Author Topic: Tourism Related News - पर्यटन से संबंधित समाचार  (Read 5300 times)

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Offline हलिया

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पहाड़ की लोक संस्कृति से जुड़ी कहानी है ड्राईविंग लेशनApr 08, 02:10 am

बेरीनाग(पिथौरागढ़)। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल चौकोड़ी में इन दिनों बेला फिल्म प्रोडक्शन की फिल्म ड्राईविंग लेशन की शूटिंग चल रही है। पहाड़ी संस्कृति पर आधारित इस फिल्म की शूटिंग को लेकर क्षेत्र के लोगों में खासा उत्साह है। फिल्म में दर्जनों स्थानीय कलाकारों को भी अवसर दिया जा रहा है।

फिल्म की निर्देशक बेला नेगी ने फिल्म के कथानक की जानकारी देते हुए बताया कि पहाड़ से पलायन कर चुका एक युवक रूपये कमाने के बाद पहाड़ लौटता है तथा यहां आकर एक गाड़ी खरीद कर खूब शौक करता है। अपने यहां के लोगों को भरभर कर घूमाता है और गाड़ी के शौक में वह विशेष कुछ नहीं कर पाता है। उन्होंने बताया कि फिल्म पूरी तरह पहाड़ी संस्कृति पर आधारित है। फिल्म के माध्यम से युवाओं की समस्याओं को उकेरने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिल्म में चार दर्जन लोग काम कर रहे है। उन्होंने बताया कि फिल्म का निर्माण जल्द से जल्द पूरा करने के प्रयास किये जा रहे है। उन्होंने कहा है कि फिल्म इस वर्ष रिलीज हो जायेगी। यह फिल्म अब तक बनी फिल्मों से अलग होगी।
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Online पंकज सिंह महर

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पिथौरागढ़। जहां एक ओर विश्व भर में सैकड़ों व हजारों वर्ष पुरानी धरोहरों को संरक्षित करने के प्रयास किये जा रहे है वहीं उत्तराखण्ड राज्य में ऐतिहासिक महत्व की धरोहरों का कोई सुधलेवा नहीं है। इसके चलते सैकड़ों वर्ष पूर्व कैलाश मानसरोवर यात्रा पथ पर बनी सैकड़ों धर्मशालाएं खण्डहरों में तब्दील हो चुकी है।

मालूम हो कि जनपद के सीमान्त क्षेत्र धारचूला की एक दानी महिला जसुली दताल द्वारा लगभग 180 वर्ष पूर्व दारमा घाटी से लेकर हल्द्वानी तक कई धर्मशालाओं का निर्माण किया गया था। जिसमें दारमा से पिथौरागढ़, पिथौरागढ़ से अल्मोड़ा, अल्मोड़ा से बागेश्वर और हल्द्वानी को जाने वाले पैदल मार्गो पर अनेक धर्मशालाओं का निर्माण किया गया था। इनमें से अधिकांश धर्मशालाओं के अब अवशेष भी शेष नहीं बचे है वहीं शेष बची धर्मशालाएं जमींदोज होने के कगार पर पहुंच चुकी है। जिसमें पिथौरागढ़ व धारचूला के बीच सतगढ़ नामक स्थान पर बनी धर्मशाला है। उपेक्षा के कारण दानवीर महिला की स्मृति के रूप में बची यह धर्मशाला भी जमींदोज हो चुकी है। इन मार्गो पर धर्मशालाएं होने का उल्लेख लगभग 1870 में अल्मोड़ा के तत्कालीन कमिश्रन्र शेरिंग द्वारा लिखे यात्रा वृतान्त में भी मिलता है। सीमान्त की दानी महिला जसुली देवी के अलावा उस समय के अन्य दानवीर धनाडयों ने भी कई धर्मशालाओं का निर्माण किया था जिनके अब खण्डहर ही शेष मिलते है। जसुली दताल सहित अन्य दानवीरों ने धर्मशालाओं का निर्माण उन मार्गो पर किया था जहां से कैलाश यात्री, भेड़ पालक और व्यापार के लिये मैदानी क्षेत्रों में जाने वाले व्यापारी समय-समय पर आवाजाही करते थे। पैदल यात्री उचित दूरी पर बनी इन्हीं धर्मशालाओं में विश्राम करते थे। ऐतिहासिक विवरणों और स्थानीय जानकारों के अनुसार इन धर्मशालाओं का उपयोग निर्माण के डेढ़ सौ वर्षो तक होता रहा। बाद में मोटर मार्ग बनने से इन धर्मशालाओं का उपयोग बंद हो गया। उपेक्षित रहने से इन धर्मशालाओं में झाड़ व कंटीली झाड़ियां उगने लगी। पृथक राज्य गठन के बाद इन धर्मशालाओं के महत्व को देखते हुये ऐतिहासिक धरोहरों में दिलचस्पी रखने वाले व्यक्तियों द्वारा शासन से संरक्षण की मांग की गई। बावजूद इसके कोई ठोस पहल नहीं होने से अब कुछ स्थानों पर बचे खुचे अवशेष भी मिटने की स्थिति में पहुंच चुके है। अल्मोड़ा के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी आशीष कुमार के अनुसार यह धर्मशालाएं पुरातत्व विभाग के संरक्षण में नहीं है।
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मंदिरों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम होंगे: भट्ट Apr 09, 02:47 am

ऊखीमठ (रुद्रप्रयाग)। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद भट्ट ने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों के मद्देनजर मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता की जाएगी। इसके लिए पुलिस के साथ ही मंदिर कर्मचारियों का भी सहयोग लिया जाएगा।

गढ़वाल मंडल विकास निगम के आवास गृह में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि आतंकवाद की दृष्टि से अति संवेदनशील मंदिरों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। केदारनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा पुलिस के पास है, लेकिन मंदिर के भीतर की व्यवस्था मंदिर कर्मचारियों के कंधों पर है। उन्होंने मंदिर कर्मियों को यात्रियों के साथ सौम्य व्यवहार करने व कर्तव्यों का सख्ती से पालन करने को कहा। समिति के अध्यक्ष ने कहा कि वरिष्ठता सूची व कर्मियों के कार्यार्ें के मूल्यांकन के बाद शासन से पद सृजन करने की मांग की जाएगी। मंदिर समिति के प्रत्येक कर्मी को यूनीफार्म प्रदान की जाएगी। मदमहेश्वर, तुंगनाथ, कालीमठ, ओमकारेश्वर समेत अन्य तीर्थ स्थलों में यात्रियों की सुविधाओं में वृद्धि करेंगे। ताकि तीर्थ यात्रियों को किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता यात्रियों को सुविधाएं व यात्रा मार्गाेँ पर स्थित मंदिर धर्मशालाओं को विकसित करने की हैं। इसके लिए ठोस प्रयास किए जा रहे है। इस अवसर पर उपमुख्य कार्याधिकारी जेपी नंबूरी, धर्माधिकारी उमा दत्त सेमवाल, ममता नौटियाल, चंडी प्रसाद भट्ट, सुभाष नेगी, सुभाष रावत, आशीष बमोला, कुशाल सिंह नेगी भी उपस्थित रहे।
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जाख मेले की तैयारियां अंतिम चरण में

गुप्तकाशी (रुद्रप्रयाग)। चौदह अप्रैल को तहसील ऊखीमठ के अन्तर्गत जाख देवस्थली देवसाल में होने वाले प्रसिद्ध जाख मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मेले को लेकर क्षेत्रीय लोगों में भारी उत्साह है।

चौदह गांवों के ग्रामीणों के सहयोग से प्रति वर्ष इस मेले का आयोजन किया जाता है। जाख देवता समिति के अध्यक्ष भगत सिंह चौहान ने बताया कि मेले की तैयारियों को लेकर क्षेत्रीय लोगों में उत्साह है। इस मेले की प्रमुख विशेषता यह है कि जाख देवता जिस व्यक्ति पर अवतरित होता है, वह दहकते अग्निकुंड में कूदकर नृत्य करता है। यह दृश्य काफी रोमांचित होता है। मेले के प्रति लोगों की भारी आस्था है, जिससे बड़ी संख्या में क्षेत्रीय गांव के लोग इस अवसर पर मेले में शामिल होकर जाख देवता के दर्शन करते है। उन्होंने बताया कि इस बार मेले के मुख्य अतिथि काबीना मंत्री मातबर सिंह कंडारी, विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शैलारानी रावत, ब्लाक प्रमुख ममता नौटियाल होंगी। कार्यक्रम अध्यक्ष विधायक केदारनाथ श्रीमती आशा नौटियाल होंगी।
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प्रदेश में देशी व विदेशी पर्यटकों की आमद में वृद्धि जारी: पंत

नैनीताल। पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि प्रदेश के अधिकतर शहर पर्यटक स्थल के रुप में विकसित हो रहे है। पिछले एक वर्ष में प्रदेश में 15-20 प्रतिशत देशी व घरेलू पर्यटकों की आमद में वृद्धि हुई है। उन्होंने निकाय चुनाव में आम जनता के भाजपा के दृष्टिकोण को स्वीकार करने व बहुत सोच समझकर बेहत्तर प्रत्याशियों को उतारने से बीजेपी के परचम लहराने की बात कही।

पयर्टन मंत्री श्री पंत ने निकाय चुनाव में परचम लहराने व अध्यक्ष पद के प्रत्याशी किशन पांडे के समर्थन में कार्यकर्ताओं को जुटने का आह्वान किया। उन्होंने बैठक में परचम लहराने को जुटने का आह्वान किया। इस दौरान एंबेसडर होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के अधिकतर शहर बेहत्तर पर्यटक स्थल के रुप में विकसित हो रहे है। इनमें विशेष रुप से एडवेंचर टूरिज्म पर पिछले एक वर्ष में सफलता मिली है। एक वर्ष में ही घरेलू पर्यटकों की आमद 2.22 करोड़ हुई है। जो पिछले वर्षाें की तुलना में अधिक है। विदेशी पर्यटक भी खासे आए है। आगामी वर्ष में 20 प्रतिशत वृद्धि होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में कुछ पालिकाओं को छोड़ दिया जाए तो शेष निकायों में पिछले 5 वर्ष में राज्य से प्राप्त धनराशि व अपने संसाधनों से हुए विकास कार्यो में व्यापक अनियमितताओं की शिकायतें मिली है। उन्होंने भूगर्भीय जल में गिरावट पर अकुंश को लेकर सभी पालिकाओं में इंटर लाकिंग टाइल्स बिछाने के कार्य के बारे में कहा कि वैचारिक आधार न होने के कारण नगरीय क्षेत्र के पक्के रास्तों के ऊपर टाइल्स बिछाने की बात सामने आ रही है। उन्होंने नगरीय निकायों को स्वावलंबी बनाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 243 के आधार पर अनेक विभागों में जनता की भागीदारी को लेकर कहा कि पिछले पांच वर्षो में ऐसा विजन नहीं बन पाया।
« Last Edit: April 11, 2008, 12:04:12 PM by पंकज सिंह महर »
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पिथौरागढ़। साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाओं वाला पिथौरागढ़ अभी भले ही देशी पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर पा रहा हो, लेकिन विदेशी पर्यटकों की निगाह में अब यह जिला चढ़ने लगा है। रिवर राफ्टिंग के लिए इस वर्ष जिले में रिकार्ड विदेशियों के पहुंचने के बाद अब पैराग्लाइडिंग के लिए भी विदेशी यहां पहुंच रहे है। कनाडा से आयी विदेशी पर्यटकों की एक सोलह सदस्यीय टीम ने गुरुवार को जिला मुख्यालय के आस-पास की पहाड़ियों में पैराग्लाइडिंग की। चार्टड विमान से यहां पहुंचे इस दल ने एक अंतर्राष्ट्रीय टीवी चैनल के लिए पैराग्लाइडिंग पर डाक्यूमेण्ट्री भी बनायी।

उल्लेखनीय है कि सीमांत जिले में साहसिक खेलों की अपार संभावनायें पर्यटन विशेषज्ञ जता चुके है, हालांकि सरकारी स्तर पर इन संभावनाओं के उपयोग के लिए बडे़ प्रयास नहीं हुए है,लेकिन निजी स्तर पर इसके लिए कुछ लोग लम्बे समय से प्रयासरत है। ऐसे ही प्रयासों के तहत इस वर्ष सीमांत जिले में बड़ी संख्या में ब्रिटेन, नार्वे, फ्रांस, बेल्जियम सहित कई यूरोपीय देशों से रिवर राफ्टिंग के लिए पर्यटक यहां पहुंचे। इन लोगों ने भारत-नेपाल के बीच सीमा बनाने वाली काली नदी में कई चरणों में रिवर राफ्टिंग की।

रिवर राफ्टिंग के बाद अब पैराग्लाइडिंग के लिए भी विदेशी पर्यटक यहां पहुंच रहे है। गुरुवार को कनाडा से एक सोलह सदस्यीय दल यहां पहुंचा। युवा उद्यमी पवन जोशी, शंकर सिंह आदि के प्रयासों से पिथौरागढ़ आये इस दल ने मुख्यालय के नजदीकी सौरलेख की पहाड़ियों में पैराग्लाइडिंग की। दल में कई महिलायें भी शामिल थीं। इस दल ने पैराग्लाइडिंग पर एक वृत्त चित्र भी तैयार किया। जिसका प्रसारण ट्रेवल एण्ड लिविंग अंतर्राष्ट्रीय टीवी चैनल पर होगा। यह दल अपराह्न दिल्ली के लिए रवाना हो गया।
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सूखा : अल्मोड़ा, रानीखेत तबाह  

देहरादून (एसएनबी)। केंद्र ने राशन में कटौती की तो उधर कुदरत ने कुछ ऐसी मार मारी कि राज्य के 13 में से 11 जिले जबरदस्त सूखे की चपेट में आ गए। अल्मोड़ा और रानीखेत की हालत बदतर कही जा सकती है। औसतन 40 प्रतिशत फसलें प्रदेश में सूखे की शिकार हुई तो ये आंकड़ा अल्मोड़ा में बढ़कर 45 के करीब पहुंच गया। उधर रानीखेत के तीन सौ गांव ऐसे हैं जहां हर तरफ तबाही का मंजर है। सूखे खेत, झुलसी फसल और मुर्झाये चेहरे अल्मोड़ा और रानीखेत की पहचान बन गई है।
इधर हुई बारिश से राहत की आशा को अंधड़ ने मटियामेट कर दिया। हालत गंभीर है। 40 फीसदी फसलें बर्बाद हो चुकीं हैं। ऊपर से केंद्र ने गेहूं के कोटे में लंगड़ी मार कर रही सही कसर को पूरी भी पूरा कर दिया है। हकीकत यह कि उत्तराखंड जबरदस्त अनाज की किल्लत से दो-चार होने की तरफ है यदि केंद्र का रवैया ना बदला तो भूख का हाहाकार सूबे को हिलाकर रख देगा। जनवरी से मार्च तक सूबे के 11 जिलों में सूखे से फसलें चौपट हो गइर्ं। दस जिलों में औसतन 30 से 40 फीसदी फसलें प्रभावित हुई।
सूखे की स्थिति रहने से गेहूं, जौ, मसूर, आम, आलू, मटर, नींबू प्रजाति, अमरूद, प्लम, नाशपाती, बंदगोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, गन्ना, चना, लाही, सरसों की खेती प्रभावित हुई। सूखे से किसानों की फसलों को हुई नुकसान का जायजा लेने के लिए राजस्व व आपदा मंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से इस संबंध में तहसील स्तर से इसकी रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे। जिससे क्षति का आंकलन कर किसानों को राहत देने के प्रयास किए जाएं। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र मुआवजा लेने का प्रयास शुरू कर दिया है। आपदा विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार सूखे से अल्मोड़ा जिले में सबसे अधिक औसतन 44.3 प्रतिशत फसलों को क्षति पहुंची है। जिले के अल्मोड़ा तहसील में सूखे से 424 गांवों में 50 प्रतिशत, रानीखेत में 300 गांवों में 60 प्रतिशत, भिकियासैण में 397 गांवों में 57 प्रतिशत, सल्ट के 226 गांवों में 35 प्रतिशत, चौखुटिया में 164 गांवों में 40 प्रतिशत, द्वाराहाट में 235 गांवों में 40 प्रतिशत, सोमेश्वर में 147 गांवों में 40 प्रतिशत, भनोली में 222 गांवों में 30 प्रतिशत तथा जैती में 2237 गांवों में 45 प्रतिशत खेती प्रभावित हुई है। टिहरी जिले में औसतन 39 प्रतिशत खेती को सूखे ने क्षति पहुंचाई है। जिले के टिहरी तहसील के 364 गांव में 10-20 प्रतिशत, प्रतापनगर के 148 गांवों में 20-30 प्रतिशत, नरेंद्रनगर के 126 गांवों में 33-45, देवप्रयाग के 363 गांवों में 43 फीसदी, घनसाली के 295 गांवों में 16 प्रतिशत, जाखणीधार में 136 गांवों में 40 प्रतिशत, धनोल्टी के 264 गांवों में 33-45 प्रतिशत तथा गजा के 120 गांवों में 40 फीसदी खेती को क्षति पहुंची है। इससे यहां गेहूं, जौ, मसूर, आम, आलू व मटर को नुकसान हुआ है। जिला रूद्रप्रयाग के रूद्रप्रयाग तहसील के 36 गांवों में 20 प्रतिशत, ऊखीमठ के 48 तथा जखोली के 42 गांवों में 15-15 प्रतिशत खेती चौपट हुई है। हरिद्वार जिले में हरिद्वार तहसील के 32, रूड़की के 71, लक्सर के 11 गांवों में सूखे से कृषि फसलों को 50 फीसदी से अधिक क्षति पहुंची है। जबकि इसी जिले के हरिद्वार तहसील के 85, रूड़की के 245 व लक्सर के 166 गांवों में सूखे से बाग, सब्जियों, गन्ना, आम को 50 प्रतिशत से कम नुकसान हुआ है। देहरादून जिले की ऋषिकेश तहसील के 20 गांवों में 20 प्रतिशत, विकासनगर कालसी के 32 गांवों में 33 तथा चकराता त्यूनी के 37 गांवों में 35 फीसदी खेती प्रभावित हुई है। नैनीताल जिले के 565 गांवों में 30 से 55 प्रतिशत खेती बर्बाद हो चुकी है। चमोली जनपद के 502 गांवों में औसतन 5 से 20 प्रतिशत तक फसलों को सूखे से नुकसान पहुंचा है। जबकि चंपावत जिले के पूर्णागिरी के 56 व चंपावत तहसील के 178 गांवों में 15-20 प्रतिशत, लोहाघाट के 179 व बाराकोट के 103 गांवों में 5-10 प्रतिशत तथा पाटी के 140 गांवोें में 25 प्रतिशत खेती को नुकसान पहुंचा है।
जिला बागेश्वर के बागेश्वर तहसील के 235 गांवों में 39.34 प्रतिशत, कपकोट के 146 गांवों में 40 प्रतिशत, कांड के 234 गांवों में 51.99 प्रतिशत, गरूड़ के 189 गांवों में 38 प्रतिशत तथा उपतहसील काफलीगैर के 106 गांवों में 64.66 प्रतिशत फसलों को क्षति पहुंची है। जबकि जिले में सूखे से बागवानी व अन्य फसलों पर 30 प्रतिशत असर पड़ा है। पौड़ी जिले के 3402 गांवों में औसतन 30 प्रतिशत तथा पिथौरागढ़ के 1492 गांवों में औसतन 39 प्रतिशत खेती को सूखे से क्षति हुई है। उधमसिंह नगर व उत्तरकाशी जिले में कोई नुकसान की सूचना नहीं है।
राजस्व व आपदा विभाग के अनुसार अप्रैल माह के पहले सप्ताह में हुई बारिश ने जरूर किसानों को राहत दी है। पर कुछ स्थानों पर अंधड़ के साथ तेज बारिश ने आम, लीची और गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाकर उनकी परेशानी को बढ़ा दिया है। शासन स्तर पर इसके भी आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं।

 
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27 साल में पिघल जाएगा गंगोत्री ग्लेशियर!  
 
 
देहरादून (एसएनबी)। आज ग्लोबल वार्मिंग पूरे विश्व की समस्या है। विश्व के ग्लेशियर ग्लोबल वार्मिंग में तेजी से पिघल रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि धरती का तापमान ऐसे ही बढ़ता रहा तो तीसरा विश्व युद्ध पानी को लेकर छिड़ सकता है। पृथ्वी के बढ़ते तापमान से गंगोत्री ग्लेशियर भी अछूता नहीं है और इस ग्लेशियर की सेहत में सुधार के लिए एक दर्जन से ज्यादा एजेंसियां व वैज्ञानिक तरह-तरह के उपायों में जुटे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग से गोमुख ग्लेशियर ही नही बल्कि मध्य हिमालय के हिमखंडों पर भी खतरा मंडरा रहा है। जेएनयू के भूगर्भशास्त्री मिलाप चंद्र शर्मा के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग से गंगा नदी के उद्गम गोमुख ग्लेशियर प्रति वर्ष 19 मीटर पीछे खिसक रहा है। ताजा आंकड़े के अनुसार वर्ष 1990 से 2007 तक गोमुख ग्लेशियर 22.80 हेक्टेयर तक पीछे खिसका है। समुद्र तल से 12,770 फीट ऊंचाई पर स्थित गोमुख ग्लेशियर कुछ वर्षो पूर्व तक 32 किमी लंबा व 4 किमी चौड़ा था, लेकिन अब पिघलकर इसकी लंबाई 27 किमी व चौड़ाई 2.50 किमी तक घट चुकी है। यदि पृथ्वी का तापमान इसी तरह बढ़ता रहा और प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नहीं रोका गया तो गंगा का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और गंगा भी इतिहास के पन्नों में उसी तरह सिमट जाएगी जैसे सरस्वती नदी। धरती के तापमान में निरंतर होती वृद्धि से गंगा बेसिन क्षेत्र में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इस कारण गंगा बेसिन के क्षेत्र उत्तराखंड सहित उत्तर प्रदेश व बिहार का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। इंटरनेशनल कमीशन फार स्नो एण्ड आइस के अध्यक्ष समूह ने हिमालय स्थित ग्लेशियरों का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण में जो बातें सामने आई वह ग्लेशियरों के भविष्य को लेकर कई सवाल खडे़ कर गई। अध्यनकर्ताओं के अनुसार जिस गति से प्रदूषण व ग्लोबल वार्मिंग बढ रही है, इस वजह से आने वाले 50 वर्षो में मध्य हिमालय क्षेत्र में पड़ने वाले लगभग 15 हिमखंड पूरी तरह पिघल जाएंगे। इस अध्यन से मिली जानकारियों के अनुसार वर्ष 1935 से 1956 तक गोमुख ग्लेशियर 5.25 हैक्टेयर, 1962 से 1971 तक 12 हैक्टेयर तथा 1977 से 1990 तक 19.60 हैक्टेयर तक पिघल चुका है। मोटे आंकड़े पर गौर करें तो 1962 से अब तक गंगोत्री ग्लेशियर 1.50 किमी तक पिघलकर समाप्त हुआ है। भूगर्भीय सर्वे आफ इंडिया, रिमोट सेंसिंग अप्लिकेशन सेंटर तथा जवाहर लाल नेहरू विश्वविघालय आदि संस्थान भी गंगोत्री ग्लेशियर की सेहत का जायजा लेते रहते हैं। संस्थानों के विशेषज्ञों की मानें तो ग्लोबल वार्मिंग से पिछले 40 वर्षो में ग्लेशियर 28-30 मीटर तक पीछे खिसका है। भारी आशंकाओं को व्यक्त करते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यही स्थिति रही तो वर्ष 2035 तक गंगोत्री ग्लेशियर पिघलकर समाप्त हो जाएगा। बढती ग्लोबल वार्मिंग व घटते ग्लेशियर भविष्य के लिए चेतावनी हैं।
 
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दैवीय प्रतिरूप मानी जातीं बधाणीताल की मछलियां 

रुद्रप्रयाग। जखोली ब्लाक के अंतर्गत नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर बधाणीताल धार्मिक महत्ता को भी समेटे हुए है। यह ताल भगवान विष्णु नारायण के पवित्र सरोवर के नाम से भी प्रसिद्ध है।

प्रकृति ने जनपद रुद्रप्रयाग के पर्यटन स्थलों को खासा सौंदर्य प्रदान किया है। दर्पण के समान चमकते मनोहारी तालों का धार्मिक महत्व भी है। बधाणीताल की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है, साथ ही यह ताल धार्मिक परंपराओं को भी समेटे हुए है। एक ओर पंद्रह किमी तक पंवाली बुग्याल व दूसरी ओर बारह किमी तक माटिया बुग्याल के बीच स्थित प्रकृति का यह अनमोल खजाना आज पर्यटकों की नजरों से ओझल है। जखोली ब्लाक के धारकुड़ी तक मोटरमार्ग व चार किमी की पैदल यात्रा करके बधाणीताल पहुंचा जा सकता है। सदियों से चली आ रही मान्यता के अनुसार ग्रामीण इस ताल की मछलियों को दैवीय प्रतिरूप मानते है। कहा जाता है कि इन मछलियों का शिकार करने से दैवीय प्रकोप टूट पड़ता है। इसी भय के कारण मछलियां आज भी सुरक्षित है। इस क्षेत्र के इर्द-गिर्द सुरम्य पहाड़ियों पर हरी-भरी मखमली बुग्याल, रंग बिरंगी वन्य प्रजातियों के पुष्प, पक्षियों का कलरव सैलानियों को खूब भाता है। प्रकृति के अनमोल खजानों को पर्यटन योजना से जोड़ने की कोई पहल होती नहीं दिखाई दे रही है। इन स्थलों पर जरूरी सुविधाओं की भी कमी है, जिससे यहां पर्यटक कम ही पहुंच पाते है। आगामी बैशाखी पर यहां मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी आजकल व्यापक तैयारियां चल रही है। भाजपा के जखोली मंडल अध्यक्ष महावीर सिंह पंवार का कहना है कि पर्यटन विभाग बधाणीताल को विकसित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। बताया कि ताल के सौंदर्यीकरण के लिए पूर्व में वह पर्यटन मंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। शीघ्र ही इस दिशा में शासन स्तर से पहल होने की संभावना है।
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पर्यटकों की समस्याओं के निराकरण को पर्यटक पुलिस की तैनाती होगी

नैनीताल। पर्यटन प्रदेश की परिकल्पना के अनुरुप अब गढ़वाल व कुमाऊं में पर्यटन पुलिस प्रमुख पर्यटक स्थलों में तैनात होगी। जिसमें सरोवर नगरी नैनीताल के लिए 25 पुरुष व 5 महिला पुलिस कर्मियों की 16 अप्रैल से एकेडेमिक स्टाफ कालेज कुविवि में प्रशिक्षण शुरु हो रहा है। साथ ही पर्यटकों को नगर के प्रमुख पर्यटक स्थलों व इतिहास से परिचित कराने को नि:शुल्क पुस्तिका भी वितरित की जाएगी।

विदित हो कि प्रदेश में राज्य गठन के बाद जहां निरंतर पर्यटकों की आमद में वृद्धि हुई है। वहीं, पर्यटकों की सुविधाओं के लिए अनेक योजनाएं संचालित की गयी है। इसमें विश्व प्रसिद्ध नैनीताल शहर में पर्यटकों की सुविधाओं व समस्याओं को लेकर कुछ समय पहले सर्वे किया गया था। जिसमें पर्यटकों की समस्याओं पर टैक्सी, गाइड आदि को लेकर समस्याएं सामने आयी थी। एसएसपी जीएस मर्तोलिया ने बताया कि प्रदेश में पर्यटन पुलिस की परिकल्पना के अनुरुप एकेडेकि स्टाफ कालेज में 16 से 24 अप्रैल तक 25 पुरुष व 5 महिला आरक्षियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें कर्मियों को नैनीताल व कुमाऊं के इतिहास व प्रमुख पर्यटक स्थलों की जानकारी समेत पर्यटकों के साथ अच्छे व्यवहार व पर्यटकों के गाइड व होटल आदि में समस्याओं से बचाव को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। कर्मियों को काठगोदाम से लेकर सरोवर नगरी में तल्लीताल, मल्लीताल, बारापत्थर में तैनात किया जाएगा।

श्री मर्तोलिया ने बताया कि इसके अलावा पर्यटकों को नगर के प्रमुख पर्यटक स्थलों से परिचित कराने व अन्य जानकारी के लिए एक नि:शुल्क पुस्तिका का वितरण किया जाएगा। जिसमें नैनीताल से अन्य प्रमुख स्थानों की दूरी, पुलिस, अस्पताल, होटल, रेलवे बुकिंग, पेट्रौल पंप समेत विभिन्न प्रमुख स्थानों के दूरभाष नंबर समेत अन्य जानकारी उपलब्ध होगी। बताया कि गाइडों के पर्यटकों के साथ व्यवहार सही न करने की शिकायतों को लेकर कहा कि गाइड का रजिस्ट्रेशन व कार्ड बने इसके लिए कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए केएमवीएन व एलडीए से भी सहयोग मांगा गया है।

बहरहाल, सरोवर नगरी में पर्यटन पुलिस की अतिशीघ्र तैनाती होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना बढ़ गयी है।
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लगातार तीन दिन अवकाश से सरोवर नगरी नैनीताल में पर्यटक उमड़े

नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में तीन दिन का लगातार अवकाश पर्यटकों की भारी भीड़ खींच लाया है। जिससे सरोवर नगरी के पर्यटन स्थलों में बहार आ गई है। पर्यटन व्यवसायियों की बांछे खिल आई है।

माह के दूसरे शनिवार, रविवार व डा. अम्बेडकर जयंती तीन दिन के लगातार अवकाश के चलते विभिन्न शहरों के पर्यटक छुट्टी मनाने के लिए यहां पहुंचे हुए है। जिस कारण नगर के प्रमुख पर्यटन स्थल क्रमश: स्नोव्यू, केव गार्डन, लवर्स प्वाइंट, चिड़ियाघर, हनुमानगढ़ी मंदिर, हिम दर्शन, किलबरी व राजभवन क्षेत्र में पूरे दिन सैलानियों की आवाजाही बनी रहने से रौनक रही। माल रोड पर सैर सपाटा करने वालों की खासी तादात नजर आई, जबकि नैनी झील में नौका विहार का लुत्फ उठाने वाले सैलानियों की भीड़ पूरे दिन लगी रही। काफी संख्या में पर्यटकों के उमड़ पड़ने से गिफ्ट सेंटरों में खरीददारी करने वाले सैलानियों की भीड़ नजर आई। पर्यटकों के खासी तादात में पहुंच जाने से पर्यटन से जुड़े व्यवसायियों में काफी खुशी है। उम्मीद है कि सोमवार को भी पर्यटकों का पहुंचना जारी रहेगा। साथ ही नए पर्यटन सीजन में और अधिक पर्यटकों के उमड़ने की संभावना बनी हुई है।
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श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। भगवान श्री बदरी विशाल के अभिषेक में प्रयुक्त होने वाले तिल के तेल को लेकर गाडूघड़ी यात्रा श्रीनगर से आज डिम्मर के लिए रवाना हुई जहां से यह यात्रा जोशीमठ पांडुकेश्वर होते हुए बदरीनाथ पहुंचेगी।

रविवार की सांय गाडूघड़ी यात्रा के ऋषिकेश से श्रीनगर पहुंचने पर विश्वविद्यालय गेट के समक्ष राजीव विश्नोई के नेतृत्व में यात्रा का स्वागत किया गया। यहां से बैंड बाजों की धुनों पर भजनों के साथ गाडूघड़ी यात्रा श्रीनगर के सभी प्रमुख मार्गो से होकर गुजरी। कल्याणेश्वर मंदिर पहुंचकर रात्रि में गाडूघड़ी की विशेष पूजा की गयी। आज प्रात: हुई विशेष पूजा अर्चना के उपरांत यात्रा श्रीनगर से प्रस्थान कर गयी। राजीव विश्नोई, हिमांशु अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, गोपाल डुडेजा, वीरेंद्र शाह, प्रदीप मल्ल, मोहन लाल जैन, पदमेंद्र पांडे, मोहित अग्रवाल आदि ने यात्रा के आयोजन प्रबंध में सहयोग दिया। इससे पूर्व कीर्तिनगर मोटर पुल पर गाडूघड़ी यात्रा का कीर्तिनगर की जनता ने स्वागत किया। डिमरी पंचायत के लोग इस यात्रा में साथ हैं। देवप्रयाग प्रतिनिधि के मुताबिक वहां पहुंचने पर तीर्थ पुरोहित समाज ने श्रद्धा उत्साह के साथ गाडूघड़ी का स्वागत किया। मोटर स्टैंड के मुख्य बाजार श्री रघुनाथ मंदिर होते हुए गाडूघड़ी नगर पंचायत सभागार में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखी गयी। पंडा पंचायत अध्यक्ष मुकेश भट्ट प्रयागवाल, सचिव दिनेश चंद्र ध्यानी, आचार्य शैलेन्द्र नारायण, गुणानंद कोटियाल, भैरव पंचपुरी आदि ने पवित्र गाडूघड़ी का अभिषेक कर पूजन किया।
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टिहरी बांध की झील में यदि वाटर स्पो‌र्ट्स और नौकायन शुरू हो गई, तो बांध राज्य सरकार के लिए कामधेनु साबित होगा। यह बिजली से तो आय देगा ही साथ ही करोड़ों रूपये पर्यटन से प्राप्त होंगे। पर्यटन का यह स्वर्ग स्थानीय लोगों के लिये वरदान साबित हो सकता है।

राज्य सरकार ने बयालीस वर्ग किलोमीटर विशालकाय टिहरी बांध परियोजना की बहुआयामी झील के चारों ओर पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पर्यटन महायोजना का प्रारूप तैयार किया है, महायोजना में विभिन्न प्रकार के वाटर स्पो‌र्ट्स, नौकायन के साथ-साथ झील के चारों ओर पर्यटक स्थल बनाने के लिए स्थलों का चयन किया है, ताकि अधिक पर्यटक आकर झील का लुत्फ उठा सके। वाटर स्पो‌र्ट्स के विशेषज्ञ अनिल कुमार शर्मा का कहना है कि पर्यटन महायोजना स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बननी चाहिए, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। उन्होंने बताया कि झील में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेलों की सुविधाएं होनी चाहिये, इससे स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। जिला पर्यटन अधिकारी किशन रावत का कहना है कि वाटर स्पो‌र्ट्स इंस्टीट्यूट के लिए आठ करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है इसके लिए 6 हेक्टेयर जमीन झील के पास ढूंढ ली गई है, जबकि सिंराई में रिसोर्ट के लिए दो हेक्टेयर जमीन, उप्पू-गढ़ के ऐतिहासिक महल क्षेत्र को विकसित करने को 51 लाख, 8 हजार रूपये सिंचाई विभाग को मिल चुके है। श्री रावत ने बताया कि झील के आस-पास के क्षेत्र को विकसित करने के लिये पर्यटन महायोजना पर तेजी से कार्य हो रहा है। राज्य सरकार टिहरी बांध की झील व उसके आस-पास के क्षेत्र को विकसित करने के लिए पर्यटन महायोजना का जो प्रारूप तैयार किया जा रहा है, यदि वह धरातल पर साकार हुई तो इसमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेलों के साथ देश का सबसे बड़ा पर्यटक स्थल भी बनेगा। जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के साथ-साथ रोजगार के भी अवसर मिलेंगे। गढ़वाल मंडल विकास निगम नई टिहरी अतिथिगृह के मैनेजर बीएम बहुगुणा का कहना है कि टिहरी बांध का जलाशय बनने के बाद पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो रहा है और पिछले तीन वर्षो में इसमें लगातार वृद्धि जारी है। इस बार यात्रा सीजन में चारधाम यात्रा आने वाले यात्रियों में झील को देखने वाले पर्यटकों की भी खासी संख्या बढ़ेगी
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पिथौरागढ़। कैलाश मानसरोवर यात्रा में इस बार कई महत्वपूर्ण बदलाव किये गये है। जून में शुरू होने वाली यात्रा इस वर्ष मई में ही शुरू हो जायेगी साथ ही यात्रा रूट भी बदला गया है। इस वर्ष यात्रा पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से होकर गुजरेगी। चीन क्षेत्र में मिलने वाली घटिया स्वास्थ्य सेवाओं को देखते हुए इस वर्ष चीनी क्षेत्र भारतीय स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती पर विचार किया जा रहा है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारियों को लेकर मंगलवार को पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी डी.सैंथिल पांडियन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यात्रा आयोजक संस्था कुमाऊं मण्डल विकास निगम के प्रबंध निदेशक अमित नेगी ने बताया कि इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा 29 मई से शुरू होगी। यात्रा में 16 बैच जायेंगे, जिसमें 40 से लेकर 60 तक यात्री होंगे। इस वर्ष यात्रा पथ में बदलाव किया गया है। अभी तक यात्रा बेरीनाग होते हुए बेस कैम्प धारचूला जाती थी,लेकिन इस वर्ष यात्रियों को जागेश्वर में रात्रि विश्राम कराने के बाद पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से होकर बेस कैम्प धारचूला ले जाया जायेगा। उन्होंने बताया कि यात्रा पथ में पड़ने वाले पैदल पड़ावों की व्यवस्था बेहतर करने के लिए निगम की एक टीम पैदल पड़ावों के लिए भेज दी गयी है।

पैदल पड़ावों पर संचार व्यवस्था की जानकारी देते हुए आईटीबीपी के अधिकारियों ने बताया कि गुंजी से अंतिम सीमा लीपूपास तक संचार की व्यवस्था आईटीबीपी करेगी। गाला, बूंदी, गुंजी में भारत संचार निगम लिमिटेड सैटेलाइट फोन की व्यवस्था करेगा। इस क्षेत्र के सभी थानों, चौकियों और बेस कैम्प में भी संचार की व्यवस्था रहेगी। यात्रा दलों के साथ चलने वाले सुरक्षा कर्मियों के पास वायरलेस सेट रहेंगे।

यात्रा पथ पर खाद्यान्न की कोई समस्या न हो इसके लिए सभी खाद्यान्न गोदामों में पर्याप्त खाद्यान्न रखे जाने के निर्देश जिलाधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी को दिये। हर यात्रा दल के साथ एक चिकित्सक और एक फार्मेसिस्ट की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया। बैठक में चीन में घटिया चिकित्सा सुविधा मिलने की कैलाश यात्रियों की शिकायत को देखते हुए चीनी क्षेत्र तकलाकोट में भारतीय चिकित्सा कर्मियों की तैनाती पर भी विचार किया गया। बैठक में इसका प्रस्ताव भारत सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया।

यात्रा कुलियों की मजदूरी तय करने को लेकर हुई चर्चा के बाद जिलाधिकारी ने शीघ्र ही मजदूरी निर्धारण कर लेने के निर्देश धारचूला के उपजिलाधिकारी को दिये। यात्रा के दौरान मार्ग बंद होने की समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में डोजर तैनात करने के निर्देश सीमा सड़क संगठन के अधिकारियों को दिये। यात्रा तैयारियों को लेकर दस मई को धारचूला के उपजिलाधिकारी और बीस मई को जिलाधिकारी द्वारा पैदल पड़ावों का निरीक्षण करने का निर्णय भी बैठक में लिया गया। बैठक में भारत चीन व्यापार को लेकर भी चर्चा की गयी।
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