यह जानकारी हमारे बडे भाई श्री पंकज महर जी ने भेजी है.. उनके यहां इन्टरनेट में कुछ दिक्कत है..
चैत्र महीने की ५ गते तक विवाहित महिला को स्वयं तथा किसी और के द्वारा उसके सामने महीने का नाम लेना भी वर्जित होता है।
उत्तराखण्ड की हर महिला भिटौली का इंतजार करती है और इसे पूरे गांव में बांटा जाता है, यह त्यौहार हमारे सामाजिक सदभाव का भी प्रतीक है। इस माह का महिलाओं के लिये कितना महत्व है, हमारे लोकगीतों के सहज ही जाना जा सकता है...।
"ना बासा घुघुती चैत की, याद आ जैछे मैके मैत की..."