Author Topic: Bhitauli Tradition - भिटौली: उत्तराखण्ड की एक विशिष्ट परंपरा  (Read 2645 times)

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Offline हेम पन्त

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भिटौली का महीना शुरू हो चुका है... पहाड़ के लोगों द्वारा मनाये जाने वाली यह एक अनूठी परम्परा है... जिसमे भाई अपनी विवाहित बहिन को चैत के महीने में सौगात देते हैं.. इस विशिष्ट परम्परा को समर्पित है यह टोपिक...
« Last Edit: August 16, 2009, 09:35:30 PM by हिमांशु पाठक »
मैंने न कभी देखा तुमको, पर प्राण तुम्हारी वह छाया- जो रहती है मेरे उर में, वह सुन्दर है पावन सुन्दर!  कविवर चन्द्र कुंवर बर्त्वाल

Offline हलिया

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ये तो भेरी गुड टापिक ठैरा महाराज।  आपने सुरू किया बहुत अच्छा किया।  धन्यबाद है आपको।  सभी सदस्य लोग इसमें अपने-२ बिचार और कुछ मजेदार अनुभव आपस में बाटेंगे तो मजा ही आयेगा।


भिटौली का महीना शुरू हो चुका है... पहाड़ के लोगों द्वारा मनाये जाने वाला एक अनूठी परम्परा है... जिसमे भाई अपनी विवाहित बहिन को चैत के महीने में सौगात देते हैं.. इस विशिष्ट परम्परा को समर्पित है यह टोपिक...

मुश्किल से आमा का चूल्हा जला है, गीली है लकडी कि गीला धुंवा है|
साग क्या छोंका कि गौं महका है ओssss होs रे, ओहोरे, गंध निराsली ओ दिगौsss लाली|| ओssss होs रे, ओहोरे, ओ दिगौ लाली||     "गिर्दा"

Offline हेम पन्त

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भिटौली से संबंधित एक कहानी प्रचलित है... जो इस प्रकार है....

सचदेव नाम का लड़का था जिसकी बहिन का विवाह पाताल लोक में नाग के साथ हुआ था. तब सचदेव बहुत छोटा था. शादी के कई साल बीतने पर भी उसकी बहिन मायके नही आ पायी तो सचदेव उससे मिलने पाताल लोक चला गया.लेकिन नाग ने उन दोनों के रिश्ते को शक की निगाह से देखा क्योंकि नाग सचदेव से कभी मिला नही था. यह लज्जा जनक बातें सुन कर सचदेव ने आत्महत्या कर ली. नाग को जब असलियत का पता चला तो उसने भी आत्महत्या कर ली.सचदेव की बहिन ने सोचा अब मेरी जिंदगी व्यर्थ है. उसने भी अपनी इहलीला समाप्त कर दी. इन दोनों भाई-बहनो के त्याग और बलिदान को याद करते हुए ये त्यौहार आज भी प्रचलन में है.
मैंने न कभी देखा तुमको, पर प्राण तुम्हारी वह छाया- जो रहती है मेरे उर में, वह सुन्दर है पावन सुन्दर!  कविवर चन्द्र कुंवर बर्त्वाल

Offline हेम पन्त

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भाई-बहन के प्यार को समर्पित यह त्यौहार (रिवाज) सिर्फ उत्तराखण्ड के लोगों के द्वारा मनाया जाता है. विवाहित बहनों को चैत का महिना आते ही अपने मायके से आने वाले 'भिटौली' की सौगात का इंतजार रहने लगता है.
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Offline हलिया

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वाह पंत जी वाह, इस बेहतरीन जानकारी के लिये धन्यबाद और +१ भी।

भिटौली से संबंधित एक कहानी प्रचलित है... जो इस प्रकार है....

सचदेव नाम का लड़का था जिसकी बहिन का विवाह पाताल लोक में नाग के साथ हुआ था. तब सचदेव बहुत छोटा था. शादी के कई साल बीतने पर भी उसकी बहिन मायके नही आ पायी तो सचदेव उससे मिलने पाताल लोक चला गया.लेकिन नाग ने उन दोनों के रिश्ते को शक की निगाह से देखा क्योंकि नाग सचदेव से कभी मिला नही था. यह लज्जा जनक बातें सुन कर सचदेव ने आत्महत्या कर ली. नाग को जब असलियत का पता चला तो उसने भी आत्महत्या कर ली.सचदेव की बहिन ने सोचा अब मेरी जिंदगी व्यर्थ है. उसने भी अपनी इहलीला समाप्त कर दी. इन दोनों भाई-बहनो के त्याग और बलिदान को याद करते हुए ये त्यौहार आज भी प्रचलन में है.

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Offline Himanshu Pathak

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Meri taraf se Bhi +1 Karma Hem Daa..... Is Kahaani Ke Liye....

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Offline हेम पन्त

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Dhanyawaad!!
Is topic par aap sabhi logo ke vichar apekshit hain...

वाह पंत जी वाह, इस बेहतरीन जानकारी के लिये धन्यबाद और +१ भी।

भिटौली से संबंधित एक कहानी प्रचलित है... जो इस प्रकार है....

सचदेव नाम का लड़का था जिसकी बहिन का विवाह पाताल लोक में नाग के साथ हुआ था. तब सचदेव बहुत छोटा था. शादी के कई साल बीतने पर भी उसकी बहिन मायके नही आ पायी तो सचदेव उससे मिलने पाताल लोक चला गया.लेकिन नाग ने उन दोनों के रिश्ते को शक की निगाह से देखा क्योंकि नाग सचदेव से कभी मिला नही था. यह लज्जा जनक बातें सुन कर सचदेव ने आत्महत्या कर ली. नाग को जब असलियत का पता चला तो उसने भी आत्महत्या कर ली.सचदेव की बहिन ने सोचा अब मेरी जिंदगी व्यर्थ है. उसने भी अपनी इहलीला समाप्त कर दी. इन दोनों भाई-बहनो के त्याग और बलिदान को याद करते हुए ये त्यौहार आज भी प्रचलन में है.


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Barso se chali aa rahee hai yah prampra.

This the month when parent visit to their dauthers, see  her condition and also give her some gifts.

Nice to see, people have maintained this tradition even today.




भिटौली का महीना शुरू हो चुका है... पहाड़ के लोगों द्वारा मनाये जाने वाली यह एक अनूठी परम्परा है... जिसमे भाई अपनी विवाहित बहिन को चैत के महीने में सौगात देते हैं.. इस विशिष्ट परम्परा को समर्पित है यह टोपिक...

"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

Offline Himanshu Pathak

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भिटौली उत्तराखंड की एक बहुत  पुरानी  परम्परा है|  बहिन के विवाह के बाद हर भाई अपनी बहिन को चैत्र के महीने मे भिटौली भेजता है| पूर्व मे भिटौली के रूप मे खजूर(आटे + दूध + घी + चीनी  का मिश्रण), गुड-पापेडी  देता था| समय के साथ साथ भिटौली के रूप मे मिठाई ने स्थान ग्रहण  ने  किया| आजकल भिटौली के रूप मे धन(रूपये) तथा अन्य सामान दिया जाता है|  

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Offline Himanshu Pathak

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कहा जाता है पहली भिटौली डोली के समय ही दी जाती है| दूसरी भिटौली बैसाख के माह मे दी जाती है(क्योंकि विवाह के पहले वर्ष  के  चैत्र को काला महीना माना जाता है)| उसके बाद जन्म पर्यंत भाई अपनी बहिन को हर वर्ष चैत्र के महीने मे भिटौली देता है| 

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Offline हेम पन्त

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यह जानकारी हमारे बडे भाई श्री पंकज महर जी ने भेजी है.. उनके यहां इन्टरनेट में कुछ दिक्कत है..

चैत्र महीने की ५ गते तक विवाहित महिला को स्वयं तथा किसी और के द्वारा उसके सामने महीने का नाम लेना भी वर्जित होता है।
उत्तराखण्ड की हर महिला भिटौली का इंतजार करती है और इसे पूरे गांव में बांटा जाता है, यह त्यौहार हमारे सामाजिक सदभाव का भी प्रतीक है। इस माह का महिलाओं के लिये कितना महत्व है, हमारे लोकगीतों के सहज ही जाना जा सकता है...।


"ना बासा घुघुती चैत की, याद आ जैछे मैके मैत की..."
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Offline हेम पन्त

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आज से कुछ दशक पहले जब यातायात व संचार के माध्यम इतने नहीं थे उस समय की महिलाओं के लिये यह परंपरा बहुत महत्वपूर्ण थी. जब साल में एक बार मायके से उनके लिये पारंपरिक पकवानों की पोटली के साथ ही उपहार के तौर पर कपडे आदि आते थे.
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Offline हेम पन्त

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भिटौली आने पर घर में त्यौहार का माहौल हो जाता है. घर में बनने वाले पकवानों को गांव-पडोस में बांटा जाता है. इस तरह यह रिवाज सामाजिक सद्भाव को भी बढ़ावा देता है.
चैत्र मास के दौरान पहाडो में सामान्यतः खेतीबारी के कामो से फुरसत रहती है... यह रिवाज अपने नाते-रिश्तेदारो से मिलने जुलने का और उनके हाल-चाल जानने का एक माध्यम बन जाता है...
मैंने न कभी देखा तुमको, पर प्राण तुम्हारी वह छाया- जो रहती है मेरे उर में, वह सुन्दर है पावन सुन्दर!  कविवर चन्द्र कुंवर बर्त्वाल

Offline shailikajoshi

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Thanks For This Great Topic And Elling the Story of Bhitauli.
Mai Bachpan se janti hu K Bhitauli ka Mahina Hota hai.Is Mahine Bhai Bahan ko Bhitauli dene Jata hai.

Bt Iski story hai mujhe nhi maloom tha.
Thanks Again for Story

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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I think yah gana isi par banaya gaya hai.

Ni basu Ghughuti Chait Ki,
Meeke Narayani Lagi Maite ki....

भिटौली आने पर घर में त्यौहार का माहौल हो जाता है. घर में बनने वाले पकवानों को गांव-पडोस में बांटा जाता है. इस तरह यह रिवाज सामाजिक सद्भाव को भी बढ़ावा देता है.
चैत्र मास के दौरान पहाडो में सामान्यतः खेतीबारी के कामो से फुरसत रहती है... यह रिवाज अपने नाते-रिश्तेदारो से मिलने जुलने का और उनके हाल-चाल जानने का एक माध्यम बन जाता है...

"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!