Author Topic: How To Save Forests? - कैसे बचाई जा सकती है वनसम्पदा?  (Read 3512 times)

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Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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The way rivers are drying and weather dis-order is being seen, there is absolute need to give emphasis on plantation.

Still in village areas of UK, de-forestation is very high.

Some kidns of awareness progress are required to initiated ugently. 
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

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उत्तराखंड  मैं वन संपदा को बचाना सायद मुश्किल ही होता जा रहा है ,

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बांज व देवदार समाप्ति की ओर


रुद्रप्रयाग। ग्लोबल वार्मिग के चलते मौसम में लगातार आ रहे परिवर्तन का असर पहाड़ की वन पारिस्थितिकी पर नजर आने लगा है। पर्यावरणीय असंतुलन के चलते बांज व देवदार के वृक्षों पर विपरीत प्रभाव पड़ रह है, जबकि चीड़ के पेड़ पहले से अधिक ऊंचाई पर भी उगने लगे हैं।

समय के साथ वनों की संख्या में कमी आने के साथ ही वनों के प्रकृति में भारी परिवर्तन आया है। कम ऊंचाई पर होने वाले चीड़ अब पांच हजार फीट की ऊंचाई वाले स्थानों पर भी देखे जा रहे हैं, लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से इनका यहां उगना भविष्य के लिए काफी खतरनाक माना जा रहा है। पहाड़ के अधिकांश जंगलों में पहले जहां बाज, बुरांश के साथ देवदार पाया जाता था, वहां अब चीड़ बड़ी तेजी से उभर रहा है।

 प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं मिश्रित वन के प्रबल समर्थक जगत सिंह चौधरी 'जंगली' का कहना है कि चीड़ के वृक्ष का ऊंचाई वाले स्थानों पर होना तथा इसके चलते बांज का समाप्त होना पर्यावरण के लिए शुभ नहीं है। उनका कहना है
 कि लगातार वातावरण मे आ रहे परिवर्तन के चलते ही यह हो रहा है।
श्री जंगली कहते हैं कि कि इसे समय से रोका जाना जरूरी है, यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आने वाले समय में बांज व देवदार जैसे बहुउपयोगी पेड़ समाप्त हो जाएंगे। उधर, प्रभागीय वनाधिकारी सुरेन्द्र मेहरा मानते हैं कि पहले की अपेक्षा निश्चित रूप से बांज व देवदार प्रजाति को अत्यधिक नुकसान पहुंच रहा है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_5966079.html
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बांज को बचाने को महिलाओं ने चलाई मुहिम



सोमेश्वर (अल्मोड़ा) : तहसील क्षेत्र के ग्राम खाड़ी-सुनार तथा बयाला-खालसा की जागरूक महिलाओं ने जंगलों से बांज तथा कच्ची लकड़ी का कटान रोकने की मुहिम चलाई है। महिलाओं ने टोलियों में जंगलों की गश्त कर बांज काट रही अनेक महिलाओं की दरातियां जब्त कर ली। चेतावनी दी कि जो भी जंगलों का अवैध कटान करेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

महिलाओं का कहना है कि गांवों के प्राकृतिक जलस्रोत जो कि मई-जून माह में भी नहीं सूखते थे, वह सर्दियों में सूखने के कगार पर है। जिसका मुख्य कारण जल पैदा करने वाले चौड़ी पत्तीदार पेड़ों बांज का कटान होना व जंगलों में बार-बार आग लगना है। गांवों की महिलाओं का आरोप है कि उनके जंगलों में अन्य गांवों की महिलाएं अवैध कटान करते हुए पकड़ी जाती रही हैं व वन महकमे से जंगलों की नियमित गश्त के लिए कई बार कहने के उपरांत भी जंगलों का दोहन जारी है व जलस्रोतों का अस्तित्व भी खतरे में है। महिलाओं ने वन विभाग से भी जंगलों को बचाने के लिए उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6134848.html
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महिलाओं ने पेड़ों पर बांधे रक्षासूत्र


उत्तरकाशी। 'ऊंचाई पर पेड़ रहेंगे, नदी ग्लेशियर टिके रहेंगे' जैसे नारे लगाते हुए धनपुर व अलेथ गांव की महिलाओं ने रक्षासूत्र आंदोलन के तहत पेड़ों पर राखियां बांधीं। इस दौरान महिलाओं ने जंगलों के संरक्षण- संव‌र्द्धन और जनसामान्य को इसके प्रति प्रेरित करने का संकल्प भी लिया।

सोमवार को ढोल नगाड़ों के साथ अलेथ व धनपुर गांव की महिलाओं ने जंगल में पहुंच कर पेड़ों पर राखियां बांधी। रक्षासूत्र बांधने के दौरान महिलाओं ने राज्य सरकार से ग्रीन बोनस का इस्तेमाल हरियाली को वापस लाने के लिये करने की मांग उठाई। इसके बाद गांव में सभा को संबोधित करते हुए रक्षासूत्र अभियान के प्रमुख सुरेश भाई ने कहा कि प्रकृति में कार्बन की मात्रा को कम करने में ऊंचाई पर स्थित पेड़ पौधों एवं वनस्पतियों की अहम भूमिका है। वन विभाग व वन निगम ऊंचाई की वन प्रजातियों को बचाने में जनता का सहयोग नहीं ले पा रहा है। जो लोग जंगलों के बीच निवास करते हैं, उन्हें ही जंगलों के अधिकार भी सौंपे जाने चाहिये।

इस मौके पर ग्राम प्रधान क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय सिंह महर, ग्राम प्रधान सुनीता गुसाई, सामाजिक कार्यकर्ता गंगा सिंह राणा, मुलायम सिंह राणा, लक्ष्मी देवी, प्रेम सिंह महर, लीलानंद भट्ट, सुशीला देवी, सुरमा देवी, प्रेमा बधानी, संगीता, विजय सिंह गुसाई, महिला प्रेरक दुर्गा देवी सहित अनेक महिलाएं मौजूद रहीं।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6148043.html
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