सूखा : अल्मोड़ा, रानीखेत तबाह
देहरादून (एसएनबी)। केंद्र ने राशन में कटौती की तो उधर कुदरत ने कुछ ऐसी मार मारी कि राज्य के 13 में से 11 जिले जबरदस्त सूखे की चपेट में आ गए। अल्मोड़ा और रानीखेत की हालत बदतर कही जा सकती है। औसतन 40 प्रतिशत फसलें प्रदेश में सूखे की शिकार हुई तो ये आंकड़ा अल्मोड़ा में बढ़कर 45 के करीब पहुंच गया। उधर रानीखेत के तीन सौ गांव ऐसे हैं जहां हर तरफ तबाही का मंजर है। सूखे खेत, झुलसी फसल और मुर्झाये चेहरे अल्मोड़ा और रानीखेत की पहचान बन गई है।
इधर हुई बारिश से राहत की आशा को अंधड़ ने मटियामेट कर दिया। हालत गंभीर है। 40 फीसदी फसलें बर्बाद हो चुकीं हैं। ऊपर से केंद्र ने गेहूं के कोटे में लंगड़ी मार कर रही सही कसर को पूरी भी पूरा कर दिया है। हकीकत यह कि उत्तराखंड जबरदस्त अनाज की किल्लत से दो-चार होने की तरफ है यदि केंद्र का रवैया ना बदला तो भूख का हाहाकार सूबे को हिलाकर रख देगा। जनवरी से मार्च तक सूबे के 11 जिलों में सूखे से फसलें चौपट हो गइर्ं। दस जिलों में औसतन 30 से 40 फीसदी फसलें प्रभावित हुई।
सूखे की स्थिति रहने से गेहूं, जौ, मसूर, आम, आलू, मटर, नींबू प्रजाति, अमरूद, प्लम, नाशपाती, बंदगोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, गन्ना, चना, लाही, सरसों की खेती प्रभावित हुई। सूखे से किसानों की फसलों को हुई नुकसान का जायजा लेने के लिए राजस्व व आपदा मंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से इस संबंध में तहसील स्तर से इसकी रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे। जिससे क्षति का आंकलन कर किसानों को राहत देने के प्रयास किए जाएं। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र मुआवजा लेने का प्रयास शुरू कर दिया है। आपदा विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार सूखे से अल्मोड़ा जिले में सबसे अधिक औसतन 44.3 प्रतिशत फसलों को क्षति पहुंची है। जिले के अल्मोड़ा तहसील में सूखे से 424 गांवों में 50 प्रतिशत, रानीखेत में 300 गांवों में 60 प्रतिशत, भिकियासैण में 397 गांवों में 57 प्रतिशत, सल्ट के 226 गांवों में 35 प्रतिशत, चौखुटिया में 164 गांवों में 40 प्रतिशत, द्वाराहाट में 235 गांवों में 40 प्रतिशत, सोमेश्वर में 147 गांवों में 40 प्रतिशत, भनोली में 222 गांवों में 30 प्रतिशत तथा जैती में 2237 गांवों में 45 प्रतिशत खेती प्रभावित हुई है। टिहरी जिले में औसतन 39 प्रतिशत खेती को सूखे ने क्षति पहुंचाई है। जिले के टिहरी तहसील के 364 गांव में 10-20 प्रतिशत, प्रतापनगर के 148 गांवों में 20-30 प्रतिशत, नरेंद्रनगर के 126 गांवों में 33-45, देवप्रयाग के 363 गांवों में 43 फीसदी, घनसाली के 295 गांवों में 16 प्रतिशत, जाखणीधार में 136 गांवों में 40 प्रतिशत, धनोल्टी के 264 गांवों में 33-45 प्रतिशत तथा गजा के 120 गांवों में 40 फीसदी खेती को क्षति पहुंची है। इससे यहां गेहूं, जौ, मसूर, आम, आलू व मटर को नुकसान हुआ है। जिला रूद्रप्रयाग के रूद्रप्रयाग तहसील के 36 गांवों में 20 प्रतिशत, ऊखीमठ के 48 तथा जखोली के 42 गांवों में 15-15 प्रतिशत खेती चौपट हुई है। हरिद्वार जिले में हरिद्वार तहसील के 32, रूड़की के 71, लक्सर के 11 गांवों में सूखे से कृषि फसलों को 50 फीसदी से अधिक क्षति पहुंची है। जबकि इसी जिले के हरिद्वार तहसील के 85, रूड़की के 245 व लक्सर के 166 गांवों में सूखे से बाग, सब्जियों, गन्ना, आम को 50 प्रतिशत से कम नुकसान हुआ है। देहरादून जिले की ऋषिकेश तहसील के 20 गांवों में 20 प्रतिशत, विकासनगर कालसी के 32 गांवों में 33 तथा चकराता त्यूनी के 37 गांवों में 35 फीसदी खेती प्रभावित हुई है। नैनीताल जिले के 565 गांवों में 30 से 55 प्रतिशत खेती बर्बाद हो चुकी है। चमोली जनपद के 502 गांवों में औसतन 5 से 20 प्रतिशत तक फसलों को सूखे से नुकसान पहुंचा है। जबकि चंपावत जिले के पूर्णागिरी के 56 व चंपावत तहसील के 178 गांवों में 15-20 प्रतिशत, लोहाघाट के 179 व बाराकोट के 103 गांवों में 5-10 प्रतिशत तथा पाटी के 140 गांवोें में 25 प्रतिशत खेती को नुकसान पहुंचा है।
जिला बागेश्वर के बागेश्वर तहसील के 235 गांवों में 39.34 प्रतिशत, कपकोट के 146 गांवों में 40 प्रतिशत, कांड के 234 गांवों में 51.99 प्रतिशत, गरूड़ के 189 गांवों में 38 प्रतिशत तथा उपतहसील काफलीगैर के 106 गांवों में 64.66 प्रतिशत फसलों को क्षति पहुंची है। जबकि जिले में सूखे से बागवानी व अन्य फसलों पर 30 प्रतिशत असर पड़ा है। पौड़ी जिले के 3402 गांवों में औसतन 30 प्रतिशत तथा पिथौरागढ़ के 1492 गांवों में औसतन 39 प्रतिशत खेती को सूखे से क्षति हुई है। उधमसिंह नगर व उत्तरकाशी जिले में कोई नुकसान की सूचना नहीं है।
राजस्व व आपदा विभाग के अनुसार अप्रैल माह के पहले सप्ताह में हुई बारिश ने जरूर किसानों को राहत दी है। पर कुछ स्थानों पर अंधड़ के साथ तेज बारिश ने आम, लीची और गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाकर उनकी परेशानी को बढ़ा दिया है। शासन स्तर पर इसके भी आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं।