Author Topic: Shri 1008 Mool Narayan Story - भगवान् मूल नारायण (नंदा देवी के भतीजे) की कथा  (Read 8976 times)

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Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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[size=10pt]दशौली गाव मे भगवान् मूल नारायण का एक मन्दिर एव प्रसिद्ध धर्मशाला ( धरमशिला )

इस मन्दिर परिसर मे पवन स्फटिक शिला है जी पवित्र धरमशिला के नाम से प्रसिद्ध है ! कहा जाता है कि स्फटिक पाषाण शिला के पास देवताओ कि सभा बैठती थी तथा जनता के दुःख दर्द का निवारण होता था ! यही से पाँच किमी तक चारो ओर कि लीग सीक खाने और प्रजा के दुःख निवारण करने की शक्ति मूल नारायण जी मे निहिती थी !

जब आज भी यहाँ वारिश नही होते है तो लोग इस शिला मे जल चदाते है !
[/size]
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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इस पर भगवान् मूल नारायण जी एव उनके पुत्र बजैण जी एव नौलिग़ जी की इस कथा सा स्मापन यही होता है !

अब मै आपको इन जगहों से जुड़ी अन्य जानकारी एव कुछ फोटोग्राफ भी प्रस्तुत करूँगा

=====================
पर्यटन की दृष्टि से
====================
सबसे पहले कैसे पहुचे शिखर, सनगाड एव भनार, लोती (जारती) एव इस पौराणिक कहानी से जुड़े जगहों पर !

   १ शिखर (मूल नारायण जी का धाम)  जो की बागेश्वर जिले मे आता है!
  २) यह जगह बहुत ही उचाई पर है जिसके चारो और विभिन्न क्षेत्र जैसे  दानपुर, भानर, रीमा, धरमघर पिथोरागढ़ जिले के कुछ गाव. !
 ३)  भानर क्षेत्र तक सड़क सुविधा है
 ४) भनार से शिखर की उचाई करीब 5 तक की है
 ५)  रीमा क्षेत्र से भी यहाँ जाया जा सकता है पर दूर फिर से लगभग ६ से ८ कम
 ६ ) शिखर से सनगाड और भनार एक दूसरे के विपरीत पर लगभग बराबर दूर पर है !
  ७)  सनगाड मे सड़क बन रही है और मन्दिर के करीब तक पहुच चुकी है !
  ८)  शिखर जो की बहुत ऊँचाई पर है यहाँ तक सड़क सुबिधा के लिए कार्य चल रहा है !
 ९)   शिखर पर्यटन की दृष्टि से सबसे अच्छा इलाका है और यहाँ से सारा कुमोँओ एव गडवाल दिखायी देता है !
१०)  यहाँ पर कुछ दुर्लभ पेड़ पौधे भी मिलते है !

मेरे इस फोटो मे शिखर का द्रश्य


« Last Edit: June 02, 2008, 04:23:52 PM by M S Mehta »
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

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This is the photo of Mool Narayan Bhagwan Temple surrounding area my village Jarti, Bageshwar District.

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DEVOTEES PERFORMING POOJA IN MOOL NARAYAN BHAGWAN TEMPLE JARTI, DISTRICT BAGESHWAR, UTTARAKHAND

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Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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THIS IS ENTRACE GATE PHOTO OF MOOL ARAYAN JI TEMPLE AT JARTI.




THIS IS THE PHOTO INSIDE THE TEMPLE.

"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Offline sanjupahari

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Thanks a lot mehta jew,,,awesome info, extra-awesome pics indeed...jai hoo tumeri.
sanjupahari...A THETH PAHARI GUY frm MANAN
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JAI PAHAD>>>>JAI GOLU<<<<<JAI BADRIVISHAL

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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मुझे एक बहुत पुरानी .. चाचरी याद आ रही है जो की मूल नारायण जी पर बनाया गया है !

शिखर भनार मासी क फूल
देवी चढ़उन मासी क फूल ..

शिखर मे मूल नारायण जी का मन्दिर, भनार मे बजैण जी का मन्दिर... !

मासी एक दुर्लभ फूल मासी का फूल जी कि शिखर जैसे ऊँचे जगह पर मिलता है जिसे धूप बनने मे भी इस्तेमाल किया जाता है !
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Offline Himanshu Pathak

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Mehta jee +1 Karma....

These Places u reffer are very very near to my village...

लुकी छिपी बादवो में चमकी जैसी ज्यून तेरो मुख चमको
तेरा रसीला होठो बे आज मौ जै टपको

Offline pushpa rawat

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mehta ji golu devta ki kathayein bhi shaamil kijiye plz.
Jai golu devta.........

Offline Himanshu Pathak

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Pushpaa Jee.... Ye Goljyu Ki Khaani ka link hai...
http://www.merapahad.com/forum/index.php/topic,330.0.html

and Yhaa Bhi 1 Brief Story....
http://www.merapahad.com/forum/index.php/topic,84.75.html

mehta ji golu devta ki kathayein bhi shaamil kijiye plz.
Jai golu devta.........




quote : M S Mehta.

Puspa Ji, we have already started this.
« Last Edit: June 05, 2008, 04:03:35 PM by Himanshu Pathak »

लुकी छिपी बादवो में चमकी जैसी ज्यून तेरो मुख चमको
तेरा रसीला होठो बे आज मौ जै टपको

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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भगवान् मूल नारायण जी ने शिखर पर कई बार चमत्कार देखाए है !

एक बार किसी आदमी की कथा (पूजा पाठ) शिखर पर थी लेकिन कुछ लोग वहाँ सब्जी घर से ले आना भूल गए ! अब कहाँ जाए शिखर जैसी जगह से दुकान तो बहुत दूर यह बिल्कुल असंभव था की ठीक समय पर वहाँ सब्जी उपलब्ध हो लेकिन कुछ लोग शिखर के जंगल की ओर गए उन्होंने ने पाया की वहाँ पर बहुत सारे मूली और एनी सब्जियां उनको मिल गए ! लेकिन दूसरी बार जब गए तो वहाँ उन्हें कुछ भी नही मिला !

यह सब भगवान् मूल नारायण जी का ही चमत्कार था !
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Offline Himanshu Pathak

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अभी २६-२७ मई  को शिखर मे किसी  की कथा थी| उस कथा मे कोई सूतक वाला पहुँच गया था| लोगों ने देखा की जो बीवर से पानी लाते है वो सूख गया है| उसमें पानी की एक बूँद भी नही थी| शिखर मे पास मे  अन्यत्र कही पानी नही है| तो उन लोगो को २-३ की मी नीचे जाकर पानी लाना पडा|

और अगले दिन बीवर मे भरपूर मात्रा मे पानी उपलब्ध था|

लुकी छिपी बादवो में चमकी जैसी ज्यून तेरो मुख चमको
तेरा रसीला होठो बे आज मौ जै टपको

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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भगवान् मूल नारायण जी का एक और चमत्कार

एक बार हमारे गाव की तरफ़ जून के महीने मे काफ़ी देर तक वारीश नही हुए. ! भगवान् मूल नारायण के मन्दिर मे एक यज्ञ का आयोजन हो रहा था !  एक आदमी रोते हुए और नंगे पाव वहां आया और कहने लगा कि इस मन्दिर मे मूल नारायण है कि नही "हम वारिश के बिना बहुत परेशान है और हमारी खेत सूख गए !

वह भगवान् के अस्थितातव को ललकारता रहा ! दूर -२ तक कोई बादल आसमान मे नही थे! देखते -२ शाम को भारी वारिश हो गयी ! यह पूर्ण रूप से भगवान् का चमत्कार था !

दुसरे दिन यह आदमी फिर से मन्दिर आया और भगवान् के धन्यवाद करने लगा परन्तु इस वारिश से भी वह थोड़ा संतुष्ट नही था, उसने कहा " भगवान् देने मे दिया परन्तु थोड़ा कम है" उस दिन फिर से और जोर कि वारिश हो गयी . लोगो के चपल और कई चीजे मन्दिर के वाहर बह कर दूर चली गयी !
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Online पंकज सिंह महर

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    • MERA PAHAD / मेरा पहाड़
श्री त्रिलोक चन्द्र भट्ट द्वारा लिखित "उत्तरांचल के देवालय" में भी इसका वर्णन है, जो आपके सम्मुख प्रस्तुत है-

शिखर मन्दिर-

बागेश्वर-बेरीनाग मार्ग पर धरमघर के लगभग १० कि०मी० की दूरी पर शिखर पर्वत पर भगवान मूलनारायण का प्राचीन मंदिर है। इसी को शिखर मन्दिर भी कहा जाता है, जनश्रुति के अनुसार भगवती नन्दा ने भगवान मूलनारायण से हिमालय में नन्दादेवी की चोटी पर निवास करने का आग्रह किया। उनके आग्रह पर नारायण को वह स्थान पसन्द आ गया। शिखर से कुछ दूरी पर एक गुफा में शीतल जल का स्रोत है, जहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। जनश्रुति के अनुसार एक बार नन्दा देवी इस जल स्रोत को देखने के लिये गई थी। जब वह लौट कर शिखर पर पहुंची तो मूल नारायण अदृश्य हो चुके थे। काफी खोजने के बाद जब उन्हें मूल नारायण नहीं मिले तो उन्होंने रुष्ट होकर श्राप दिया कि आज के बाद न तो हमारी-तुम्हारी मुलाकात होगी और न ही हिमालय में तुम्हारा निवास होगा, तुम यहीं शिखर में ही रहोगे। इसके बाद क्रोधित नन्दा नन्दाघूंघटी वापस चली गई।

     एक अन्य जन्श्रुति है कि मालूशाही की प्रेमिका राजुला का पिता सुनपत शौक अपनी भेड़-बकरियों को लेकर इस पर्वत पर रुका हुआ था। यहा के मनोहारे दृश्य से मोहित सुनपत भगवान के ध्याने में लीन हो गया। इसी अवस्था में उसे दैविक आदेश हुआ कि वह तुरन्त अपने देश लौट जाये। जब उसकी तन्द्रा टूटी तो उसने देखा कि जहां उसकी बकरियों के करबोझे रखे थे, वहां पर अब शिला की आकृति बन गई है और बकरियां गायब हैं। आनन-फानन में वह अपने घर के लिये चल पड़ा, लेकिन घर पहुंच के उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा कि बकरियां उससे पहले ही घर पहुंच गई थी और उनके पीठ पर लदे करबोझे मुल्यवान रत्न और सोने से भरे हुये थे।
       सन १९८१-८२ में जनता के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे भव्य रुप प्रदान कर यहां भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करवाई गई है। इस मंदिर से पुजारी धामी लोग हैं और गौखुरी के पन्त परम्परागत रुप से कथा वाचन करते हैं।
यो नै हुन, ऊ नै हुन! कै बेर, कै नै हुन|
सीर पाणी की वां फुटेली, जां मारुंला लाता|
लश्का कमर बांधा, हिम्मत का साथा.....!

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