Author Topic: Tourism Related News - पर्यटन से संबंधित समाचार  (Read 5263 times)

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Online पंकज सिंह महर

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साथियो,
       इस विषय के अन्तर्गत हम पर्यटन से संबंधित समाचारों से फोरम को अवगत करायेंगे।
« Last Edit: September 05, 2009, 10:33:54 AM by हिमांशु पाठक »
यो नै हुन, ऊ नै हुन! कै बेर, कै नै हुन|
सीर पाणी की वां फुटेली, जां मारुंला लाता|
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बर्फवारी से फिर लौटी ठिठुरन, पर्यटकों के चेहरे खिले

गोपेश्वर (चमोली)। रिमझिम बारिश के साथ मौसम का रूख चौथे दिन भी साफ नजर नहीं आया। बारिश के चलते निचले क्षेत्रों में जहां सर्द हवाओं के साथ पुन: ठिठुरन शुरू हो गयी, वहीं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फवारी का सिलसिला जारी है।

अप्रैल माह में मौसम ने वर्ष 1964 के रिकार्ड तोड़ जनपद मुख्यालय गोपेश्वर समेत जोशीमठ, पीपलकोटी, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, गौचर, पोखरी व थराली क्षेत्रों में कड़कड़ाती ठंड को दस्तक दी है। मौसम के मिजाज में हुए अचानक परिवर्तन से जहां पुन: जनवरी-दिसंबर का माहौल लौट आया, वहीं फसलों को इस बे-मौसमी बर्फवारी व बारिश से भारी नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। इधर लगातार जारी बर्फवारी से मंडल चोपता, तुंगनाथ, औली, फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब, गोविंद घाट, बदरीनाथ धाम में पहाड़ियां ने सफेद चादर ओढ़ ली है। बर्फवारी के चलते चोपता व औली में पर्यटकों का तांता भी मौसम के लुत्फ उठाने को पहुंच रहा है।
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द्रोणागिरी पर्वत का हिस्सा है दूनागिरी शक्तिपीठ

चौखुटिया(अल्मोड़ा)। उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में वैष्णवी मां-देवी दूनागिरी शक्तिपीठ भी एक है। जो प्राचीन काल से ही श्रद्घालुओं का अटूट विश्वास व श्रद्घा का प्रतीक रहा है। यहां मन्नतें मांगने के लिये वर्ष भर दूर-दूर से श्रद्घालु पहुंचते है। चैत्र नवरात्र में तो यहां लोगों की भारी भीड़ रहती है तथा अष्ठमी को भण्डारे के साथ वृहद मेला लगता है।

बताते है कि इस मंदिर की स्थापना संवत 1238 में हुई है। इसके बारे में अनेक किंवदंतियां प्रचलित है। कहा जाता है कि त्रेता युग में मर्यादा परूषोत्तम रामचंद के बनवास के दौरान जब लक्ष्मण के शक्ति लगी तब हनुमान संजीवनी लेने हिमालय में गये तथा बूटी को न पहिचान पाने से वे द्रोणागिरी पर्वत को ही उठा लाये। पर्वत का एक भाग यहां गिर गया, जिसमें वैष्णवी माता की शक्तिपीठ स्थित थी। वही शक्तिपीठ यहां पूजी जाती है। यह मान्यता है कि गुरू द्रोणाचार्य ने इस स्थान पर देवी वैष्णवी की आराधना की थी तथा उन्हे यहां पर देवी ने दर्शन दिये।

कहते है कि दूनागिरी में प्राचीन काल से ही अनेक महापुरूषों ने योग साधना की। जिनमें प्रख्यात संत सोमबार गिरी महाराज, हैड़ाखान बाबा, मोहनी माई व विश्व प्रसिद्घ संत श्यामाचरण लाहिडी सहित अन्य के नाम शामिल है। आज भी देश-विदेश से लोग आध्यात्मिक ज्ञान व शांति के लिये यहां आते है। इसबीच नवरात्रों के दौरान यहां प्रतिदिन मेला जैसा माहौल रहता है तथा अष्ठमी को मेला लगता है। देवी को नारियल, वस्त्र व अन्य श्रंगार सामाग्री भेंट की जाती है। मन्नतें पूरी होने पर घंटियां चढ़ाने की खास प्रथा है। मंदिर समिति द्वारा श्रद्घालुओं को सभी आवश्यक सुविधायें दी जाती है। पर्यटकों के लिये भी यह सुन्दर स्थल है।
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पर्यटकों की मदद को हाजिर रहेगी पर्यटन पुलिस

देहरादून। चारधाम यात्रा के दौरान पर्यटकों की मदद व सुरक्षा के लिए पर्यटन पुलिस अब हाजिर रहेगी। इसके लिए बाकायदा उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है।

सोमवार को पुलिस महानिदेशक सुभाष जोशी ने पुलिस लाइन में उत्तराखंड पर्यटन पुलिस के प्रशिक्षण का शुभारंभ किया। उत्तराखंड पर्यटन पुलिस में एक सौ पुलिस कर्मियों को शामिल किया गया है, जो चारधाम यात्रा के दौरान 22 स्थानों पर तैनात रहेंगे। दून के फ्रेंकफिन इंस्टीट्यूट की सहायता से इन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है। पर्यटन पुलिस के जवान टूरिस्टों को गाइड करने के साथ ही उनकी सुरक्षा और उनसे संबंधित अपराधों की समीक्षा करेंगे। वे जिला प्रशासन व होटल, रेस्तरां और धर्मशालाओं के प्रबंधतंत्र से भी समन्वय स्थापित करेंगे। पुलिस महानिदेशक जोशी ने कहा कि पर्यटन पुलिस उत्तराखंड आने वाले हर टूरिस्ट की सेवा के लिए तत्पर रहेगी। यात्रा रूट के प्रमुख पड़ाव पर इन्हें तैनात किया जाएगा। तीन हफ्ते के प्रशिक्षण के बाद मई माह के शुरूआत में इन्हें तैनात कर दिया जाएगा। उत्तराखंड पर्यटन पुलिस की अन्य पुलिसकर्मियों से वर्दी हटकर होगी। वे अलग से एक जैकेट पहनेंगे, जिस पर उत्तराखंड पुलिस का निशान भी होगा। उन्होंने बताया कि नैनीताल में पर्यटन पुलिस के 25 जवानों को कुमाऊं विवि की सहायता से प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके साथ ही देहरादून और हरिद्वार जनपद में 50-50 पुलिस कर्मियों को फ्रेंकफिन, फिनिस और आहा इंस्टीट्यूट की तरफ से व्यवहार कुशल बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, ये वे पुलिसकर्मी हैं, जो थाने व चौकियों में सीधे जनता से जुड़े रहते हैं। गौरतलब है कि पुलिस वीक के दौरान मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने आला-अफसरों को पुलिस के व्यवहार में बदलाव लाने की हिदायत देते हुए उत्तराखंड पुलिस को देश में अलग से पहचाने बनाने का आह्वान किया था। इसी कड़ी में पहले चरण में देहरादून और हरिद्वार के 50-50 पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इससे पूर्व फ्रेंकफिन और फिनिस इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक एमए गणपति, अजय कुमार,राम सिंह मीना,अशोक कुमार व जीवन चंद्र पांडेय व अन्य अफसर भी मौजूद थे।
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चारधाम यात्रा: जन सुविधाएं 25 अप्रैल तक पूरी हों

देहरादून। चार धाम यात्रा में तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं व देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को जरूरी जन सुविधाएं मुहैया कराने के लिए विभागों को 25 अप्रैल तक तैयारी पूरी करनी होगी। यात्रा मार्गो पर दुर्घटनाएं कम करने को सघन अभियान चलाया जाएगा।

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव व गढ़वाल मंडलायुक्त सुभाष कुमार ने आयुक्त शिविर कार्यालय में चारधाम यात्रा व्यवस्था संबंधी बैठक में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। जन सुविधाएं संबंधी तैयारी समय पर पूरी करने के लिए विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने को कहा गया है। यात्राकाल में शासन व प्रशासन संवेदनशील नजर आएगा। यात्रियों को यह महसूस कराया जाएगा कि सरकार उनकी सहायता को तत्पर है। प्रमुख सचिव ने वरिष्ठ अधिकारियों को यात्रा काल में मार्गो व प्रमुख तीर्थ स्थलों का नियमित निरीक्षण कर जनसुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। इस अवधि में स्थानीय लोगों के लिए परिवहन सुविधाएं समुचित बनाने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। गंगोत्री व गौरीकुंड क्षेत्रों में जाम से होने वाली दिक्कतें दूर करने को पार्किंग की समुचित व्यवस्था के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए गए हैं। सुलभ इंटरनेशनल संस्था यात्रा मार्गो पर स्थित 76 शौचालयों को समस्त सुविधायुक्त बनाएगी। संस्था के प्रतिनिधि ने बताया कि सभी शौचालयों को 30 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। पर्यटन विभाग से प्राप्त 5.43 लाख रुपये से यात्रा मार्ग के 50 शौचालयों को आधुनिक सुविधायुक्त किया जा रहा है। जिलाधिकारियों को उक्त शौचालयों का आकस्मिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। दुर्घटनाएं रोकने को यात्री वाहनों को गमन पत्र के अनुसार ही आवाजाही करनी होगी। इस संबंध में संभागीय परिवहन अधिकारियों व पुलिस को निर्देश दिए गए हैं। मार्गो पर 12 निर्माणाधीन पेयजल टंकियों का निर्माण निर्धारित अवधि में पूरा करने व रुद्रप्रयाग के नजदीक बेलनी नगरीय पेयजल योजना का सुदृढ़ीकरण जल्द करने को कहा गया है। उत्तरकाशी व रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारियों को पैदल मार्ग में डंडी-कंडी के रेट तय करने व एक घोड़े के साथ एक मजदूर अनिवार्य रूप से रखने को कहा गया है। चार-पांच घोड़ों का संचालन एक मजदूर से कराने से पैदल मार्गो में यात्रियों को भय बना रहता है। प्रमुख सचिव ने जीएमवीएन को 85 पर्यटक आवास गृहों का रख-रखाव व उनमें जरूरी सुविधाएं अप्रैल माह के अंत तक जुटाने के निर्देश दिए हैं। गौरीकुंड से केदारनाथ व जानकीचट्टी से यमुनोत्री तक पथ प्रकाश की व्यवस्था के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया। यात्रा के दौरान पर्यटक आवास गृह सूचना केंद्र के रूप में भी काम करेंगे। गढ़वाल मंडल पुलिस महानिरीक्षक अशोक कुमार ने उत्तरकाशी से केदारनाथ यात्रा मार्ग के लिए लंबगांव में थाना खोलने की आवश्यकता बताई। उन्होंने जखोली में थाना, धनोल्टी, चोपता व शिवपुरी में एक-एक पुलिस चौकी खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
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चारधाम यात्रा की व्यवस्था 8.20 करोड़ से होगी
नैनीताल। उत्तराखंड की प्रसिद्ध धार्मिक चारधाम यात्रा की चाक चौबंद व्यवस्था के लिए पर्यटन विभाग इस बार 8.20 करोड़ रुपया खर्च करेगा। इसके तहत यात्रा मार्ग में हाईटैक सुलभ शौचालय, कूड़ा-कचरा निस्तारण व पेयजल आपूर्ति सहित अन्य मार्गीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक एके द्विवेदी ने बताया कि चार धाम यात्रा के दौरान यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस दिशा में पर्यटन विभाग विशेष भूमिका निभाने जा रहा है। मार्ग पर 50 नए सुलभ शौचालय बनाए जा रहे है। जो हाईटैक होंगे। निर्माण कार्य सुलभ शौचालय इंटरनेशनल संस्था को सौंपा गया है। इस कार्य को 5 करोड़ रुपए की लागत से होना है। निर्माण कार्य की अवधि का लक्ष्य डेढ़ माह निर्धारित किया गया है। निर्माण कार्य शुरु हो चुका है। यात्रियों के समक्ष आने वाली स्वच्छ पेयजल किल्लत को दूर करने के लिए 12 नई टंकियां बनाई जा रही है। इसके अलावा जीर्णशीर्ण टंकियों की मरम्मत करायी जा रही है। यह कार्य जल संस्थान को सौंपा गया है। जिसे 2.20 करोड़ रुपए की लागत से किया जाना है। पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए विभाग बेहद सावधानी बरत रहा है। यात्रा के दौरान यात्रियों द्वारा फेंके जाने वाले कूड़ा कचरे के निस्तारण के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। यह कार्य गढ़वाल मंडल विकास निगम के जिम्मे सौंपा गया है। कूड़ा निस्तारण के लिए अत्याधुनिक व्यवस्थाएं की जा रही है। संभवत: निजी संस्थाओं का इस कार्य में सहयोग लिया जाएगा।

श्री द्विवेदी ने बताया कि पर्यटकों के ठहरने के लिए आवासीय व्यवस्था पूर्ण रुप से दुरुस्त कर ली गयी है। इसके अलावा सूचना केंद्रों की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए स्थान चिन्हीकरण का कार्य चल रहा है। यह कार्य भविष्य को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
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चार धामों में पूजा के अवसर जुटाएगी सरकार

उत्तरकाशी। देवभूमि पहुंचने वाले यात्रियों के मन में भगवान के दर्शन कर पुण्य कमाने की भावना होती है। यात्रियों की इस भावना को सिर आंखों पर रखते हुए सरकार राज्य के चारों धाम में दर्शन व पूजा के विशेष अवसर उपलब्ध कराएगी। यात्रा आरामदायक हो इसके लिए सड़क व रास्तों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष सूरत राम नौटियाल ने बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग को सुधारना सरकार की पहली प्राथमिकता है। सड़कें अब जल्द ही आरामदायक यात्रा होंगी। यही नहीं, मंदिरों में दर्शन व पूजा के भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे। इसके लिए सरकार तीर्थ पुरोहितों के बीच बैठकें आयोजित करेगी। श्री नौटियाल ने कहा कि सरकार की सभी मंदिरों को नया रूप देने की योजना भी है। प्रत्येक मंदिर को वेब साइट पर भी जोड़ा जाएगा ताकि यात्री को यहां के हर मंदिर की जानकारी हो।
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पर्वतारोहियों की संजीवनी बनेगा सर्च व रेस्क्यू दल

उत्तरकाशी। एनआईएम इन दिनों सर्च एंड रेस्क्यू का विशेष प्रशिक्षण कोर्स चला रहा है। प्रशिक्षण में भारत के अलावा फ्रांस, नेपाल, हांगकांग व बंग्लादेश के युवक-युवतियां इसके गुर सीख रहे हैं।

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी के प्रशिक्षण विदेशियों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। एनआईएम इन दिनों सर्च एंड रैस्क्यू का विशेष प्रशिक्षण संचालित कर रहा है। इस विशेष प्रशिक्षण में नेपाल से दो व फ्रांस, बंग्लादेश व हांगकांग से एक-एक प्रशिक्षु सर्च एंड रैस्क्यू का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षणार्थियों को इसोटो डॉग, 060-ए-बाबा व 061-ए-बड़्डी कुत्तों के माध्यम से भी खोज और बचाव के गुर सिखाए जा रहे हैं। इन प्रशिक्षित कुत्तों में यूं तो कई विशेषताएं हैं लेकिन आपदा के बाद मिट्टी में दबे इंसान को तलाशने में ये कुत्ते विशेष दक्षता रखते हैं। एनआईएम के प्राचार्य कर्नल मंसूर ने बताया कि पर्वतारोहण व पथारोहण के दौरान कई बार दल फंस जाते हैं और ऐसे में सरकार को भी सेना के ही भरोसे रहना पड़ता है। ऐसे में एनआईएम के सर्च एंड रेस्क्यू प्रशिक्षित अहम भूमिका निभा सकते हैं। प्राचार्य ने बताया कि का खोज व बचाव दल तैयार करने की दिशा में एनआईएम विशेष प्रयास कर रहा है। इसके लिए तजुर्बेकार प्रशिक्षकों की भर्ती की जा रही है। उन्होंने बताया कि एनआईएम दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों तक पहुंच आसान बनाने के लिए एम्बुलेंस सेवा शुरू करने जा रहा है। राज्य में 120 एम्बुलेंस वाहन संचालित कि ए जाएंगे, जिससे दुर्घटना के वक्त घायलों को तत्काल मदद मिल सके।
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गंगोत्री मंदिर समिति ने अर्जित किए17 लाख

उत्तरकाशी। विश्व प्रसिद्ध धाम गंगोत्री की वार्षिक आमदनी 41 लाख 64 हजार 9 सौ चार रही। गत वर्ष की अपेक्षा श्री पांच गंगोत्री मंदिर समिति 17 लाख से अधिक की धनराशि अर्जित की।

श्री पांच गंगोत्री मंदिर समिति का वार्षिक बजट एसडीएम भटवाड़ी पीसी डंडरियाल की मौजूदगी में अनुमोदित किया गया। गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव रावल सचिव हरीश सेमवाल ने समिति के समस्त हकदारान के सामने आय-व्यय विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006-07 की आय 41 लाख 64 हजार 9 सौ 4 रुपए के सापेक्ष वर्ष 2007-08 में मंदिर समिति को 59 लाख 17 हजार 3 सौ 56 रुपए की आय प्राप्त हुई है। समिति की इस बैठक में रावल हरीश सेमवाल ने प्रस्ताव रखा कि गंगोत्री में मेडिकल सुविधाओं के साथ ही उत्तरकाशी से गंगोत्री तक नियमित बस सेवा शुरू की जाए। समिति ने मंदिर को बेव साइट से जोड़ने की जोरदार कवायद की। उन्होंने कहा कि गंगोत्री मंदिर की समस्त जानकारियां वेब पर होंगी तो तीर्थ यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने कहा कि समिति ऋषिकेश, हरिद्वार समेत अन्य स्थानों पर गंगोत्री समिति की धर्मशाला स्थापित करने का मन बना रही है इसके लिए जमीन की खरीददारी पर विचार चल रहा है।
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वन्यजीवों को देखने के लिए उमड रही है भीड़

कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों को देखने के लिए नयी कालोनी में लोगों की भारी भीड़ जमा हो रही है। रिजर्व की दक्षिणी सीमा पर बने वाटर होल पर एक साथ 27 हाथी लोगों में रोमांच का कारण बन गए।

कार्बेट टाइगर रिजर्व की दक्षिणी सीमा पर हाइडिल कालोनी के निरीक्षण भवन के निकट बने वाटर होल पर इन दिनों शाम के समय रोमांचकारी दृश्य दिखायी दे रहे हैं। वाटर होल पर शाम के समय काफी संख्या में वनों से हाथी, बाघ, गुलदार, भालू, हिरन, नीलगाय आदि जानवर दिन भर की प्यास बुझाने आ रहे हैं। आबादी के निकट बने इस वाटर होल पर शाम का धुंधलका होते ही बड़ी संख्या में स्त्री, पुरूष और बच्चे जमा हो जाते हैं। वन्यजीवों को एक साथ देखकर लोगों के शोरगुल से कई बार वन्यजीव विचलित हो जाते हैं। वर्तमान में पर्यटकों के झिरना और ढिकाला में आ जाने के कारण वहां पर वन्यजीव बाहरी लोगों का दबाव महसूस करते हैं। इससे यह जीव वनों में प्रवेश कर जाते हैं। वहीं पानी और चारे की तलाश में यह जीव कालागढ़ के आबादी इलाकों की ओर कूच कर जाते हैं। वहीं इस बार आबादी के साथ ही वाटर होल बना दिए जाने के कारण यहां पर वन्यजीव अपनी प्यास बुझाने आ रहे हैं। वहीं आबादी क्षेत्र के निकट बने इस वाटर होल के कारण लोगों की बढ़ती भीड़ से वन्यजीवों के विचरण में होने वाली किसी भी बाधा के कारण यहां पर कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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मां पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालु उमड़े

टनकपुर (चंपावत)। उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम जारी है। रविवार को सरकारी अवकाश होने के कारण शनिवार को भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

सरकारी मेला शुरू हुए 12 दिन बाद भी मेले में कई समस्यायें बनी हुई है। पूर्णागिरि मार्ग की यातायात व्यवस्था अभी तक पटरी में नही आ पाई है। टनकपुर, ठूलीगाड़ व भैरव मंदिर क्षेत्र में वाहनों के आड़े- तिरछे खड़े होने से श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतें उठानी पड़ रही है। पूर्णागिरि मार्ग में वाहनों में हो रही ओवर लोडिंग में प्रशासन का अभी तक अंकुश नहीं लग पाया है। पूर्णागिरि मेले में विभिन्न देवी-देवताओं के रूप में पूर्णागिरि क्षेत्र में जगह-जगह भीख मंागने को खड़े लोग आकर्षण का केन्द्र बने है।
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ठूलीगाड़-पूर्णागिरि रज्जू मार्ग को स्वीकृति मिलने से पुजारी भड़के

टनकपुर(चंपावत)। शासन द्वारा ठूलीगाड़- पूर्णागिरि रज्जाू मार्ग (रोपवे) को स्वीकृति मिलने से मां पूर्णागिरि धाम के पुजारी भड़क उठे है। पुजारियों ने रज्जाू मार्ग का रास्ता न बदलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर हिन्दू जागरण मंच ने शासन के इस फैसले का स्वागत किया है।

मालूम हो कि ठूलीगाड़ से कालिका मंदिर तक दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए रोपवे लगाये जाने की मांग लम्बे समय से उठाई जा रही है। रोपवे लगाये जाने को लेकर पूर्व कृषि मंत्री महेन्द्र सिंह माहरा ने भी अपने शासन काल में जोरदार ढंग से पैरवी की थी। पूर्णागिरि क्षेत्र में सरकार द्वारा रोपवे लगाये जाने की स्वीकृति से मंदिर के पुजारी भड़क उठे है। धाम के मुख्य पुजारी व बीडीसी सदस्य भुवन चन्द्र पान्डेय ने रोपवे का स्थान बदलकर ठूलीगाड़ से भैरव मंदिर तक किये जाने की मांग की है। ऐसा न होने पर धाम के पुजारियों ने उग्र आंदोलन का ऐलान किया है। श्री पान्डेय ने बताया कि इस मसले को लेकर 16 अप्रैल को भैरव मंदिर में पुजारियों की बैठक आहूत की गई है।

इधर हिजामं ने शासन के इस फैसले का स्वागत किया है। इस बावत हिजामं की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा तीर्थ स्थलों का विकास करने व पर्यटन को बढ़ावा देने से राज्य का चहुंमुखी विकास होगा। वक्ताओं ने पूर्णागिरि मेले में नवरात्रों के दौरान मांस की दुकानों को पूर्णतया बन्द कराने की मांग को लेकर एसडीएम जीवन सिंह नगन्याल को ज्ञापन भी दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिजामं के जिलाध्यक्ष कमल पन्त व संचालन जिला मंत्री रमेश बाल्मीकि ने किया।
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पर्यटन विकास में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण

फाटा (रुद्रप्रयाग)। सीमांत ग्राम पंचायत व पर्यटक गांव त्रियुगीनारायण में समर फाउंडेशन ट्रस्ट नई दिल्ली ने उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन विकास पर चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया गया।

उत्तराखंड के गांवों में महिलाओं को पर्यटन संबंधी जानकारियां देते हुए पर्यटन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के उद्देश्य से समर फाउंडेशन ट्रस्ट नई दिल्ली ने त्रियुगीनारायण में शुरू किए गए चार दिवसीय कार्यशाला में महिलाओं को ग्रामीण क्षेत्र में पर्यटन का लाभ विशेष रूप से दिए जाने जोर दिया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी एमएस कुटियाल ने कहा कि इस क्षेत्र में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं है तथा इस कार्य में फाउंडेशन की पहल मील का पत्थर साबित होगी। महिलाओं को ऐसे कार्यक्रमों में अधिकाधिक प्रतिभाग करना चाहिए ताकि वह जागरूक होने के साथ अधिक से अधिक जानकारी हासिल कर सकें। पर्यटन अधिकारी सीमा नौटियाल व होली हिमालय संस्था की श्रीमती लता बिष्ट ने प्रशिक्षणार्थियों को समर फाउंडेशन के इस प्रशिक्षण पर ध्यान देते हुए उसे पूर्ण सहयोग देने का आह्वान किया। कार्यक्रम परियोजना निदेशक फारुख अहमद व ट्रस्ट शोध अधिकारी अवनीत कुमार ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के साथ ही महिलाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध कराना है। साथ ही परियोजना में स्वयं सहायता समूह को वरीयता दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस मौके पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व कई महिलाएं उपस्थित थी।
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Online पंकज सिंह महर

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नवरात्रों की तैयारियां जारी, मंदिरों में आकर्षक सजावट

सितारगंज(ऊधमसिंहनगर)। नवरात्रि के चलते नगर के सभी मंदिर आकर्षक तरीके से सजाये गये है। नवरात्रि के उपलक्ष्य में मंदिरों में भजन-कीर्तन कर प्रभु का गुणगान किया जायेगा। कार्यक्रमों की तैयारी के चलते रविवार को भी मंदिरों में काफी चहल-पहल रही।

यूं तो मंदिरों में श्रद्घालु पूजा अर्चना के लिए जाते ही रहते है लेकिन नवरात्र में पूजा का विशेष महत्व है। तराई में नवरात्र पर विशेष तौर से पूजा अर्चना की जाती है। सोमवार से नवरात्रि प्रारंभ होने के चलते वैसे तो सभी मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम रखे गये है लेकिन देवी मां के मंदिरों को खास तौर से सजाया है। नगर के श्री सनातन धर्म मंदिर, दुर्गा ज्योतिपीठ, गणेश मंदिर, रामेश्वरम शिव शक्ति मंदिर, भूमियादेवी मंदिर, मौनी बाबा मंदिर, शिव मंदिर चिन्तीमजरा आदि में धार्मिक कार्यक्रम होने है।

मान्यता है कि जो नवरात्रि के व्रत रखकर देवी मां की पूजा करता है उससे देवी प्रसन्न रहती है और वह भक्तों को हमेशा खुश रखती है। माना जाता है कि विधि विधान से नवरात्रि की पूजा करने वालों के घर में सुख समृद्घि आती है व आपदायें दूर रहती है। नवरात्र के दौरान मंदिरों में भजन-कीर्तन, यज्ञ, श्रीमद भागवत कथा आदि का आयोजन किया जाता है। नवरात्रि पर भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक भी करते है। इस दौरान नौ दिन तक उपवास रख कन्याओं को भोजन करा यथोचित भेंट देकर व्रत का उद्यापन किया जाता है।
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Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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Mahar Ji good information.

नवरात्रों की तैयारियां जारी, मंदिरों में आकर्षक सजावट

सितारगंज(ऊधमसिंहनगर)। नवरात्रि के चलते नगर के सभी मंदिर आकर्षक तरीके से सजाये गये है। नवरात्रि के उपलक्ष्य में मंदिरों में भजन-कीर्तन कर प्रभु का गुणगान किया जायेगा। कार्यक्रमों की तैयारी के चलते रविवार को भी मंदिरों में काफी चहल-पहल रही।

यूं तो मंदिरों में श्रद्घालु पूजा अर्चना के लिए जाते ही रहते है लेकिन नवरात्र में पूजा का विशेष महत्व है। तराई में नवरात्र पर विशेष तौर से पूजा अर्चना की जाती है। सोमवार से नवरात्रि प्रारंभ होने के चलते वैसे तो सभी मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम रखे गये है लेकिन देवी मां के मंदिरों को खास तौर से सजाया है। नगर के श्री सनातन धर्म मंदिर, दुर्गा ज्योतिपीठ, गणेश मंदिर, रामेश्वरम शिव शक्ति मंदिर, भूमियादेवी मंदिर, मौनी बाबा मंदिर, शिव मंदिर चिन्तीमजरा आदि में धार्मिक कार्यक्रम होने है।

मान्यता है कि जो नवरात्रि के व्रत रखकर देवी मां की पूजा करता है उससे देवी प्रसन्न रहती है और वह भक्तों को हमेशा खुश रखती है। माना जाता है कि विधि विधान से नवरात्रि की पूजा करने वालों के घर में सुख समृद्घि आती है व आपदायें दूर रहती है। नवरात्र के दौरान मंदिरों में भजन-कीर्तन, यज्ञ, श्रीमद भागवत कथा आदि का आयोजन किया जाता है। नवरात्रि पर भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक भी करते है। इस दौरान नौ दिन तक उपवास रख कन्याओं को भोजन करा यथोचित भेंट देकर व्रत का उद्यापन किया जाता है।


« Last Edit: April 08, 2008, 12:22:08 PM by H. Pant »
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!