी के करीब दो सौ बच्चों ने वन्य जीवों को देखा, वहीं दिन भर में करीब सात सौ से अधिक पर्यटक आए। इनमें पांच वर्ष से कम के बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश दिया जाता है। पर्यटन सीजन में इस बार अधिक पर्यटकों के चिड़ियाघर में आने की संभावना व्यक्त की गयी है।
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रुद्रप्रयाग/उतरकाशी। करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र केदारनाथ धाम के साथ ही बुधवार को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलने के शुभ अवसर पर जय बाबा केदार के उद्घोषों से संपूर्ण केदारपुरी गूंज उठी तो दूसरी तरफ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने से पूर्व हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा व यमुना में डुबकियां लगाकर पुण्य अर्जित किया। बद्री-केदार मंदिर समिति के उप मुख्य कार्याधिकारी जेपी नंबूरी ने बताया कि पहले दिन केदारपुरी में भोले के दर्शन के लिए पांच हजार चार सौ चौबीस यात्री पहुंचे।

रुद्रप्रयाग जिले में स्थित शिव के ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ के कपाट वैदिक पूजा-अर्चना एवं मंत्रोच्चार के साथ सुबह आठ बजे भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलने के समय केदारपुरी का मौसम सर्द बना रहा और हल्की बूंदा-बांदी भी हुई। इसके बावजूद यहां सुबह से ही हजारों भक्तों की भीड़ भोले के प्रथम दर्शनों के लिए कतार में लगी रही। निर्धारित समय आठ बजते ही केदारनाथ के रावल 1008 भीमा शंकरलिंग मंदिर प्रांगण में पहुंचे और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ग्रीष्म काल के लिए भगवान केदारनाथ के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के अवसर पर सूबे के पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत, सचिव राकेश कुमार, पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण, मुनि चिदानंद महाराज, केदारनाथ क्षेत्र की विधायक आशा नौटियाल, मंदिर समिति की उपाध्यक्ष दर्शनी देवी, उप मुख्य कार्याधिकारी जेपी नंबूरी, जिलाधिकारी सचिन कुर्वे, एसपी नीरु गर्ग, मंदिर के पुजारी राजशेखर लिंग सहित हजारों की संख्या में भक्त मौजूद थे। उत्तारकाशी जिले के अंतर्गत विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट आज वेद मंत्रोच्चार के साथ पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे भक्तों के दर्शनार्थ खोले गए। मंगलवार को गंगोत्री की डोली मुखवा गांव से गंगोत्री की ओर चली। भैरवघाटी स्थित भैरव मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद सुबह डोली का गंगोत्री की ओर प्रस्थान हुआ। परंपरागत वाद्य यंत्र ढोल दमाऊ व सैकड़ों भक्तों के साथ गंगा की डोली सुबह गंगोत्री पहुंची। यहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद गर्भगृह के कपाट खोले गए। बुधवार की सुबह यमुनोत्री की डोली शीतकालीन वास खरसाली से रीति-रिवाज व पौराणिक परंपरा के साथ रवाना हुई। सैकड़ों श्रद्धालुओं व परंपरागत वाद्य यंत्रों के साथ मां यमुना की डोली यमुनोत्री मंदिर पहुंची। वैदिक मंत्रों व पूजा अर्चना के बाद यमुनोत्री के कपाट खोले गए। गंगोत्री व यमुनोत्री के कपाट खुलने पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचे। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने कपाटोत्सव में भाग लेकर पुण्य अर्जित किया।
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गोपेश्वर (चमोली)। चतुर्थ केदार श्री रूद्रनाथ धाम में कपाट खुलने की धार्मिक तैयारियां आरंभ हो चुकी हैं लेकिन अभी तक यात्रा मार्ग पर न तो पानी के पुख्ता इंतजाम हैं और न ही पैदल मार्ग का निर्माण पूर्ण हो पाया है। स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर तत्काल सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की है।

18 मई को श्री रूद्रनाथ के कपाट खुलने हैं। 14 मई को भगवान की डोली गोपीनाथ मंदिर से बाहर निकाली जाएगी। पुजारी, मंदिर समिति सहित स्थानीय लोग धार्मिक तैयारियों में जुटे हुए हैं। लेकिन रूद्रनाथ में पानी व पैदल रास्ते की समस्या बनी हुई है। पनार तक पैदल मार्ग पूर्ण हो चुका है लेकिन वहां से आगे के रास्ते चट्टानी हैं। हर बार लोग पौराणिक नारद कुंड से एक-एक बूंद पानी मंदिर तक पहुंचाकर जलाभिषेक करते हैं। बावजूद इसके अभी तक न तो प्रशासन और न ही विभाग ने इस ओर ध्यान दे रहा है। साथ ही उत्तराखंड जल संस्थान पानी की व्यवस्था सुचारू करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा। सगर निवासी सतेंद्र रावत का कहना है कि विद्युत व दूरसंचार की सुविधा न होने से तीर्थ यात्री इस धाम से विमुख हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन को बार-बार लिखा जा चुका है पर अभी तक कार्रवाई नहीं हो पाई। मंदिर समिति के सदस्य देवेंद्र बिष्ट का आरोप है कि विभाग ने पैदल मार्ग का निर्माण आधा-अधूरा किया गया है जिससे श्रद्धालुओं को धाम तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
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रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध तीर्थ धाम केदारनाथ यात्रा को सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन द्वारा की गई कवायद का बुधवार को यात्रा का पहले दिन परिणाम सुखद रहा। पूर्व में अव्यवस्थाओं से त्रस्त रहने वाले गौरीकुण्ड में इस बार सब कुछ व्यवस्थित नजर आ रहा है। घोड़ा और पालकी की प्री-पेड व्यवस्था से यात्री लूट खसोट से बचे रहे।

चारधाम यात्रा सीजन में मुख्य पड़ाव स्थल गौरीकुण्ड में श्रद्धालुओं को सबसे अधिक अव्यवस्थाओं से दो चार होना पड़ता था। केदारनाथ के लिए यात्री घोड़ा, पालकी से होकर जाता है। यात्रियों की भीड़ होने पर यहां उन्हें जमकर लूटा जाता था। प्रशासन पर हर वर्ष ऐसी शिकायतों का ढेर लग जाता था। इससे सबक लेते हुए इस बार जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने व्यवस्थाओं को लेकर सबसे ज्यादा गौरीकुण्ड पर ही केन्द्रित किया है। इसी के तहत घोड़ा, पालकी व कण्डी की व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रखने के लिए प्रीपेड व्यवस्था लागू की गई है। यात्रा के पहले दिन बुधवार को इस व्यवस्था का सफल संचालन हुआ। यात्रियों को भी किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। यही नहीं गौरीकुण्ड में यात्रा सीजन में प्रत्येक दिन दो हजार से अधिक बडे़-छोटे वाहन यात्रियों को लेकर आते है। ऐसे में समुचित पार्किंग व अन्य छोटी समस्याओं पर भी प्रशासन मुस्तैद है।
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टनकपुर (चम्पावत)। इन दिनों उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम में भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे है। गर्मी के चलते दिन की अपेक्षा रात्रि के समय अधिक संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है। इधर नेपाल के सिद्धनाथ मंदिर में भी काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।

पिछले चार दिनों से मां पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हुआ है। शारदा नदी में भी इन दिनों स्नान के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे है। शारदा घाट में किसी अप्रिय घटना को देखते हुए पीएसी की तैराक टीम भी तैनात की गई है। इधर नेपाल के महेन्द्र नगर व ब्रह्मदेव मंडी स्थित सिद्धनाथ मंदिर में भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है। जिसके कारण नेपाल के दोनों बाजारों में चहल- पहल भी बढ़ गई है। मेला क्षेत्र में जगह-जगह भंडारे का भी आयोजन किया जा रहा है।
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लोहाघाट (चम्पावत)। मां अखिलतारिणी धाम में चल रहे 108 दिवसीय महायज्ञ के पारायण की तैयारियां शुरू हो चुकी है। यज्ञ स्थल पर यज्ञ वेदियों की स्थापना के साथ धार्मिक महत्व के पौधों को रोपा जा रहा है। 8 मई गुरुवार को अक्षय तृतीय के दिन यहां यज्ञ का पारायण हो जायेगा। इन दिनों महायज्ञ आयोजन समिति की ओर से लक्ष्य रुद्री पाठ का आयोजन कर आहुतियां दी जा रही है। इसके अलावा द्वादशाक्षरी मंत्र, गायत्री मंत्र व मृत्युंजय महामंत्रों की आहुतियां 71 यज्ञ आचार्यो द्वारा दी जा रही है। पीठाधीश्वर दिगम्बर मोहन तीर्थ महाराज ने बताया कि देर रात तक श्रद्धालुओं द्वारा भजन कीर्तन किये जा रहे है।
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बदरीनाथ (चमोली)। मोक्षधाम श्री बदरीनाथ के कपाट वेद-मंत्रोच्चारण के साथ रावल बद्री प्रसाद नंबूदरी ने आज सुबह 7:48 बजे श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले। पहले दिन अखंड ज्योति के दर्शन करने वालों में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम, राज्य के मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी सहित हजारों श्रद्धालु शामिल थे।
पौराणिक व धार्मिक नियमों के अनुसार कपाट खुलने के बाद रावल ने लक्ष्मी की प्रतिमा को मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाकर परिक्रमा स्थित महालक्ष्मी के मंदिर में विराजित किया। अब छह माह तक लक्ष्मी की पूजा-अर्चना यहीं सम्पन्न की जाएगी। उद्धव व कुबेर को छह माह बाद गर्भगृह में प्रवेश कराकर बद्री प्रसाद नंबूदरी ने बद्रीश पंचायत की पूजा प्रारंभ की। भगवान को पहनाए गए घृत कम्बल को उतारकर नये वस्त्र पहनाए गए। सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में घृत कम्बल बांटा गया। कल से ही बद्रीशपुरी में उत्सव का माहौल था। मुख्य मंदिर सहित सम्पूर्ण क्षेत्र को फूलों से सजाया गया। रात्रि से ही दर्शनार्थियों की लाइन लगनी शुरू हो गई थी। दिल्ली से आई प्रसिद्ध भजन गायिका अलका गोयल के भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति विभोर कर दिया। गढ़वाल स्काउट के बैंडों की भक्तिमय धुनों के अलावा लोक कलाकारों के भजन भी सुनने को मिले। इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद भट्ट, आईजी गढ़वाल अशोक कुमार, धर्माधिकारी जगदम्बा प्रसाद सती भी उपस्थित थे।

7:48 बजे खोले गए बदरीनाथ के कपाट

बदरीनाथ। कपाट खुलने के मुहूर्त को लेकर स्थानीय जनता व श्रद्धालुओं में रोष है। पूर्व में ब्रह्मामुहूर्त में कपाट खोलने की घोषणा हुई थी किन्तु गत सांय ब्रह्मामुहूर्त के स्थान पर सुबह 7:48 बजे मंदिर के कपाट खुलने का समय घोषित किया गया।

उल्लेखनीय है कि हर वर्ष ब्रह्मामुहूर्त में ही भगवान बदरी विशाल के कपाट खोले जाते हैं। इस वर्ष भी यही घोषणा की गई थी लेकिन गत सांय समय परिवर्तित किए जाने के बाद बदरीनाथ के स्थानीय लोगों व श्रद्धालुओं में कपाट खुलने के दौरान काफी रोष देखा गया। धर्माधिकारी जगदंबा प्रसाद सती ने कहा कि टिहरी राज दरबार में बसंत पंचमी के अवसर पर ब्रह्मामुहूर्त में ही कपाट खोलने की घोषणा हुई थी लेकिन कल सांय जब राज दरबार की ओर से लग्न पत्र मिला तो उसके अनुसार समय कपाट खोलने का समय सुबह 7 बजकर 48 मिनट पर निश्चित किया गया था। धर्माधिकारी सती के अनुसार उनके द्वारा प्रत्येक वर्ष रावल की उपस्थिति में कपाट बंद होने की तिथि का समय विजयदशमी के पावन अवसर पर बदरीनाथ में निकाला जाता है। आज तक मुहूर्त को लेकर कोई विवाद भी नहीं हुआ। इस संबंध में नगर पंचायत बदरीनाथ के अध्यक्ष बलदेव मेहता का कहना है कि जब बसंत पंचमी के अवसर पर कपाट खुलने की तिथि की घोषणा हुई थी तो तब से आज तक ब्रह्मामुहूर्त में ही कपाट खुलने की सूचना मिली थी। मामले में कोशिशों के बाद भी तीर्थ पुरोहित से सम्पर्क नहीं हो सका।
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उल्लेखनीय है कि भगवान बद्री विशाल के कपाट 9 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। जिससे तीर्थ यात्रियों का उमड़ना शुरू हो गया है। प्रदेश सरकार ने भले ही तीर्थ यात्रा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए हों, लेकिन जनपद के राष्ट्रीय राजमार्गो का चौड़ीकरण का कार्य कर रही डीजीबीआर संसाधनों का रोना रो रही है। कई वर्षो से मोटर मार्ग आधे-अधूरे बने हुए हैं। जिसमें गौचर-कर्णप्रयाग, पीपलकोटी-जोशीमठ, विष्णुप्रयाग-लामबगड़ मोटर मार्गो की हालत खराब है। इन मार्गो पर वाहनों को चलाना जान जोखिम में डालने के बराबर है। विष्णुप्रयाग से लामबगड़ मोटर मार्ग चौड़ीकरण का कार्य चार वर्ष पूर्व किया जा चुका है, लेकिन अभी भी उक्त मोटर मार्ग पर डामरीकरण का कार्य न होने से मोटर मार्गो पर भारी भरकम खडडे बने हुए हैं। वहीं गौचर-कर्णप्रयाग मोटर मार्ग पर पिछले चार वर्षो से कार्य चल रहा है। ग्रीफ के वाहनों द्वारा बीच मोटर मार्ग पर वाहन खड़ा कर पत्थर, कंक्रीट भरने के कारण घंटों जाम लगा रहता है। मोटर मार्गो पर ग्रीफ द्वारा कई स्थानों पर कंक्रीट, बजरी व पत्थर इकट्ठा किए जाने से भी स्थिति भयानक बनी हुई है।
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गोपेश्वर (चमोली)। बीते वर्ष की तरह इस बार भी 15 से 21 मई तक पोखरी में खादी, पर्यटन औद्योगिक किसान विकास मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले को भव्य स्वरूप देने के लिए मेला समिति अभी से तैयारियों में जुट गई है। खेल मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि राज्यपाल तथा शिक्षामंत्री भी मेले में शिरकत करेंगे।

कार्यक्रमों की जानकारी देते मेला सचिव राजेंद्र असवाल ने कहा कि 15 मई को मेला व स्टालों के उद्घाटन के बाद स्थानीय शिक्षण संस्थाओं के बच्चे और हेमराज कला मंच पिथौरागढ़, बिंसर सांस्कृतिक कला समिति देहरादून सांस्कृतिक कार्यक्रम दिखाएंगे। 16 मई को विनायकधार में खेलकूद के बाद पर्यावरण, वन व जीव संरक्षण गोष्ठी तथा स्थानीय शिक्षण संस्थाओं के अलावा संस्कार कला मंच अल्मोड़ा, जय माता राजराजेश्वरी कला मंच उत्तरकाशी के सांस्कृतिक कार्यक्रम, 17 को राज्य स्तरीय बालीबाल प्रतियोगिता, पशुपालन, कृषि व सहकारिता गोष्ठी, राबाइंका गोपेश्वर व मंगलेश डबराल के सांस्कृतिक कार्यक्रम, 18 को राज्य स्तरीय बालीबाल प्रतियोगिता, स्वास्थ्य गोष्ठी व शिशु प्रदर्शनी, पूर्व सैनिक सम्मेलन, राबाइंका कर्णप्रयाग, मसोली सांस्कृतिक टीम, पिंडर घाटी उत्थान व बधाणी सांस्कृतिक समिति, लक्ष्मी नारायण दूनघाटी रंगमंच के सांस्कृतिक कार्यक्रम, 19 को खेलकूदों के फाइनल कार्यक्रम, राज्य स्तरीय बालीबाल प्रतियोगिता, समाज कल्याण, बाल विकास व महिला सशक्तीकरण गोष्ठी, क्षेत्रीय युवक मंगल दल, राबाइंका गौचर, नागज्योति कला मंच, वीर कला दर्पण उत्तरकाशी के सांस्कृतिक कार्यक्रम, फैशन शो, कव्वाली, 20 मई को राज्य स्तरीय बालीबाल प्रतियोगिता का फाइनल, कल्पना चौहान व मास्टर रोहित चौहान के सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि आयोजित किए जाएंगे।
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कर्णप्रयाग/सिमली (चमोली)। प्रसिद्ध आदिबदरी धाम में सोमवार से होने वाले प्राचीन नौठा कौथिग में कई धार्मिक व सांस्कृतिक खेलकूद कार्यक्रम होंगे। यह जानकारी मेला समिति के कैलाश शाह ने दी।

उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र का प्राचीन परंपरागत मेला है, जिसमें सीमावर्ती गांवों की महिलाएं व पुरुष बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं। पंचबदरी समूह में प्रथम बदरी आदिबदरी धाम के मंदिर प्रांगण में लोकगीत, चौफला नृत्य व लठयूल मेले का मुख्य आकर्षण होंगे। दूसरी ओर प्रसिद्ध सिद्धपीठ राजराजेश्वरी चंडिका मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक आचार्य प्रकाश खंडूरी ने भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का वर्णन किया और कर्म की प्रधानता को प्रमुख बताया।
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उत्तरकाशी। गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के दर्शन करने वाले तीर्थ यात्रियों की भीड़ में इस साल जोरदार बढ़ोत्तरी हुई है। सात दिन में 21 हजार से अधिक यात्री स्नान व पूजा-अर्चना कर चुके हैं। भीड़ को संभालने में पुलिस को रात-दिन पसीना बहाना पड़ रहा है।

विश्व प्रसिद्ध धाम गंगोत्री व यमुनोत्री के कपाट खुले अभी एक सप्ताह हुआ है। इस साल तीर्थ यात्रियों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि नजर आ रही है। गत वर्ष की अपेक्षा तीन गुना अधिक तीर्थ यात्री अभी तक दर्शनों के लिए पहुंचे है। यात्रियों को पार्किग की समस्या और वाहनों के प्रवेश को लेकर परेशानी झेलनी पड़ रही है। हनुमानचट्टी से आगे बड़े वाहन प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में प्रीपेड व्यवस्था के तहत हनुमानचट्टी से जानकी चट्टी तक तीर्थ यात्रियों को जीप व टैक्सी से पहुंचाया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक नीलेश आनंद भरणे ने कहा कि प्रीपेड व्यवस्था के तहत 60 टैक्सियां उपलब्ध हैं। इन टैक्सियों की संख्या बढ़ाए जाने के लिए ऋषिकेश व हरिद्वार संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग पर पुलिस को अबके कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। यात्रियों को सूचना व सुरक्षा पुलिस का महत्वपूर्ण दायित्व है। एसपी ने बताया कि यमुनोत्री यात्रा पर प्रतिदिन 3 हजार से अधिक यात्री पहुंच रहे हैं। गंगोत्री में प्रति दिन चार हजार से अधिक यात्री दर्शनों को पहुंच रहे हैं। ऐसे में गंगोत्री की वाहन पार्किंग व्यवस्था तंग नजर आ रही है। पुलिस अधीक्षक नीलेश आनंद भरणे ने कहा कि गंगोत्री की ओर 130 बडे़ वाहन और 120 छोटे वाहनों की आवाजाही नित्य हो रही है। करीब 250 वाहन गंगोत्री पहुंच रहे है। गंगोत्री में पार्किंग व्यवस्था न होने से स्थिति विकट हो गई है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इसका समाधान भी तलाश लिया गया है। कोशिश की जा रही है कि भैरव घाटी से प्रति दिन 30 वाहन ही आगे जाएं। 30 के बाद जाने वाले वाहनों को भैरवघाटी में रोककर वहां से प्रीपेड टैक्सी के माध्यम से यात्रियों को गंगोत्री की रवाना किए जाने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
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उत्तरकाशी। यात्रा काल शुरू होने से पहले सरकार का दावा था कि जानकीचट्टी तक बस पहुंचाई जाएगी, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग खंड लोक निर्माण विभाग की धीमी कार्य प्रणाली से वाहनों की आवाजाही हनुमान चट्टी तक हो रही है। यहां से यात्रियों को 11 किमी पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है। वहीं गंगोत्री में दूरसंचार सेवाएं भी ठप है।

यात्राकाल से पूर्व सरकार का दावा था कि यमुनोत्री तक की सड़कों को दुरुस्त कर लिया जाएगा और वाहन जानकीचट्टी तक पहुंचेंगे। लेकिन अभी वाहनों की आवाजाही हनुमान चट्टी तक ही हो पा रही है। ऐसे में यात्री 6 किमी के बजाय 11 किमी पैदल चलकर मंदिर तक पहुंच रहे हैं। जानकीचट्टी से यमुनोत्री तक रैलिंग कई जगहों पर टूटी हुई है। रैलिंग टूटी होने से दुर्घटनाओं की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। यमुनोत्री तक पैदल दूरी पर कई बार यात्री आक्सीजन की कमी से बेहोश तक हो जाते हैं। यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है, पर प्रशासन इस समस्या का समाधान नहीं तलाश पाया है। बड़कोट के उप जिलाधिकारी एसएच सेमवाल ने बताया कि लोक निर्माण विभाग मार्ग दुरुस्त करने की कोशिशों में जुटा हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही जानकीचट्टी तक वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। उप जिलाधिकारी ने कहा कि इस बार खच्चर, घोड़ा व डंडी-कंडी संचालक प्रीपेड व्यवस्था होने से मनमाना पैसा नहीं वसूल रहे हैं। गंगोत्री की स्थिति पर नजर दौड़ाए तो यहां दूरभाष सेवाएं ठप हैं। यात्रा से पहले दावा किया गया था कि गंगोत्री में तमाम व्यवस्थाएं चाक चौबंद रहेंगी, पर यात्रा की शुरूआत में ही सुविधाओं का दम निकलता नजर आ रहा है।
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