Author Topic: Race For Chair - क्या ऐसे ही होगा उत्तराखंड राज्य का सपना साकार?  (Read 800 times)

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Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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From: Sher singh Negi <ssnegichd@yahoo.in>
To: A Community of Uttarakhand Lovers <members@apnauttarakhand.com>
Date: Sat, 27 Jun 2009 14:12:05 +0530 (IST)
Subject: Re: [Members-MeraPahad] WHERE THE DEVELOPMENT - ONLY RACE OF CHAIR
Dear Mr.Mehta,
                       You are very much right that after lots sacrification we got the state,but nothing better has been done by Politicians.This time there was no need to change the C..M.We must thanks to Atalji and pray for his good health.Today We known as Uttanchali wordwide,people respect us as Uttanchali in hole of the world.
 
Thanks & Regards
S.S.Negi.                 
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Offline hem

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उत्तरांचल में भी वही सब हो रहा है जो अन्य राज्यों में हो रहा है. उतरांचल के राजनैतिक कर्णधार भी अन्य राजनेताओं की तरह भ्रष्ट हैं. केवल  मुख्य मंत्री बदलने से समस्या का हल नहीं निकलता. हाँ उत्ताराखंड आन्दोलन की तरह का  कोई जन  आन्दोलन  कुछ सीमा तक प्रभावी हो सकता है.

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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UTTARAKHAND HAS BECOME QUICK CM PRODUCING STATE ?
« Reply #17 on: June 30, 2009, 01:28:33 PM »

I belive Uttarakhand made progress only on changing CM during these 8 1/2 yrs ?

"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Offline हेम पन्त

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क्या बुबू इतने सयाने आदमी होकर ऐसी बात कर दी आपने.. अरे इन 3000 लोगों की तो उप्र के जमाने में भी ऐश ही थी. हमारा दर्द तो उन लोगों के लिये है जो चमोली, उत्तरकाशी के दूरस्थ इलाकों में रहते हैं. धारचूला, मुन्स्यारी, दानपुर की ऊंचाइयों पर रहते हैं और चम्पावत जिले में काली गंगा के किनारे नेपाल बोर्डर में रहते हैं. उनकी जिन्दगी तो अब भी वैसी ही है जैसी उप्र के जमाने में थी. उत्तराखण्ड की हालत और भी बदतर हो गई है कहो.

बिजली "कठ्याङ" आती नही है, सुनने वाला कोई नहीं. राशन और सिलेण्डरों की कालाबाजारी हो रही है देखने वाला कोई नहीं. कर्मचारी हङताल में मस्त हैं, जंगलों में लगी आग बारिश से बुझ रही है. उद्योग-धन्धे वाले अपनी जेब भरकर भागने के चक्कर में हैं कोई खबर नहीं ले रहा है. पहाङों में हृदय विदारक अपराध हो रहे हैं, उन्हें कौन रोकेगा? आज भी सीमान्त जिले बारिश के समय 3-4 दिन तक Road Block  के कारण disconnected रहते हैं, ऐसे कैसे चलेगा?

अब तो भाजपा के नेताओं को विकास की तरफ़ ध्यान देना चाहिये, गुटबाजी पर नहीं.       
तुम सब ठैरे पागल,
    अरेऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ ऐसे ही होगा उत्तराखण्ड का भला....थ्वाड़ डीपली किला नी सोचते हो? हैं.....?
क्यों ऐल तलक पांच सी०एम० बन गये, उनका भला हुआ ही ठैरा।
३०-४० मंत्री बन गये, उनका भला हुआ ही ठैरा।
३०+७०+१+७०+१ विधायक बने ठैरे, उनका भला ही हुआ ठैरा।
५०+३५०+८५ दर्जाधारी बने, उनका विकास हुआ ठैरा।
इसी के बीच में ५००-६०० दलाल और १०००-१५०० चमचों का भला हुआ ही ठैरा।
आब गिणो तो कतुक हुये टोटल हो गये २७७८ मतलब लगभग ३००० लोग।

इतने लोगों का भला हुआ तो तुमारे आंखों में क्यों बुड़ रहा है रे.... हैं।

मैंने न कभी देखा तुमको, पर प्राण तुम्हारी वह छाया- जो रहती है मेरे उर में, वह सुन्दर है पावन सुन्दर!  कविवर चन्द्र कुंवर बर्त्वाल

Offline Rajen

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यार बुबू, बात तो आप ठीक ही कह रहे हो फिर.  अब सोचो तो हमारे  गौं - घर में भी एक लौर में बैठ कर जब डेड़-दो सौ लोग दाल भात खाते हैं तो किसी को दाल कम मिली, किसी को सब्जी और किसी बिचारे को तो  रैत - खटाई भी नहीं मिलती और देखो जो सबसे आगे बैठा और जो बांटने वाले का ख़ास है उसे तो महाराज खूब माल मिलेगा ही मिलेगा. उसकी तकदीर ठैरी हो. ऐसा ही ठैरा यहाँ भी.  अब ये लोग आपकी बात कहाँ समझाने वाले ठैरे फिर बस रट लगा देने वाले ठैरे कि सब का ध्यान रखो, सबका ध्यान रखो.    ;D :D ;D


तुम सब ठैरे पागल,
    अरेऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ ऐसे ही होगा उत्तराखण्ड का भला....थ्वाड़ डीपली किला नी सोचते हो? हैं.....?
क्यों ऐल तलक पांच सी०एम० बन गये, उनका भला हुआ ही ठैरा।
३०-४० मंत्री बन गये, उनका भला हुआ ही ठैरा।
३०+७०+१+७०+१ विधायक बने ठैरे, उनका भला ही हुआ ठैरा।
५०+३५०+८५ दर्जाधारी बने, उनका विकास हुआ ठैरा।
इसी के बीच में ५००-६०० दलाल और १०००-१५०० चमचों का भला हुआ ही ठैरा।
आब गिणो तो कतुक हुये टोटल हो गये २७७८ मतलब लगभग ३००० लोग।

इतने लोगों का भला हुआ तो तुमारे आंखों में क्यों बुड़ रहा है रे.... हैं।
आब क्या चिताते हो? सबका भला हो जाय...क्यो हो जाय, किया क्या है इन्होंने...आन्दोलन...क्यों किया फिर? किसी ने घर आकर बुलाया थोड़े ही क्या था.....अपने आप चले थे उत्तराखण्ड बनेगा तो भला होगा करके.....अब सबका थोड़ी हो जायेगा पैं, इतने लोगों का हुआ कम है क्या, धीरे-धीरे सबका होगा, इतुक अताश, बौल्याट करने की क्या जरुरत है?

Reiki is pure pranic energy, a healing force which travels from the practitioner to the patient in order to heal diseases. The purpose of Reiki is to restore balance and health.

Offline हेम पन्त

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आज निशंक जी के मन्त्रीमण्डल का विस्तार होना है, देखते हैं किस-किसको मन्त्री बनाया जाता है....
मैंने न कभी देखा तुमको, पर प्राण तुम्हारी वह छाया- जो रहती है मेरे उर में, वह सुन्दर है पावन सुन्दर!  कविवर चन्द्र कुंवर बर्त्वाल

Offline devbhoomi

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  • "UTTARANCHAL...A SURPRISE AROUND EVERY CORN"
गांवों में पर्यावरण के संरक्षण की चुनौतियां एवं निराकरण


हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि के कुलसचिव प्रो। उदय सिंह रावत ने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ पहाड़ के प्रवासी नागरिकों को भी अपने गांवों की सुध लेनी होगी। गांवों का विकास हुए बिना प्रदेश का सर्वागीण विकास नहीं हो सकता है।

रविवार को कठूड़ गांव में गढ़वाल विवि के प्रौढ़ सतत शिक्षा विभाग द्वारा 'गांवों में पर्यावरण के संरक्षण की चुनौतियां एवं निराकरण' विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते कुलसचिव डा। यूएस रावत ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण निहित है। पर्यावरण संरक्षण के लिए जब तक प्रत्येक परिवार पूर्ण मनोयोग से साझे प्रयास नहीं करता, पहाड़ में प्रकृति, समाज और जीवन के अस्तित्व पर पर्यावरण रूपी खतरे मंडराते रहेंगे।

लैंगिक भेदभाव को दूर करने पर विशेष बल देते हुए डा. उदय रावत ने कहा कि पहाड़ में महिलाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर भी देने चाहिए। इस दौरान प्रौढ़ सतत शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो. संपूर्ण सिंह रावत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को सक्रिय पहल करनी होगी। सतत शिक्षा केन्द्रों के कार्यो पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने विचार गोष्ठी के उद्देश्यों के बारे में भी बताया। मुख्य वक्ता और संस्कृति कर्मी गणेश खुगशाल ने कहा कि ग्राम स्तर पर ऐसी विचार गोष्ठियां पर्यावरण संरक्षण को लेकर सार्थक संवाद का माध्यम भी बनती हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को अपने विकास के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है।

 पंचायत प्रणाली का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पुरुष प्रधान समाज में अब भी महिलाएं नई पहल नहीं कर पा रही हैं। जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा के लिए महिलाएं अभी भी दहलीज लांघने को तैयार नहीं हैं। डाल्यों का दगड़्या के संस्थापक अध्यक्ष डा. मोहन सिंह पंवार ने परंपरागत लोकज्ञान और आधुनिक विज्ञान के मध्य अर्थपूर्ण सामंजस्य पर बल दिया। डा. पंवार ने कहा कि जल संरक्षण के साथ मिश्रित वनों का विकास जरूरी है। डा. पंवार ने कहा कि स्वच्छता और आजीविका के संसाधनों को बढ़ाने को लेकर गांवों में संगठित प्रयासों की जरूरत है, जिसके लिए गढ़वाल विवि के सतत शिक्षा केन्द्र सशक्त माध्यम भी बन सकते हैं। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए राइंका खोला के प्रधानाचार्य प्रमोद धस्माना ने गांवों के प्रदूषित होते जल स्रोतों के संरक्षण और उनकी स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बतायी।

 नई पीढ़ी को सामाजिक और भौतिक पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जागरूक करने को लेकर बहुआयामी प्रयास किए जाने चाहिए। कोट के ज्येष्ठ प्रमुख सुरेन्द्र सिंह रावत, कठूड़ के क्षेत्र पंचायत सदस्य धर्मवीर सिंह नेगी, युवक मंगल दल के अध्यक्ष अरविंद शाह, ग्राम प्रधान कठूड़ बसंत नेगी ने भी गोष्ठी में विचार व्यक्त किए। विभाग के प्रवक्ता राकेश भट्ट ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। क्षेत्रीय समन्वयक कमलेश नैथानी ने कार्यक्रम का संचालन किया।
"जुगराज रैया या धरती और याखाका मनखी जय देवभूमि उत्तराखंड "