Author Topic: Lyrics Of Uttarakhandi Songs - कुमाऊंनी एवं गढ़वाली गीतों के बोल  (Read 16030 times)

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Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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ना बैठ , ना बैठ , बिंडी ना बैठ चरखी मा -2
बोल्युन्न मान मेरो , बिंडी ना बैठ चरखी मा
ना बैठ , ना बैठ , बिंडी ना बैठ चरखी मा

बांजा को अछानो बिंदी , बांजा को अछानो -2
चरखी वालो मेरो भाई जी
तेरु लगदा जिथाणु , बिंदी ना बैठ चरखी मा -2
ना बैठ , ना बैठ , बिंदी ना बैठ चरखी मा

दही की परोठी बिंदी , दही की पारोठी -2
चरखी टूटी जाली बिंदी , तू छे भर i मोटी
बिंदी ना बैठ चरखी ना...............
ना बैठ , ना बैठ , बिंदी ना बैठ चरखी मा
बोल्युन्न मान मेरो , बिंदी ना बैठ चरखी मा

द्याबतों कु भोग बिंदी i, द्येब्तोंकू कु भोग -2
उजिया सरेल तेरो ,
क्या बोलला लोग , बिंदी ना बैठ चरखी मा ना -2
ना बैठ , ना बैठ , बिंदी ना बैठ चरखी मा


रोटी को फफुडो बिंदी , रोटी को फफुडो -2
बिदेशी मुलुक चोरी ,
क्वी नि च अपुनों , बिंदी ना बैठ चरखी मा -2
बोल्युं मान मेरो , बिंदी ना बैठ चरख i मा
ना बैठ चरखी मा
हे ना बैठ चरखी मा ना बैठ चरखी मा
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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देखिये इस सदाबहार गाने के बोल 


स्वर्ग तारा जुनाली रात को सुनालो
तेरी मेरी बात स्वर्ग तारा.....
हाय जुनाली रात, यो जुनाली रात ...

जोड़....

आसमानी जहाज उडो पछिला घूराटा
छेली ले सौरासो जानो, चेलो ले परदेश...

ओह होय .. स्वर्ग तारा जुनाली रात को सुनालो
तेरी मेरी बात स्वर्ग तारा.....

जोड़ ..

धार मा को देवी थाना
दूध ले नवायो ..
तेरो जुठो मे ना खाचियू
माया ले खावायो ..

ओह होय .. स्वर्ग तारा जुनाली रात को सुनालो
तेरी मेरी बात स्वर्ग तारा.....

जोड़ ..

तिमुली को पात सुवा -तिमुली को पात सुवा
भारत आजाद भयो, १२ बजिया रात ..

ओह होय .. स्वर्ग तारा जुनाली रात को सुनालो
तेरी मेरी बात स्वर्ग तारा.....
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Online पंकज सिंह महर

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  • जय भारत! जय उत्तराखण्ड!!
    • MERA PAHAD / मेरा पहाड़
एक गीत है काफी पुराना-


सुण ले मेरी चनुरी-चनारा,
कि भली लागिंछ गोरी फनाराऽऽऽऽऽ

ज्वान देखनी, ते के ज्वान देखनी
चाईंयां रै जानी,

बूढ़ देखनी त है जानी बीमार....

सुण ले मेरी..................।
यो नै हुन, ऊ नै हुन! कै बेर, कै नै हुन|
सीर पाणी की वां फुटेली, जां मारुंला लाता|
लश्का कमर बांधा, हिम्मत का साथा.....!

+91-9412005856

Online हेम पन्त

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    • Myor Pahar
उत्तराखण्ड राज्य निर्माण प्राप्ति के संघर्ष के दौरान लोगों के दिलों में एक आदर्श राज्य का सपना था. राज्य की प्राप्ति के लिये लगभग 40 लोगों ने अपने प्राण न्यौछावर किये. अन्ततः राज्य तो बन गया, लेकिन 7 साल बीतने पर भी आन्दोलनकारियों के सपनों का राज्य एक सपना ही बना हुआ है.शराब के ठेकेदारों, भू माफियाओं और एन.जी ओ. के नाम पर चल रहे करोड़ों के व्यवसाय के बीच आम उत्तराखण्डी मानस ठगा सा महसूस कर रहा है.

सपना देखा गया था ऐसे राज्य का जिसमें चारों ओर खुशहाली हो. समाज के हर वर्ग की अपनी अपेक्षाएं थीं. नरेन्द्र सिंह नेगी जी की इस कविता के माध्यम से समाज के सभी वर्गों की आक्षांकाएं स्पष्ट होती हैं. भगवान से यही प्रार्थना है कि राज्य के नीतिनिर्धारकों के कानों तक नेगी जी का यह गीत पहुँचे, और वो हमारे सपनों का राज्य बनाने के लिये ईमानदारी और सच्ची निष्ठा से काम करें.


बोला भै-बन्धू तुमथैं कनू उत्तराखण्ड चयेणू छ्
हे उत्तराखण्ड्यूँ तुमथैं कनू उत्तराखण्ड चयेणू छ्
जात न पाँत हो, राग न रीस हो
छोटू न बडू हो, भूख न तीस हो
मनख्यूंमा हो मनख्यात, यनूं उत्तराखण्ड चयेणू छ्

बोला बेटि-ब्वारयूँ तुमथैं  कनू उत्तराखण्ड चयेणू छ्
बोला माँ-बैण्यूं तुमथैं  कनू उत्तराखण्ड चयेणू छ्
घास-लखडा हों बोण अपड़ा हों
परदेस क्वी ना जौउ सब्बि दगड़ा हों
जिकुड़ी ना हो उदास, यनूं उत्तराखण्ड चयेणू छ्

बोला बोड़ाजी तुमथैं  कनू उत्तराखण्ड चयेणू छ्
बोला ककाजी तुमथैं  कनू उत्तराखण्ड चयेणू छ्
कूलूमा पाणि हो खेतू हैरयाली हो
बाग-बग्वान-फल फूलूकी डाली हो
मेहनति हों सब्बि लोग, यनूं उत्तराखण्ड चयेणू छ्

बोला भुलुऔं तुमथैं  कनू उत्तराखण्ड चयेणू छ्
बोला नौल्याळू तुमथैं  कनू उत्तराखण्ड चयेणू छ्
शिक्षा हो दिक्षा हो जख रोजगार हो
क्वै भैजी भुला न बैठ्यूं बेकार हो
खाना कमाणा हो लोग यनू उत्तराखण्ड चयेणू छ्

बोला परमुख जी तुमथैं  कनू उत्तराखण्ड चयेणू छ्
बोला परधान जी तुमथैं  कनू उत्तराखण्ड चयेणू छ्
छोटा छोटा उद्योग जख घर-घरूँमा हों
घूस न रिश्वत जख दफ्तरूंमा हो
गौ-गौंकू होऊ विकास यनू उत्तराखण्ड चयेणू छ्!!
मैंने न कभी देखा तुमको, पर प्राण तुम्हारी वह छाया- जो रहती है मेरे उर में, वह सुन्दर है पावन सुन्दर!  कविवर चन्द्र कुंवर बर्त्वाल

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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प्रह्लाद सिह मेहरा का उत्तराखंडी महिलाओ पर यह ह्रदय सप्र्शी गाना ..

पहाड़ की चेली पहाड़ की ब्वारी ले कैबे
ना खाया द्वि रुवाटा सुख ले

राती भान मजना
फिर हो ब्वारी तियुले घास ले कटना

काच लकडा तोडी लायी
सासु की गायी पाई .
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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प्रह्लाद सिह मेहरा, उत्तराखंड के प्रसिद्ध गायक ने पहाड़ मे शराबियों के पर ये गाना बनाया और उसमे भूतपूर्व सैनिको को भूमिका का भी वर्णन किया है :

    बड़ी है रे गजब यो १०० रुपया रम
  बड़ी है रे गजब यो १०० रुपया रम  .....

    पैली तारीख नजदीक क्या आयी
  हल्दारो ले दौड़ लगाई
  द्वि बोतल बाट पी आए
  एक बोतल घर ले आयी
  सियानी कुन रेछो रम क्या लाछा कम

  बड़ी है रे गजब यो १०० रुपया रम
  बड़ी है रे गजब यो १०० रुपया रम  .....
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Online हेम पन्त

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न रो चेलि न रो मेरि लाल, जा चेलि जा सौरास-2

दुनिया की रीत पौथा, तसि छ चलिया-2
पर घर धन हुनि चेलिया बेटिया.
चुपै जा नि मार बबा डाड-2

जा चेलि जा सौरास
न रो पौथा न रो मेरि लाल, जा चेलि जा सौरास

बार त्यौहार चेलि ऊनि जानु रयै-2
अपना बाबा के चेलि भेटन रेजये
तेरो है जो सारो संसार-2

जा चेलि जा सौरास
न रो चेलि न रो मेरि लाल, जा चेलि जा सौरास
मैंने न कभी देखा तुमको, पर प्राण तुम्हारी वह छाया- जो रहती है मेरे उर में, वह सुन्दर है पावन सुन्दर!  कविवर चन्द्र कुंवर बर्त्वाल

Online हेम पन्त

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हाय-हाय सुपारी खाय-खाय, सुण माया- क्या रामरो घाम लाग्यूं छ-2
धार मैं देवी को थान दूध लै नवायो-2
तेरि माया एसि लागि मैं पगली गयो-2
हाय-हाय सुपारी खाय-खाय, सुण माया- क्या रामरो घाम लाग्यूं छ-2

चमकनि गिलास माजा रमकनि चाहा छ-2
तेरि मेरि माया देखि दुनियां कें दाहा छ-2
हाय-हाय सुपारी खाय-खाय, सुण माया- क्या रामरो घाम लाग्यूं छ-2

मखमलि आंगडि तेरि चमकनि घाघरि-2
टिक बिंदुलि नथ फौजियां, चमकि रै पिछौडी-2
हाय-हाय सुपारी खाय-खाय, सुण माया- क्या रामरो घाम लाग्यूं छ-2

देवि जसो रूप तेरो माया को मूरत-2
सौ जनम तक तेरो है गयूं भगत-2
हाय-हाय सुपारी खाय-खाय, सुण माया- क्या रामरो घाम लाग्यूं छ-2
मैंने न कभी देखा तुमको, पर प्राण तुम्हारी वह छाया- जो रहती है मेरे उर में, वह सुन्दर है पावन सुन्दर!  कविवर चन्द्र कुंवर बर्त्वाल

Online हेम पन्त

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मालुराSSS ओ मालुरा, मालुराSSS ओ मालुरा
मालुरा हरिया यो डांना का पार-2

के उलि बुरुंजि कि भलि फुलि रैछ-2
रंगिली पिछौडि ढलकि ढकि रैछ-2
मालुरा कर ले तू सौला श्रंगार

रणमणि मुरूलि कि भलि बाजि रै छ-2
फुर-फुर बयार हौंसिया बगि रै छ-2
ए जा वै हौंसिया डांना का पार-2

ए जा सुवा एजा, रुपसि मेरि बै जा-2
किलमौडि, करौंजा, काफला दानि खैजा-2
ए जा वै हरिया यो डांना का पार-2
मैंने न कभी देखा तुमको, पर प्राण तुम्हारी वह छाया- जो रहती है मेरे उर में, वह सुन्दर है पावन सुन्दर!  कविवर चन्द्र कुंवर बर्त्वाल

Online हेम पन्त

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आशा है गोस्वामी जी के उपरोक्त ३ गाने आपको पसंद आयेंगे..
मैंने न कभी देखा तुमको, पर प्राण तुम्हारी वह छाया- जो रहती है मेरे उर में, वह सुन्दर है पावन सुन्दर!  कविवर चन्द्र कुंवर बर्त्वाल

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Hem Da (One karma 2 u for these lyrics). Here is lyric of Goswami Ji famous bhajan.


गोस्वामी जी यह भजन.

जै जै हो बद्रिनाथा
जै काशी केदार  जै जै हिमाला

पंचा चूली नन्दा देवी
जै जै हो गोमुखा
बागनाथ , जागनाथा
जै हरी हरिद्वार
जै जै हिमाला ..

दूंगा माटा मे राम श्याम
डाई बोटी भगवान् रे

शिव जी कि जनम भूमि
पार्वती को मैंता
जै जै हिमालय

जै जै हो बद्रिनाथा
जै काशी केदार  जै जै हिमाला


आशा है गोस्वामी जी के उपरोक्त ३ गाने आपको पसंद आयेंगे..

"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

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NEGI JI SONGS


ना दौड़ ना दौड़

ना दौड़ ना दौड़
ना दौड़ ना दौड ते  उन्दारी का बाटा  उन्दरियुं  का बाटा-2
उन्दारी कु सुख  दुयी चार  घडी कु,
उकाली  कु दुःख सदनी को सुख लाता,
ना दौड़ ना दौड ते  उन्दारी का बाटा  उन्दरियुं  का बाटा-2

सौन्गु  चितेंद  और  दौडे  भी जान्द पर
उन्दारी का बाता उन्दु  जान्द मान्खी ,
खैरी त आन्द पर   उतेदु  नि  लगडू ,
उब  उठादु  मा न्खी  उकाल  चढी    ,
ना दौड़ ना दौड ते  उन्दारी का बाटा  उन्दरियुं  का बाटा-2

एंच  गोमुख  मा  गंगा  पबित्र 
उन्दारियुं मा डंकी  कोजाल  होयेगे ,
गदानियुं  मा मिल गे  जो हियुं  उन्दु बोगी 
जो रेगे हिमालय मा वी  चम्कुनु  च

बरखा  बथोदियुं  मा भीउन्दी   नी रादिनी  जो,
तुकू  पुछिगे  नी खीरी खे  खे की,
जोल  नी बोती  धरती  मां फार  अंग्वल ,
उन्दू रोदी  गिनी  अपदी  खुशियुं ……..
ना दौड़ ना दौड ते  उन्दारी का बाटा  उन्दरियुं  का बाटा-2
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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रंगीली चगिली पुताई कसी

फूल फटना जुयूनी जसी
काकड़ फूलना जैसी
को मेरी किसाना
उठ सुवा, उजाओ हेगो चम चमा को घामो

गोरु बाछा,  औराटे
भूखे गोठ पाना 
उठ मेरी नारींग दानी
उठ जा चमा चाम ...........

ले पीले चाह गिलासों
गूड़क का कटक क
उठ मेरी पूनियू की जुना उठा वे चमा चमा

रंगीली चगिली पुताई कसी
फूल फटना जुयूनी जसी
काकड़ फूलना जैसी
को मेरी किसाना
उठ सुवा, उजाओ हेगो चम चमा को घामो ............

उठ भागी नाखार न करू
तल खेद खाताडा.
उठ मेरी पूनियू की जुना उठा वे चमा चमा
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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[size=10pt]
The most popular song after Bedo Paako from UK.. I have listened this song during many marraiges in Delhi also.



ओह भिना कसी के जानू द्वाराहाटा
 हिट साई कौतिकजानू द्वाराहाटा  ....

  औरत : नाख मे नौठुली नाती कसी के जानू द्वाराहाटा..

  पुरूष :  हिटू वै सुनार  वै गनून  द्वाराहाटा..
             हिट साई कौतिकजानू द्वाराहाटा  ....

  औरत : खुट मे चपल नाती कसी के जानू द्वाराहाटा..

 पुरूष :  हिटू वै दूकान  वै लियूंन  द्वाराहाटा..
             हिट साई कौतिकजानू द्वाराहाटा  ....

 औरत : आंग मे अगाडी नाती कसी के जानू द्वाराहाटा..

  पुरूष :  हिटू वै दूकान वही लियूंन    द्वाराहाटा..
             हिट साई कौतिकजानू द्वाराहाटा  ....
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"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Offline mukesh joshi

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  • छोउ.. मि घन्गतोल मा, तू किलै हैसी होली ......!
नेगी जी के सुर सागर का एक और नायब मोती

रिधि को सुमिरो शिधि को सुमिरो ,सुमिरो किशन कनायी .
अर सुमिरो गुरु अविनाशी को सुमरो शारदा माई,
सुन ले रे बेटा गोपीचंद जी बात सुनो चित लाई
सदा अमर या धरती नि रेंणी बज्र पडे टूटी जाई
अमर नि रेंदा चन्द्र सूरज छुचा  ग्रहण लगे छुप जाई ,
रिधि को सुमिरो शिधि को सुमिरो .........
माता रोये जनम-२ को बहना रोये छे: मासा ,
तिरिया रोये डेड घड़ी को अग्ने करे फ़िर बसा .....
रिधि को सुमिरो शिधि को सुमिरो ,सुमिरो किशन कनायी .
फ़ागुण चैत कु त्योहार आन्दु रय्या बार -बार