Author Topic: Details Of Tourist Places - उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का विवरण  (Read 4211 times)

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Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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Dosto,

We will provide you here a very good details about various famous tourist destination of Uttarakhand.

M S Mehta
« Last Edit: September 05, 2009, 10:33:54 AM by हिमांशु पाठक »
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

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Re: POPULAR TOURIST DESTINATION OF UTTARAKHAND WITH DETAILS !!!!
« Reply #1 on: October 12, 2007, 03:35:38 PM »

GOPESHWAR


गोपेश्वर का प्राचीन शहर, कत्यूरी राजाओं की वास्तुकला-कौशल के सर्वोत्तम उदाहरण गोपीनाथ मन्दिर की विशालता के लिये प्रसिद्ध है। यह वैष्णवों एवं शैवों का एक पवित्र धार्मिक मिलन स्थान भी है, क्योंकि इस पवित्र मन्दिर में दोनों देवताओं की पूजा होती है। पर इससे भी अधिक गोपेश्वर वह स्थान है, जहां गढ़वाल के लोगों ने विश्व-प्रसिद्ध चिपको आन्दोलन के दौरान अद्भुत प्रयासों द्वारा अपने परम्परागत अधिकारों एवं हिमालय के पर्यावरण एवं वातावरण की सुरक्षा के लिये अपनी आवाज को बुलंद किया।

सरकारी ठहरने की व्यवस्था (वन, पीडब्ल्यूडी, आदि)

नाम : पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस
पता : गोपेश्वर
सम्पर्क व्यक्ति : चौकीदार
स्थापना : वर्ष 1971 में पीडब्ल्यूडी द्वारा
बुकिंग करवाने का तरीका : जिला मजिस्ट्रेट, गोपेश्वर की अनुमति से।
बुकिंग के लिये अधिकृत : जिला मजिस्ट्रेट
कमरे : 3 सुइट्स
 
टैरिफ : कार्यालय के कार्य हेतु राज्य सरकार के कर्मियों के लिये 10 रूपये
कार्यालय के कार्य हेतु राज्य सरकार के केंद्रीय कर्मियों के लिये 40 रूपये
व्यक्तिगत उपयोग हेतु सरकारी कर्मचारियों तथा निजी व्यक्तिगत के लिये 120 रूपये।
 
सुविधाएं : बाथरूम सहित, पार्किंग, गर्म व ठंडा पानी
भुगतान की विधि : नकद
 
नाम : गढ़वाल मंडल विकास निगम लिमिटेड, गोपेश्वर
दूरभाष : 01372-252468
सम्पर्क व्यक्ति : मुख्य प्रबंधक
दिशा : बस स्टेण्ड के बगल में
स्थापना : वर्ष 1982 में श्री वी पी कंडोमी द्वारा
बुकिंग का तरीका : लॉग ऑन करें- www.gmvnl.com/newgmvn/touristbunglows/ या ऋषिकेश में जीएमवीएन यात्रा कार्यालय से सम्पर्क करें।
 
बुकिंग के लिये अधिकृत : उप-प्रबंधक, पर्यटन, जीएमवीएन, यात्रा कार्यालय, हरिद्वार बाई पास रोड, ऋषिकेश। मोबाइल-09412075047
चेक-इन : किसी भी समय
चेक-आउट : 12 बजे दोपहर
 
उपलब्ध कमरे : प्रकार: डबल बेड
संख्या: 8
टैरिफ (ऑफ सीजन में किराया): रूपये 450
टैरिफ (सीजन में किराया): रूपये 700
 
सुविधाएं : बाथरूम सहित, पार्किंग, गर्म/ठंडा पानी, कमरे में टीवी
भुगतान की विधि : नकद
 







 

   
« Last Edit: October 12, 2007, 03:38:38 PM by M S Mehta »
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

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Re: POPULAR TOURIST DESTINATION OF UTTARAKHAND WITH DETAILS !!!!
« Reply #2 on: October 12, 2007, 03:41:50 PM »

GAUCHAR

बद्रीनाथ के मार्ग पर स्थित एक छोटा शहर गौचर, अपने ऐतिहासिक व्यापार मेला के लिये प्रसिद्ध है। यह उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के सर्वाधिक बड़े समतल भूमिखण्डों में से एक पर अवस्थित है। यह एक लाभदायक भौगोलिक स्थिति है जिसने प्राचीन समय में इसका मान बढ़ाया है और भविष्य में भी विकास में मदद मिलेगी। यहां बन रहा हवाई पट्टी गौचर को विकास की ओर अग्रसर करेगा जो अपने आप में एक पर्यटकों के लिये अलौकिक आकर्षण है। अगर सब कुछ गौचर के मास्टर प्लान 2021 के अनुसार हो तो शहर का भविष्य वास्तव में उज्ज्वल है।

पूलिस स्टेशन

EMERGENCY

नाम : पुलिस चौकी
पता : गौचर
दूरभाष : 01363-240622
सम्पर्क व्यक्ति : सब इंस्पेक्टर
दिशा : मेन रोड पर
स्थापना : सरकार द्वारा
समय : 24 घंटे
हेल्पलाइन नम्बर (अगर कोई हों) : 01363-240622


स्थानीय आकर्षण (पार्क, बगीचा, आदि)

नाम : शिवालय पार्क
पता : पनाई, गौचर
सम्पर्क व्यक्ति : राजीव चौहान, कनिष्ठ अभियंता (नगर पंचायत)
दिशा : शिव मंदिर के नजदीक
स्थापना : वर्ष 2007 में नगर पंचायत द्वारा
लोकप्रियता का कारण : पार्क का शिव मंदिर से समीपता तथा नीचे खेतों का सुंदर दृश्य।
पारम्परिक/
ऐतिहासिक महत्त्व : हाल ही में नगर पंचायत द्वारा 
 

 
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« Reply #3 on: October 12, 2007, 03:44:02 PM »
जोशीमठ

जोशीमठ ही वह जगह है जहां 8वीं सदी में धर्मसुधारक आदि शंकराचार्य को ज्ञान प्राप्त हुआ और बद्रीनाथ मंदिर तथा देश के विभिन्न कोनों में तीन और मठों की स्थापना से पहले यहीं उन्होंने प्रथम मठ की स्थापना की। जाड़े के समय इस शहर में बद्रीनाथ की गद्दी विराजित होती है जहां नरसिंह के सुंदर एवं पुराने मंदिर में इसकी पूजा की जाती है। बद्रीनाथ, औली तथा नीति घाटी के सान्निध्य के कारण जोशीमठ एक महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल बन गया है तथा अध्यात्म एवं साहसिकता का इसका मिश्रण यात्रियों के लिए वर्षभर उत्तेजना स्थल बना रहता है।


पूलिस स्टेशन/ अग्नि शामक

नाम : कोतवाली
पता : जोशीमठ
दूरभाष : 01389-222103
सम्पर्क व्यक्ति : थानाध्यक्ष
स्थापित : वर्ष 1972 में सरकार द्वारा
दिशा : पुलिस थाना अंग्रेजों के समय का, कोतवाली वर्ष 1991 में स्थापित
समय : 24 घंटे
हेल्पलाइन नंबर  : 09411112858

विशेष मंतव्य : कोतवाली के अधीन पांच चौकियां जोशीमठ, हेलांग, पांडुकेश्वर, सुसाईलोटा एवं गोविंद घाट हैं, जो वर्ष में 12 महीने कार्यरत रहते हैं। कोतवाली का प्रारंभिक कार्य बद्रीनाथ के सहयोग से जोशीमठ के प्रवेश प्रणाली की व्यवस्था करना, मौसम में यात्रियों की सहायता करना तथा दुर्घटना एवं आपदाओं में बचाव कार्य करना है।
क्लिनिक /डॉक्टर

 नाम  : डॉ डी एस परमार, बीएससी, बीएएमएस
पता  : अपर बाजार, बद्रीनाथ रोड, जोशीमठ
दूरभाष  : 01389-222685 
सेवारत  : 2004
विशिष्टता  : फिजिशियन
समय  : प्रातः 9 बजे से शांय 8 बजे
उपलब्ध सुविधाएं : फिजिशयन तथा केमिस्ट
 


 

 
       नाम : अग्निशामक/आपात सेवा
पता : जोशीमठ
दूरभाष : 01389-222103
 
सम्पर्क व्यक्ति : थानाध्यक्ष
 
स्थापित : वर्ष 1977 में सरकार द्वारा
समय : 24 घंटे
हेल्पलाइन नंबर  : नहीं
विशेष : अग्निशामक स्टेशन में दो बड़े एवं दो छोटे टैंकर हैं।
 
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Offline Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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« Reply #4 on: October 12, 2007, 03:44:31 PM »
Good work Mehta ji.
91-9810077696

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Re: POPULAR TOURIST DESTINATION OF UTTARAKHAND WITH DETAILS !!!!
« Reply #5 on: October 12, 2007, 03:53:02 PM »
कर्णप्रयाग

पिंडर नदी के साथ अलकनंदा के संगम पर कर्णप्रयाग, अलकनंदा नदी पर तीसरा प्रयाग है। इसका नाम महाभारत के एक प्रमुख पात्र कर्ण के नाम पर है, जो अपनी बहादुरी एवं उदारता के लिये प्रसिद्घ था। यह शहर एक मनोरम स्थान है जो जाड़े में शांत तथा यात्रा मौसम के दौरान गतिविधियों से भरपूर रहता है जब यात्रियों एवं तीर्थयात्रियों का पड़ाव या ठहराव यहां होता है। यहां प्राचीन एवं प्रसिद्ध उमा देवी का मंदिर है। यहां से आप नौटी गांव भी जा सकते है जहां से उत्तराखंड की सबसे पौराणिक यात्रा -- नंद राज जाट -- हर 12 वर्ष पर आरंभ होती है।

पूलिस स्टेशन

नाम : पुलिस थाना
पता : कर्णप्रयाग
दूरभाष : 01363-244203
सम्पर्क व्यक्ति : एसएचओ
स्थापना : वर्ष 1972 में सरकार द्वारा
समय : 24 घंटे
हेल्पलाइन नंबर
(अगर को हों) : नहीं
विशेष बातें : इस थाना के अधीन तीन स्थायी तथा चार अस्थायी (यात्रा सीजन के लिये) चौकी हैं। वे अग्नि विभाग भी संभालते हैं जहां एक अग्निशामक है।
 


 

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« Reply #6 on: October 12, 2007, 03:58:11 PM »
नंदप्रयाग


धार्मिक पंच प्रयागों में से दूसरा नंदप्रयाग अलकनंदा नदी पर वह जगह है जहां अलकनंदा एवं नंदाकिनी नदियों का मिलन होता है। ऐतिहासिक रूप से शहर का महत्व इस बात में है कि यह बद्रीनाथ मंदिर जाते तीर्थयात्रियों का पड़ाव स्थान होता है साथ ही यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक स्थल भी है। वर्ष 1803 में आई बाढ़, शहर का सब कुछ बहा ले गयी जिसे एक ऊंची जगह पर पुनर्स्थापित किया गया। नंदप्रयाग का महत्व इस तथ्य से भी है यह स्वाधीनता संग्राम के दौरान ब्रिटिश शासन के विरोध का स्थानीय केंद्र रहा था। यहां के सपूत अनुसूया प्रसाद बहुगुणा का योगदान इसमें तथा कुली बेगार प्रथा की समाप्ति में, सबको हमेशा याद रहेगा।
 
ऐतिहासिक महत्व के स्थान

 

 
       नाम : हिलारी बिंदु
पता : नंदप्रयाग 
दूरभाष : नंदप्रयाग 
सम्पर्क व्यक्ति : प्रकाश फोनिया, कार्यपालक अधिकारी, नगर पंचायत 
दिशा : संगम के समीप
 
विशेष रूचि के मंतव्य : नगर पंचायत ने उस स्थान को चिह्नित कर दिया है जहां सर एडमंड हिलारी ने महानगर से आकाश के अभियान को छोड़ा था। कहा जाता है कि भगवान बद्रीनाथ ने सपने में आकर उन्हें वह अभियान छोड़ने का आदेश दिया था। नगर पंचायत द्वारा इस क्षेत्र के विकास के लिये 20 लाख रूपये खर्च करने की एक योजना है ताकि रीवर राफ्टिंग (नदी-बेड़ायन) की शुरूआत की जा सके। इस स्थान का उपयोग अभी सैनिक कर्मचारियों द्वारा तथा विदेशियों द्वारा नीचे ऋषिकेश तक बेड़ायन अभियान के लिये किया जाता है। फिर भी, यह कार्य-कलाप व्यापारिक स्तर पर नहीं किया जाता है।
 

 
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Re: POPULAR TOURIST DESTINATION OF UTTARAKHAND WITH DETAILS !!!!
« Reply #7 on: October 12, 2007, 04:02:23 PM »


रूद्रप्रयाग

रूद्रप्रयाग उत्तराखण्ड के सर्वाधिक नए जिले रूद्रप्रयाग का मुख्यालय है जो कठोर एवं दुर्गम क्षेत्रों को पार करते हुए केदारनाथ एवं बद्रीनाथ मंदिर की ओर जाते हुए प्राचीन तीर्थयात्रियों के लिये विश्रामस्थल रहा है। अलकनंदा एवं मंदाकिनी का संगम अलंकनंदा नदी पर बसे पवित्र पांच प्रयागों में से एक है। फिर भी यह केवल एक संगम ही नहीं है बल्कि भगवान शिव एवं भगवान विष्णु का मिलनस्थल भी है क्योंकि मंदाकिनी केदारनाथ पहाड़ से निकलकर भगवान शिव का प्रतिनिधित्व करती है तों अलकनंदा भगवान विष्णु का। यह एवं कई श्रद्धालु मंदिर रूद्रप्रयाग को पवित्र स्थान बनाते है।
 
ऐतिहासिक महत्व
 :
 रूद्रप्रयाग का संगम अद्भुत इस माने में है कि इसके चारों ओर दो विशाल पथरीली घाटियां है जो संगम पर एक होने के लिये तेजी से नीचे आती मंदाकिनी एवं अलकनंदा द्वारा निर्मित हैं। एक साथ मिलने से पहले कीचड़युक्त अलकनंदा के जल से मंदाकिनी का हरा-गहरा जल अलग होता है। आलंकारिक रूप से यह केवल दो नदियों का मात्र एक संगम ही नहीं है बल्कि यही वह जगह है जहां भगवान शिव एवं भगवान विष्णु मिलते हैं क्योंकि केदारनाथ से आती मंदाकिनी भगवान शिव का प्रतिनिधित्व करती है तो बद्रीनाथ पर्वत से निकली अलकनंदा भगवान विष्णु का।

घाट पर बैठकर आप घंटों गुजार सकते है या फिर संगम की सीढ़ियों पर जा सकते हैं अन्य जगहों की तरह जल की धारा तीव्र नहीं होती है। प्रवाहित जल की आवाज सुनते हुए सच में आपको शांति मिलती है।
प्रत्येक दिन शाम को होने वाली गंगा आरती देखने योग्य है।
 
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« Reply #8 on: October 12, 2007, 04:04:27 PM »

बड़कोट


यमुना नदी के किनारे उत्तरकाशी जिले के रवाँई घाटी में बड़कोट का सुंदर शहर अवस्थित है। अपनी निर्जनता के कारण शेष गढ़वाल से कटे रवाँई के लोग ऐसी संस्कृति में पले हैं जो शेष गढ़वाल की संस्कृति के समान होते हुए भी भिन्न है तथा यही कारण है कि यह क्षेत्र अत्याधिक रूचि पूर्ण है। बड़कोट बंदरपूँछ श्रृंखला के अद्भुत दृश्य को गौरवांवित भी करता है जो प्राकृतिक सौंदर्य की संपदा से परिपूर्ण है। यमुनोत्री धाम के रास्ते पर अवस्थिति के कारण इसका महत्त्व और भी बढ़ जाता है।
परंपरागत/
ऐतिहासिक महत्व : मंदिर में शिवलिंग तथा 11 रूद्र स्वंभू है। यह मालूम नहीं है कि प्राचीन काल में कब उन पूजित प्रतिमाओं की स्थापना हुई। भगवान शिव की पूजा यहां चंद्रेश्वर की भांति होती है जो चंद्रमा को अपनी जटाओं पर धारण किये रहते हैं। इसका संबंध समुद्र मंथन के रहस्य से है जब समुद्र का मंथन हुआ तो उसमें से विष के अलावा 14 रत्नों का भी उदय हुआ जिनमें से चंद्रमा भी एक था।
 
विशेष रूचि के मंतव्य : वर्ष 2004 में मंदिर के ढांचे का पुनरूद्धार हुआ जिसे जौनसारी/हिमाचली लकड़ियों एवं पत्थरों से पैगोडा श्रेणी कि शैली में निर्मित किया गया।


« Last Edit: October 31, 2007, 04:05:37 PM by rajesh.joshee »
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« Reply #9 on: October 12, 2007, 04:06:13 PM »
उत्तरकाशी
उत्तरकाशी एक ऐसा शहर है जिसके हर पहलु को देखने के लिये उत्सुक होगें। गंगोत्री से सान्निध्य के कारण यह एक महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। मूल रूप से उत्तरकाशी अपने आप में एक मंदिरों का शहर है और उससे भी अधिक यह भगवान शिव की नगरी है। यहां एक कहावत है कि उत्तरकाशी में जितने कंकड़ हैं, उतने ही शंकर हैं। शहर के 32 मंदिरों में से कई मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं। उत्तरकाशी में आध्यात्म की जड़े गहरी एवं प्राचीन है। यहां की बड़ी संख्या के मंदिरों में, अपने पसंदीदा देवों के दर्शन के लिये हजारों-हजार भक्त प्रतिदिन पंक्तिबद्ध रहते हैं, प्रत्येक दिशा से हिन्दी सिनेमा की धुनपर भजन का शोर रहता है, घाटों पर अपने शरीर एवं आत्मा को शुद्ध करने के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है तथा साधुओं एवं आस्तिकों के रहने के लिये यहां कई आश्रम हैं।
 सामुदायिक भवन/ सभागार/ बारात घर
 पूजा के स्थान
 ऐतिहासिक महत्व के स्थान
 पार्क
 Directory Search
 
     
 
 



ऐतिहासिक महत्व के स्थान

 

 
       नाम  : हिमालयन म्यूजियम
पता  : नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउनटेनरिंग, उत्तरकाशी
ई-मेल : nimutk2004@sancharnet.in
टेलीफोन : 01374-222123 / 224663
ऐतिहासिक महत्व : नेहरु पवर्तारोहण संस्थान परिसर में अपने ढंग का अकेला गढ़वाल में यह म्युजियम है, जिसमें पर्वतारोहण उपकरण, विभिन्न, अभियानों का इतिहास, आरोहियों के चित्र, चोहियों के चित्र आदि प्रदर्शित हैं।
 


 


« Last Edit: October 31, 2007, 04:07:19 PM by rajesh.joshee »
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« Reply #10 on: October 12, 2007, 04:08:09 PM »

चंबा

मसूरी, ऋषिकेश, टिहरी, नई टिहरी एवं धरासू से आने वाली सड़कों के चौराहे पर स्थित चंबा मानो टिहरी जिले का हृदय है। इस चौराहे से आगंतुक टिहरी के किसी कोने और चार धामों को आसानी से पहुंच पाते हैं। चंबा की प्राकृतिक मनोहरता, खासकर सूर्यास्त तथा बंदरपूंछ और भागीरथी 1,2,3 जैसे पर्वतों के दृश्य, दिल लुभा लेती है। यहां के सेबों के बागानों और फूलों से महकते वातावरण के बीच आप बेशक मानसिक और शारीरिक शांति पाएगें।


पूजा के स्थल

श्रीबागेश्वर महादेव मंदिर

भगवान शिव की पूजा बाघ की छाल में लिपटे बागेश्वर की तरह होती है। यहां का लिंगम स्वयंभू है एवं प्राचीन काल से ही स्थापित है। मूलत; लिंगम का पता घने जंगल में चला जो इस जगह था। चरवाहे अपने मवेशियों को यहां चराने लाया करते थे और उनमें से एक को महसूस हुआ कि एक गाय कभी भी दूध नहीं देती। एक दिन उसने गाय का पीछा किया और देखा कि उस गाय ने अपना दूध उस शिवलिंग पर बहा दिया। उसने अपनी कुल्हाड़ी से उस शिवलिंग को तोड़ने का प्रयास किया। इसका एक अंश टूटकर कुछ दूर एक गांव में जा गिरा जहां आज भी उसकी पूजा होती है।
 
 
विशेष मंतव्य
 :
 यहां की पूजित प्रतिभा कोठारी वंश के कुल देवता हैं जो पास के एक गांव के वासी हैं, और पीड़ियों पहले यहां आकर बस गये थे। मंदिर की देखभाल गांव के बुजुर्गों की एक समिति करती है। समिति द्वारा एकत्रित कोष से भी हाल ही में इस मंदिर का पुनरूद्धार हुआ।
 
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« Reply #11 on: October 12, 2007, 04:10:02 PM »

देवप्रयाग

भारत और नेपाल के सर्वाधिक दिव्य एवं धार्मिक स्थानों में से एक माना जाने वाला देवप्रयाग पौराणिक विरासत का धनी है तथा इस पावन स्थल से कई देवी-देवता संबद्ध रखते हैं। यही वह जगह है जहां भारत की नदियों में सर्वाधिक पावन नदी, गंगा का उद्बव भागीरथी नदी एवं अलकनंदा नदी के संगम से हुआ और यह तथ्य देवप्रयाग को वह पवित्रता प्रदान करता है जो अन्य किसी स्थान को प्राप्त नहीं है। अलकनंदा पर पांच संगमों (पंच प्रयाग) में से देवप्रयाग को सर्वाधिक धार्मिक कहा गया है। स्कंद पुराण के केदारखंड में देवप्रयाग पर 11 अध्याय हैं।

ऐतिहासिक महत्व के स्थान

देवप्रयाग, भारत तथा नेपाल के 108 अत्यंत दिव्य स्थानों में से एक माना जाता है तथा पौराणिक तौर पर इस समृद्ध पवित्र स्थल से कई देवी-देवता जुड़े हैं। यही वह स्थान है जहां भारत के पवित्र नदियों में सबसे पवित्र गंगा यहां भागीरथी तथा अलकनंदा का संगम है और यही तथ्य देवप्रयाग को अधिकाधिक पवित्र बनाती है जो देश के बहुत ही कम स्थान दावा कर सकते हैं। इन्हीं कारणों से भागीरथी के पांच संगमों (पंच-प्रयाग) में देवप्रयाग को सबसे पवित्र माना जाता है। केदार खंड के स्कंद पुराण में देवप्रयाग को 11 अध्याय समर्पित हैं। भागीरथी की तेज गति से प्रवाहित हल्की मटमैली भागीरथी का जल यहीं स्वच्छ हरे रंगों में अलकनंदा की बहती जल से मिलकर पवित्र नदी गंगा बनती हैं।

संगम पर क्रम में बने कई सीढ़ियों के साथ बने घाट संगम तक जाती है। रघुनाथ मंदिर में पूजा से पहले आवश्यक है कि भक्त इस संगम पर स्नान करें।

अनंत काल से यह संगम साधुओं तथा संतों के लिये तपस्या का स्थान रहा है।
 
 
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« Reply #12 on: October 12, 2007, 04:12:54 PM »
कीर्तिनगर

कीर्तिनगर एक छोटा पर महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसने उस आंदोलन को देखा है जिसके कारणवश टिहरी गढ़वाल का भारतीय संघ में विलय हुआ, जब नागेन्द्र सकलानी तथा मोलू राम जैसे स्वतंत्रता सेनानियों को राजा के सैनिकों ने गोली से मार डाला। प्राय: भूल से श्रीनगर का विस्तार मान लिया जाने वाला, यह शहर धार्मिक नदी अलकनंदा के विपरीत किनारे पर बसा है तथा इसके आसपास कुछ प्राचीन एवं रूचिकर स्थान हैं। यह शहर टिहरी जिला प्रशासन की चौकी भी है जहां एक छोटा पर व्यस्त बाजार है जो कार्यकलापों का केंद्र भी है।

ऐतिहासिक महत्त्व के स्थान

कीर्तिनगर में नहीं है, निकटतम स्थान है: श्रीनगर
 
 
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Re: POPULAR TOURIST DESTINATION OF UTTARAKHAND WITH DETAILS !!!!
« Reply #13 on: October 12, 2007, 04:14:35 PM »
मुनि की रेती

मुनि की रेती - पवित्र चार धाम तीर्थयात्रा का एक समय में प्रवेश द्वार - आज गलतीवश ऋषिकेश का एक भाग समझा जाता है। लेकिन पवित्र गंगा के किनारे तथा हिमालय की तलहटी में अवस्थित इस छोटे से शहर की एक खास पहचान है। मुनि की रेती भारत के योग, आध्यात्म तथा दर्शन को जानने के उत्सुक लोगों का केन्द्र है, यहां कई आश्रम हैं जहां स्थानीय आबादी के 80 प्रतिशत लोगों को रोजगार मिलता है और यह जानकर आश्चर्य नहीं होगा कि यह विश्व का योग केन्द्र है। अनुभवों के खुशनुमा माहौल में प्राचीन मंदिरों, पवित्र पौराणिक घटना के कारण जाने वाली स्थानों, तथा एक सचमुच आध्यात्मिक स्वातंत्र्य का एक ठोस वास्तविक अहसास - और वो भी आरामदायक आधुनिक होटलों, रेस्टोरेन्ट तथा भीड़भाड़ वाले बाजारों में - उपलब्ध है। यहां इजराइली तथा इटालियन व्यंजनों के साथ शुद्ध शाकाहारी भोजन मिलता है, भजन-कीर्तन एंव आरती के साथ टेकनो संगीत, एक ओर पर्यटक गंगा में राफ्टिंग करते हैं और दुसरी और भक्त इसमें स्नान करते हैं; इनमें से जो भी आप ढुंढ रहे हैं, मुनि की रेती में ही आपको मिल जायेगा।
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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Re: POPULAR TOURIST DESTINATION OF UTTARAKHAND WITH DETAILS !!!!
« Reply #14 on: October 12, 2007, 04:16:36 PM »
नरेन्द्र नगर स्थित

यमुनोत्री एवं गंगोत्री के रास्ते पर ऋषिकेश से 16 किलोमीटर से भी कम दूरी पर निचले हिमालय क्षेत्र में नरेन्द्र नगर स्थित है, जिसने पहले के रजवाड़ों से संबद्ध पुराने समय की मनोहरता को बरकरार रखा है। यह वर्ष 1919 में टिहरी रियासत की राजधानी बना जब राजा नरेन्द्र शाह ने टिहरी से प्रशासनिक केन्द्र हटा लेने का निर्णय किया। वर्ष 1949 में उसके तत्कालीन राजा ने नरेन्द्र नगर को स्वाधीन भारत में विलय कर लिया। वर्ष 1989 तक यह शहर टिहरी गढ़वाल जिले का मुख्यालय था जब प्रशासनिक केंद्र को वापस टिहरी लाया गया। आज यह एक शांतिदायक शहर प्रतिष्ठा को प्रवाहित करता है तथा अपने अद्भुत सूर्यास्त, दूनघाटी के मनोरम दृश्य, गंगा तथा हिमालय क्षेत्र के पुराने राजमहल में स्थित आनंदा एन द हिमालया रिसार्ट एवं वार्षिक रूप से आयोजित कुंजापुरी मेला के लिये प्रसिद्ध है।

ऐतिहासिक महत्व के स्थान

नाम : नंदी बैल
दिशा : प्रमुख सड़क पर, मुख्य बाजार के विपरित
परंपरागत/
ऐतिहासिक महत्व : प्रस्तर-प्रतिमा का गठन प्रसिद्ध गढ़वाली शिल्पकार अवतार सिंह पंवार द्वारा वर्ष 1960 में किया गया तथा नगर पालिका द्वारा उदघाटित हुआ।
विशेष मंतव्य : उत्तरी भारत में नंदी बैल की यह सर्वाधिक बड़ी प्रस्तर-प्रतिमा है (भगवान शिव की सवारी)



"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!