Author Topic: Articles By Parashar Gaur On Uttarakhand - पराशर गौर जी के उत्तराखंड पर लेख  (Read 4171 times)

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Offline parashargaur

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barthwal jii...

  S W A G AT ......    MERRA PAAD MAA..

Dhani hogiimere Dhartii... ju aap ani...

parahsra

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मरना एक मौत का !

एक तरुण  ने
जैसे ही अपनी यौबन की दहलीज  पर 
अपने पाऊ रखे ही थे कि
 मौत  उसे निगल गई !

पंखे से झूलती उसकी लाश
मौन होकर ......
 अपने ऊपर हुए  अत्याचारों का
सबूत दे रही  थी  !
उसका वो मुरझाया चेहरा
उसकी वो लटकी गर्दन
कह रही थी .......
तुम सबने मिलकर मुझे मारा है  ?

मुझे मारा है ...
मेरी माँ/बापा   कि  महत्वाकंशावोने
जो बार बार मुझ   पर  लादी जाती रही है
बिना मेरी , भावनाओं  को समझे  !

मुझे मारा है.....;
मेरे  स्कूल के माहोल ने
जिसने मुझे बार बार प्रताड़ित  किया है
कचोटा हैं , मुझे अन्दर ही अन्दर
हीन भावानौ के बीज बौ बौ  कर !

मुझे मारा है ..
मेरे सीनियरो के घमंड ने
जो मुझे सरे आम हँसी का पात्र  बनाकर
बार बा र मुझे लजित करते रहे
सब के  सामने   !

मै,
 मरना नही चाता था
परन्तु मेरे पास ....,
इसके सिवा कोई बिकल्प भी  नही   था   !

एक बिकल्प था
 " बिद्रोह का  ....//"
"बिद्रोह " .... किस किस  से करता  ?
सब के सब तो
अपने अपने चक्रब्यू  में मुझे
फसाते जा रहे थे .....
जिससे बाहर निकलना
मेरे लिए ना मुमकिन सा था ! 

मुझे मारा है ....
मेरे अंदर के झुझते  "  मै   '   ने
जो लड़ते लड़ते हार गया था
अपने आप से !

मै मर गया हूँ तो क्या ?

जीने कि लालसा और
उमीदो कि किरन  अभी भी
सेष है .................!

जब तुम सकब लोग .,
मेरी भावनाओं को और
मेरी पीड़ा को समझ लोगे
तब.....
तब , कोई नही मरेगा
और नहीं मारेगा
वो ........
जियेगा एक सुनहरे भविषय  के लिए !

पराशर गौर
५ फरबरी २०१०  ३.४५ दिन में

Offline parashargaur

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जाणु त्यारु
 
छोड़ी  हम साणी
तू जब बिटिकी गे
सूना ह्वीनी  भैर -भित्तर
चौक - डंडयाली  रूवे  !
 
         रात रा  उण्डी-उण्डी
         दिन भी छो कुछ मुरुयु मुरुयु
         छैल डाँडो कु भी  आज
         छो कुछ बूझ्यु  बू झ्यु   
         मुंड घुन्ड़ोक पेट धारी
          बिखुंन देलिम रा रूणी रै  !
 
रौली छे  उदास हुई
ज़ाद देखि त्व़े सणी
बाटा- घाटा छा बुना
दगडी लिजा हम सणी
भित्तर खाली सुनि डंडयाली
आज डंडयाली  ह्वे  ...................  !
 
        सुनू सुनू बोण छो
        सुनोपन सारयूमा
        स्वीणा रीटि रीटि  छा कण सवाल
        ब्व़े की रीती आंखयुमा
         क्याजी देदी वो जबाब  ...
         जब जबाब हर्चिगे   !
 
धुरपलिम बैठ्यु कागा
सोची सोची सुचुदु  रै
चौका तिरोली  लुल्ली  घिनडूडी
 सुस्गुरा ही भुरुदी रै
उरख्यलोंन तापना तूडिन
भित्तर सिल्वाटी   रवे  !   
 
       डाँडि काँठी गाद गदिनी
       छोया रवैनी दिड़ा तोड़ी  की
       धुरपलिम थरप्यु द्य्ब्ता  बुनू
       कन बिजोग आज पोड़ीगी
        धार पोर जान्द देखी त्वै
         गोर -बछरा , गोंडी रामीगे  !
 
पराशर गौर
फरबरी ७ २०१०   ०७०
रात ११ बजे

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Sir,

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जाणु त्यारु
 
छोड़ी  हम साणी
तू जब बिटिकी गे
सूना ह्वीनी  भैर -भित्तर
चौक - डंडयाली  रूवे  !
 
         रात रा  उण्डी-उण्डी
         दिन भी छो कुछ मुरुयु मुरुयु
         छैल डाँडो कु भी  आज
         छो कुछ बूझ्यु  बू झ्यु   
         मुंड घुन्ड़ोक पेट धारी
          बिखुंन देलिम रा रूणी रै  !
 
रौली छे  उदास हुई
ज़ाद देखि त्व़े सणी
बाटा- घाटा छा बुना
दगडी लिजा हम सणी
भित्तर खाली सुनि डंडयाली
आज डंडयाली  ह्वे  ...................  !
 
        सुनू सुनू बोण छो
        सुनोपन सारयूमा
        स्वीणा रीटि रीटि  छा कण सवाल
        ब्व़े की रीती आंखयुमा
         क्याजी देदी वो जबाब  ...
         जब जबाब हर्चिगे   !
 
धुरपलिम बैठ्यु कागा
सोची सोची सुचुदु  रै
चौका तिरोली  लुल्ली  घिनडूडी
 सुस्गुरा ही भुरुदी रै
उरख्यलोंन तापना तूडिन
भित्तर सिल्वाटी   रवे  !   
 
       डाँडि काँठी गाद गदिनी
       छोया रवैनी दिड़ा तोड़ी  की
       धुरपलिम थरप्यु द्य्ब्ता  बुनू
       कन बिजोग आज पोड़ीगी
        धार पोर जान्द देखी त्वै
         गोर -बछरा , गोंडी रामीगे  !
 
पराशर गौर
फरबरी ७ २०१०   ०७०
रात ११ बजे


"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
 

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 ब्रकिंग न्यूज  एक स म स ......
     
    धनिया को बीज : त्वे फर क्या तर्सेन् तू छे बिराणी चीज ..
 
        जनि यु समस  वी  थै पुह्न्ची !  वीकू  बैल्टाइन डे,   कचल्या कचेलिम बदली गे !  उ द्वी झणो खिर्तु  मचिगे  खिर्तु ... आदमी बुन  बैठी  ,  "  ये बत्ता ..., को च यु????     जैन यु,  समस  भेजी !  मी जनुदु छो,  की,   कोच वो,,,,, , पर मी त्यारा गिच्ला सुन चदु !  वोल अब क्या हवाई ... गिछु पर म्वालू किले लगी गे ! दे थिच्च्म  थिचाई ....... ///////

    अभी अभी खबर मिली की एक  स.म.सल  एक   अछु  जलदु, बस्यु - बसायु  घरम  भारी कोहराम मचे दे .. हमरा बिशेष सम्बदाता  खबरची राम जिल  बताई की
वे स मस  थै पोडी,  छुमा कु आदमी  गुस्स्म   बोल्या बणी  सस्तो आसमान पर  पौंची,  वे मोबाइल जू चुमम छो लकी सीध वे आदिमा घौर गे आर वेल  वे आदमी घरवाली का साम वो स मस पोडी  जनी सुनई वो बुन बैठी भेजी  युकी हरकत त इनी छान !  ई नि ,  समस   यूँ मिखुनी भी भेजी ..  दिखाऊ  ! जनी  वेल देखि ... उ बुन बैठी     " यार,   यु आदिम .क्या आदिम च  !  .. यु आदिम नि ...  युत कवी पौच्यु  च पौच्यु   !  '   माफ़ कारिणी   बहिन जी  , बोलिकी वो आदिम अपना घोर  चलीगे ! पर  छुमो क्या हवे ,   अबी तक पता नि  चली  !  जी .... भीष्म जी ....  !     मी कैमरा मैन एक अन्ख्वाला  का दगड  खबरची राम  बीच बाजार बीटी  !   

पराशर गौर
फरबरी ११५ १० रात १०.३५ पर

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    {   कौथीक माँ,     यु के  का चीफ  मिनिस्टर कु  उद्घाटन दिवस का समय पर , नि आण पर }

ब्यौली  कु मामा

       सुन्दरी कु ब्यू क   दिन जनी नाजिखू  आंदा गिनी ,   वीका ब्व़े- बबन ,  गौ भयात, आस पडोस  दूर- दराज का नाता रिसतादरु  थे न्यूत भिजण शुरू कैदे ! सुन्दरी कु ममा  देहरादून माँ छो काम कनु  स्यु साब वीथी तक लगे की पीली त फोन से , फिर चिठ्ठी , फिर निमंत्र्ण पत्र भेजी वोद नाद कैकी बोली गई की १९ २० को  भाणजी ब्यू च  वेल उभरी बोली की   .... हा हां ह .. मी  पहंचु  एक स्फ्ता पैली !
     सहरु  माँ खाशकर मुम्बे जन सहरुमा हर चीज मैंगी ! खैर , सुन्दरी का बब्ल अपनी औखात क अनुसार हर चीज कोरी  !   कै भी  चीम कमी नि रेजो  वें अपणी समणी ,  अपणी आंख्यु  न करी ! पंडाल .  साजो  सामान   ,  खाणी- पैनी  सब कुछ  !  जनी तारीख नाजिखू आई  वनी पौणा न्युतेर भी आणा शुरू  ह्व़ाय  !  एक हफ्ता पेल बीटी उनका घरमा  रौनक ही रौनक  ...!   घर सजी, पंडाल सजी,  बेदी सजी , ! बरातों दिन भी आगई  !  बरात भी आई  !  आवा भगत का बाद बेदी माँ फ्यारा फौरा ह्वेनी !  पंडाजिल बोली  ' -------  ये भाई नौनी कु मम्मा थे बुलावा ,  " सब लगी मामा थे खुज्याँ पर ! ममा देख्या त आई नि !  तभी कैल बोली  ' अजी ई त  गे छा पर यखना अपणा ससुरास्म "  ! वो ... , सरकरी खर्च्मा होलू आयु ,    तभी कैल बीचम  व्यंग माँ बोली !   " हां भाई .. भांजी थे थै कभी मिली जै सकद  आर मिली भी जालू पर स्याल सायली  हे बाबा  .. कनी बात छा कना  .. ???   
      एक बुजर्गल बोली पंडा जी  सरासरी मन्त्र पडा !  कख छा लगया ! ब्युली गे,  बरात ग़े,  न्युते गया  पर ममा अभी तक  नि आयु !

पराशर गौड़
दिनाक २१ फरबरी २०१० दिन्म
« Last Edit: February 23, 2010, 06:02:36 AM by parashargaur »

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  प्रबास   में   उत्तराखंडी होली

 
ब्रैम्पटन  , टोरंटो   ओंटारियो  कनाडा  में गोरे रोड स्तिथ संत ज्ञानेश्वर मंदिर के भूतल सभागार में दिनाक ६ मार्च २०१० को   प्रवास में बसे उत्तराखंडियो  की एक संस्था  उत्तराखंड  कल्चरल  एशो .  ने होली के उत्सव पर होली का आयोजन किया जिसमे लगभग १२० से ज्यादा परिवार सामिल हुए !  सात समंदर पार अपने वतन से जुडी उन यादो को ताजा  किया गया !  पर्वतीय परिवेश में खेली गई होली का रंग जब धीरे धीरे उभरा तो उसे देखते ही बनता था !  सबसे पहले वहा पर आये सब ऊताराखंडियो  ने एक दुसरे पर गुलाल  मल कर रंगो के इस होली के तोहार का श्री गणेश किया  साथ में एक दुसरे को होली की   मुबारक बाद भी दी !

      उत्तराखंड  कल्चरल  एसो का स्वरुप यु तो सन १९८८ -८९ के समय से आने लगा था जब भारत से आये एक दूरदर्शी  अपनी माँ बोली के लिए समर्पित पराशर गौड़   कनाडा आये !  उन्होंने देखा  की  कुछ  चंद लोग ही आपस में बैठते है   जिनमे स्वर्गीय  भूपेंदर असवाल, जे  पी गौड़ , बिरेंदर नेगी , जेपी जोशी , जगदीश  गोसाई अवम शिव कोटनाल आदि ..  उन्होंने सबसे मिलकर एक  योजना  बनाई की क्यों ना   सब  पहाडियों को भी जोड़कर एक संस्था बननी जाये ! जिसके फलस्वरूप आज उत्तराखंड  कल्चरल एसो  ,   सन १९8९ से लेकर सन  १९९4  में  एक लंबा सफ़र तय करने के बाद यह संस्था  अपने परिपक्वा  रूप में आज सामने आ  पाई  है ! पहली बार    सन १९९०- ९१ पहली बार  बिधिबत रूप से    हरेंदर सजवान  के घर पर जिसमे पराशर गौड़, जगदम्बा जोशी , गैरोला जी , जेपी गौड़ , बिरंदर नेगी उपस्थित थे इस  संस्था की  शुरुव्वत हुई !  जिसमे   जगदम्बा जोशी .प्रधान,   हरेंदर सजवान   उप प्रधान ,  परासर  गौड़ सचिब  अवम  बिरेंदर नेगी   कोसाध्य्क्ष   चुने गए  गए  थे !  तब से अबतक संथा ने कनाडा में बहुत से कार्यक्रम किये ! जिसमे न १९९४ में पहली बार नार्थ अमेरिका में  अमेरिका व कनाडा के  तमाम पहडियो   का एक  एक जगह इकठा किया गया था !  सन २००७ में पहाड़ के  प्रसिद्ध  गायक नरेंदर नेगी जी  को यहाँ आमंत्रित  कर उनकी गीत संध्या का आयोजन किया गया !
 
     होली के  इस उत्सब में  बहुत  से  कार्यक्रम की प्रस्तुती हुई .. न्रत्य , गीत-संगीत , कबिता ,  हास्य  चुटकले  आदि  आदि !  सर्व प्रथम  संस्था के सचिब  हरीश  कंडवाल  ने  उत्तराखंड की जानी मानी सस्ती श्री परसहर गौड़ जी को आमंत्रित करते हुए उनसे आज के कार्यकर्म की शुएवात के लिए आगाह किया,  साथ में  देहली में ब्रेन हम्रेज से ग्रस्त एक नन्ही   बालिका के लिए धन जुटाने  के लिए एक अपील  करने  को भी कहा    !  दर्शको ने  करतल ध्वनि के साथ उनका स्वागत  किया !  पराशर जी ने इस मौके पर सब को होली की  बधाई  देते हए कहा " जीवन बिबिध रगों  से  भरा  पड़ा है ! वेसे  इसमें की किस्मे के गुलाल है लेकिन सबसे साफ़ दिखने वाले दो रंग  है  सुख और दुःख  .... !  अपनी अपील की भूमिका बाँधने  के बाद उन्होंने उस बची के बारेमे बोला और उसके माता-पिता की संघर्ष करती जिन्दगी के बारे में भी कहा की कैसे वे उस का जीवन बचाने का  पृयास कर रहे है ..  इतना ही नहीं  वे माइक को वही छोड़कर सबके आगे  धन मागने गए .. जिसका सीधा असर इतना हुआ की एक मिनट में लगभग ५०० डालर इकठा होगये  !  ये आज के कार्यकर्म की सबसे बड़ी उपलब्धि थी.!
 
      होली के सुरवात " होली आई र कान्हा  " जिसमे निर्मल राणा ,सुरुभी  जसमी शर्मा,  अर्चना त्यागी ने  बहुत ही सुंदर ठंग न्रत्य कर सब को लुभाया ! तत पश्च्यात कृष्ण मिश्र ने अपने भाव भंगिना व   अदाउओ  से  "राधा क्यूना जले "  न्रत्य पर सब को आकर्षित करके बहा बह लुटी !  ठोला रे  ठोला  पर नूतन और मयंक की थिरकन देखती ही बनती थी ! इसके बाद आये वो लम्हा जिसने सके ह्रदय को जीत लिया   एक नन्हा सा  भाबी कलाकार आर्यन कंडवाल    जिसने अपनी मधुर आवाज से सबको चकित कर दिया ! असल में आज की स्याम उसके ही नाम रही !  राजेंदर कोठियाल ने पाने चुटकिलो से दर्शको को  को गुद गुदाया !  एक नी प्रतिभा   कुमारी  नारंग जिसने बड़े अंदाज में हिंदी  कबिता  बोली  ! उसके बाद  माहोल  को थोड़ा  और  हल्का बाने के लिए पराशर जी को मंच पर बुलाया गया  ! पराशर जी कनाडा में हास्य व्यंग की के जाने माने हक़स्ताकक्षर है  उन्होंने अपनी सम सायकि कबिता " होली और मै "  जिसमे हश्या और व्यंग का समिश्रण था जिसे सुन सुनकर दर्शक अपने हसी को दबा नहीं पाए और  ठाके मार मार आकर  हँसते   चले गए . ! और अंत में शगुन गुप्ता और इसा गुप्ता  के न्रत्य   का सब ने भरपूर  आनन्द उठाया !
 
     
     सचिन गौर